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मेघालय में कम बारिश ला सकती है पीने के पानी का संकट

असम समेत पूर्वोत्तर के कई राज्य भयावह बाढ़ की चपेट में है.

मेघालय में कम बारिश ला सकती है पीने के पानी का संकट
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

असम समेत पूर्वोत्तर के कई राज्य भयावह बाढ़ की चपेट में है. लेकिन दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश के लिए मशहूर पड़ोसी मेघालय इस सीजन में बारिश के लिए तरस रहा है. वहां जून और जुलाई में सामान्य से 57 फीसदी कम बारिश हुई हैमौसम विभाग की ओर से जारी आंकड़ों में मेघालय में कम बारिश की जानकारी दी गई है. पहली जून से 31 जुलाई के बीच सामान्य से बहुत कम बारिश ने किसानों और पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ा दी है. यह राज्य खेती और पीने के पानी समेत पानी की रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बारिश पर ही निर्भर है.

50 फीसदी कम बारिश

दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश का रिकार्ड बनाने वाले सोहरा (चेरापूंजी) और मौसिनराम इलाके जिस ईस्ट खासी हिल्स जिले में है वहां भी करीब 50 फीसदी कम बारिश हुई है. इस जिले में हर साल जुलाई में करीब 2,796 मिलीमीटर बारिश होती है. लेकिन इस साल सिर्फ 1,403 मिलीमीटर ही हुई है.

मौसिनराम ने 17 जून 2022 को चेरापूंजी को पीछे छोड़ते हुए एक दिन में सबसे ज्यादा बारिश का रिकार्ड बनाया था. उस दिन 24 घंटे के दौरान वहां 1003.6 मिलीमीटर और चेरापूंजी में 972 मिलीमीटर बारिश हुई थी. राज्य के 11 में से 10 जिलों में तस्वीर एक जैसी ही है.

कुछ जिलों में हालात और बुरे हैं. मिसाल के तौर पर वेस्ट जयंतिया हिल्स जिले में इस साल अब तक 78 फीसदी कम बारिश हुई है. सिर्फ साउथ वेस्ट खासी हिल्स जिले में ही स्थिति बेहतर है. अपवाद के तौर पर यहां सामान्य से 83 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है.

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मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य में बारिश के असमान वितरण ने भी चिंता बढ़ा दी है. मौसम विभाग के एक अधिकारी एच.लोवम डीडब्ल्यू को बताते हैं, "हर साल इस सीजन में सामान्य तौर पर 1,626.2 मिमी बारिश होती है. लेकिन इस साल दो महीनों के दौरान महज 681.5 मिमी बारिश ही हुई है. जून के मुकाबले जुलाई में बारिश में और कमी दर्ज की गई है."

लोवम बताते हैं कि मौजूदा मानसून में राज्य में बारिश का असमान वितरण भी चिंता का कारण है. लेकिन आने वाले महीनों में हालत कुछ बेहतर होने की उम्मीद है.

कम बारिश की क्या वजह है

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों से राज्य में बारिश का पैटर्न अनियमित हो गया है. बड़े पैमाने पर जंगल की कटाई, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन इसके अहम कारण हैं.

मौसम विभाग के एक पूर्व अधिकारी जीस.सी. मावलांग डीडब्ल्यू को बताते हैं, "बंगाल की खाड़ी से जमीन की ओर बढ़ते गहरे मौसमी डिप्रेशन ने मानसून की अहम नमी को ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे मध्य और उत्तर भारतीय राज्यों की ओर धकेल दिया है. इसकी वजह से पूर्वोत्तर भारत भारी बारिश वाले क्षेत्र से पूरी तरह बाहर रह गया है."

मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने बारिश के इस अनियमित पैटर्न को 'अस्तित्व का संकट' करार दिया है. उन्होंने राजधानी शिलांग में पत्रकारों से बातचीत में कहा, "अल नीनो के असर और जलवायु परिवर्तन ने राज्य में बारिश के पारंपरिक पैटर्न को स्थाई रूप से बाधित कर दिया है."

मेघालय के वरिष्ठ पर्यावरणविद एम. खोंगताव डीडब्ल्यू से कहते हैं, "सोहरा इलाके में हर साल बारिश घट रही है. दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश वाले इस इलाके में गर्मी के सीजन में पीने के पानी की किल्लत पैदा होने लगी है. इस साल तो आसार और खराब नजर आ रहे हैं."

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश में कमी का असर खेती के अलावा भूगर्भीय जलस्तर, नदियों और झरनों के पानी और पीने के पानी की सप्लाई पर पड़ने का अंदेशा है. अगर अगले दो महीनों के दौरान हालत नहीं सुधरी तो पीने के पानी का संकट पैदा हो सकता है.

मौसम विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी डीडब्ल्यू से कहते हैं, "अगर आने वाले कुछ सप्ताह के दौरान भी बारिश की कमी बनी रहती है तो पानी की उपलब्धता और खेती को लेकर चिंता हो सकती है. हालांकि मानसून का सीजन खत्म होने में अभी काफी समय बाकी है. ऐसे में हालात में सुधार की उम्मीद बनी हुई है."

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 05, 2026 11:40 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).