महाराष्ट्र में SIR नोटिस से परेशान लोगों को राहत, चुनाव आयोग ने 12 अक्टूबर तक बढ़ाई दावे-आपत्तियों की समयसीमा
मुंबई समेत महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) नोटिस मिलने के बाद मची अफरा-तफरी के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने बड़ी राहत दी है. आयोग ने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि को 30 सितंबर से बढ़ाकर 12 अक्टूबर कर दिया है
Maharashtra SIR Deadline Extended: मुंबई और महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत भेजे जा रहे नोटिसों के कारण नागरिकों में बनी असमंजस और चिंता की स्थिति के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. चुनाव आयोग ने राज्य में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम समयसीमा को बढ़ाकर 12 अक्टूबर कर दिया है. इससे पहले यह समयसीमा 30 सितंबर तय की गई थी.
बीएलओ खुद घर आकर एकत्र करेंगे दस्तावेज
नागरिकों को राहत प्रदान करते हुए निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं को अनमैप्ड होने या दस्तावेजों में तकनीकी विसंगतियों (Logical Discrepancies) के लिए नोटिस मिले हैं, उन्हें अब निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) के कार्यालय व्यक्तिगत सुनवाई के लिए जाने की आवश्यकता नहीं है. यह भी पढ़े: Delhi SIR Deadline Extended: चुनाव आयोग ने दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर तक बढ़ाई, ऑनलाइन सुनवाई की भी मिलेगी सुवि
अब बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) सीधे मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ECI के आधिकारिक पोर्टल (ECINet) पर ERO के निर्णय हेतु अपलोड करेंगे. व्यक्तिगत या ऑनलाइन सुनवाई केवल विशेष परिस्थितियों में ही आयोजित की जाएगी.
नया संशोधित शेड्यूल और निस्तारण की तिथियां
निर्वाचन आयोग की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार SIR प्रक्रिया के तहत विभिन्न चरणों की संशोधित तिथियां इस प्रकार हैं:
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दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि: 12 अक्टूबर
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नोटिस, दावों और आपत्तियों के निस्तारण की अंतिम तिथि: 10 नवंबर
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अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तिथि: 16 नवंबर
क्यों पैदा हुई थी चिंता और परेशानी?
दरअसल, मतदाता सूची के सत्यापन के लिए ECI द्वारा जारी किए गए SIR नोटिसों के बाद मुंबई, ठाणे और पुणे सहित राज्य भर के लाखों नागरिक अपने पुराने आवासीय पते, जन्म प्रमाणपत्र और पहचान संबंधी दस्तावेज जुटाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे.
कम समयसीमा और व्यक्तिगत सुनवाई के लिए दफ्तरों में लगने वाली लंबी कतारों के कारण आम जनता में भारी भ्रम और असंतोष का माहौल बन गया था. विभिन्न नागरिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी इस प्रक्रिया को सरल बनाने और समयसीमा बढ़ाने की मांग की थी.
बेघर और गरीब वर्ग के लिए विशेष सहायता केंद्र
प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, दैनिक मजदूरों, गरीबों और बेघरों की सहायता के लिए पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क और विशेष शिविर स्थापित किए जाएं. आयोग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पात्र मतदाता तकनीकी या प्रक्रियात्मक कारणों से अपने मताधिकार से वंचित न रहे.