नई दिल्ली: पाकिस्तान (Pakistan) के भीतर खैबर पख्तूनख्वा (KP), बलूचिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में भड़की भारी आंतरिक अशांति से वहां की सरकार और सेना बुरी तरह घिरी हुई है. इस बीच, भारतीय खुफिया एजेंसियों (Indian Intelligence Agencies) ने एक बड़ा अलर्ट जारी किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) अपनी जनता का ध्यान इन संकटों से भटकाने के लिए 3 जुलाई 2026 से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की साजिश रच रही है. भारतीय सुरक्षा बल इस खतरे को देखते हुए हाई अलर्ट पर हैं. यह भी पढ़ें: Kailash Mansarovar Yatra 2026: नेपाल में 52 भारतीय तीर्थयात्रियों के फंसने के बाद विदेश मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी; चेक डिटेल्स
पीओके में गहराते संकट से घबराया पाकिस्तान
पाकिस्तानी हुकूमत इस समय चौतरफा दबाव में है. बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के साथ-साथ पीओके के हालात बदतर हो चुके हैं, जहां लोग बुनियादी अधिकारों और पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के खिलाफ सड़कों पर हैं. पाकिस्तान की यह छटपटाहट हाल ही में अफगानिस्तान सीमा पर किए गए हवाई हमलों में भी दिखी. भारतीय एजेंसियों का मानना है कि अपनी नाकामी छुपाने के लिए आईएसआई अब भारत में किसी बड़े आतंकी हमले की योजना बना रही है.
जंगलों में छिपे आतंकियों से संपर्क की कोशिश
इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के इनपुट्स के अनुसार, आईएसआई जम्मू-कश्मीर के घने जंगलों में छिपे मुट्ठी भर आतंकवादियों से संपर्क साधने की लगातार कोशिश कर रही है. पाकिस्तान का इरादा इन मॉड्यूल्स को एक्टिव कर पहलगाम जैसे किसी बड़े आत्मघाती हमले को दोहराने का है. इसके अलावा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर दोनों ही राज्यों में स्लीपर सेल्स को सक्रिय करने के लिए सीमा पार से लगातार संदेश भेजे जा रहे हैं.
चप्पे-चप्पे पर पहरा, तकनीक से लैस सुरक्षा ग्रिड
इस संभावित खतरे को देखते हुए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं. इस साल सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा और आधुनिक बनाया गया है:
- मल्टी-लेयर सुरक्षा: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के हजारों जवानों को यात्रा मार्ग पर तैनात किया गया है.
- प्रोजेक्ट हॉक आई (Project Hawk Eye): आसमान से लेकर जमीन तक 24 घंटे निगरानी रखने के लिए आधुनिक ड्रोन और स्नाइपर टीमों की तैनाती की गई है.
- आधुनिक तकनीक: संवेदनशील रास्तों पर करीब 416 सीसीटीवी कैमरे, फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) और डिजिटल स्कैनिंग प्रणालियों का जाल बिछाया गया है.
सुरक्षा अधिकारियों का रुख: सुरक्षा बलों ने साफ किया है कि आतंकवाद विरोधी नेटवर्क को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है. जम्मू-कश्मीर के राजौरी और डोलीमल के जंगलों में पिछले कई दिनों से सघन तलाशी अभियान (Combing Operations) जारी है ताकि किसी भी घुसपैठ या हमले की कोशिश को समय रहते नाकाम किया जा सके.












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