Kedarnath Yatra Suspended: गौरीकुंड गेट के पास भूस्खलन से केदारनाथ यात्रा रोकी गई; भारी बारिश के बाद पैदल मार्ग बाधित

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच गौरीकुंड गेट के पास भीषण भूस्खलन होने के बाद केदारनाथ यात्रा अस्थायी रूप से रोक दी गई है. पैदल मार्ग पर मलबा और भारी बोल्डर गिरने से श्रद्धालुओं की आवाजाही को रोक दिया गया है.

गौरीकुंड गेट के पास भूस्खलन से केदारनाथ यात्रा रुकी (Photo: File Image)

.रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड (Uttarakhand) के रुद्रप्रयाग जिले (Rudraprayag District) की केदार घाटी (Kedar Valley) में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते गौरीकुंड गेट (Gaurikund Gate) के समीप भीषण भूस्खलन (Landslide) हुआ है. पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा, पत्थर और विशालकाय बोल्डर गिरकर केदारनाथ पैदल मार्ग पर आ गए, जिसके बाद सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रशासन ने केदारनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है.

प्रशासन और पुलिस ने एहतियाती कदम उठाते हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों और पड़ावों पर रोक दिया है ताकि किसी भी तरह की जनहानि से बचा जा सके. यह भी पढ़ें: Kedarnath Temple 2026: भगवान केदारनाथ धाम के कपाट खुले, पीएम नरेंद्र मोदी ने दी शुभकामनाएं और साझा कीं पुरानी तस्वीरें

गौरीकुंड गेट के पास मलबा आने से पैदल मार्ग बाधित

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, केदारनाथ धाम जाने वाले मुख्य पैदल मार्ग पर गौरीकुंड गेट के पास लगातार बारिश के कारण पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा ढह गया. सड़क पर भारी पत्थर और मलबा जमा हो जाने से पैदल मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया.

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में पहाड़ी से तेजी से गिरते हुए पत्थर और मलबा देखा जा सकता है. पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि जब तक मार्ग को पूरी तरह से साफ कर सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता, तब तक यात्रियों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

गौरीकुंड गेट के पास नए भूस्खलन के बाद केदारनाथ का रास्ता बंद कर दिया गया है

फाटा-गौरीकुंड मार्ग पर स्लाइडिंग जोन फिर से सक्रिय

इस बीच, फाटा-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामपुर बाजार के समीप संवेदनशील स्लाइडिंग जोन (Sliding Zone) के दोबारा सक्रिय होने से स्थानीय लोगों और यात्रियों की चिंता बढ़ गई है. डंगा (Retaining Wall) और सड़क के बीच भू-धंसाव की नई दरारें देखने को मिल रही हैं.

उल्लेखनीय है कि इस स्थान पर सुरक्षा कार्य फरवरी और मार्च महीने में शुरू किए गए थे और चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले इसे पूरा घोषित किया गया था. हालांकि, जून के पहले सप्ताह में भारी बारिश के बाद यहां बना एक पुल ढह गया था. उस समय राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग ने निर्माण कार्य में ढिलाई की बात स्वीकार करते हुए बेहतर मानकों के साथ पुनर्निरमाण की बात कही थी.

स्थानीय निवासियों में नाराजगी और सुरक्षा समीक्षा

उसी स्थान पर बार-बार हो रहे भूस्खलन को लेकर स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में नाराजगी है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि भूस्खलन से निपटने के लिए स्थायी और वैज्ञानिक समाधान निकालने के बजाय केवल अस्थायी मरम्मत की जा रही है, जिससे बार-बार सरकारी धन का नुकसान हो रहा है.

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. मार्ग से मलबा हटाकर सुरक्षा का आकलन करने के बाद ही यात्रा दोबारा शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा.

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