EPFO 3.0: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने देश के सात करोड़ से अधिक वेतनभोगी अंशधारकों को बड़ी राहत देते हुए अपने नेक्स्ट-जेन डिजिटल प्लेटफॉर्म 'EPFO 3.0' को रोलआउट करना शुरू कर दिया है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के सहयोग से विकसित इस अत्याधुनिक सिस्टम के माध्यम से अब अंशधारक यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और विशेष एटीएम कार्ड के जरिए अपने भविष्य निधि (PF) खाते से तत्काल फंड निकाल सकेंगे. इस तकनीकी बदलाव का मुख्य उद्देश्य सेवानिवृत्ति बचत ढांचे को पूरी तरह से आधुनिक, पारदर्शी और कागजरहित बनाना है.
UPI-ATM के जरिए मिलेगी इंस्टेंट निकासी की सुविधा
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया के अनुसार, नए 'EPFO 3.0' सिस्टम का सफल परीक्षण पूरा कर लिया गया है. अब पीएफ सदस्य आधार ओटीपी (Aadhaar OTP) प्रमाणीकरण के माध्यम से यूपीआई एप्स का उपयोग करके सीधे अपने बैंक खातों में आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) की राशि तुरंत ट्रांसफर कर सकते हैं. यह भी पढ़े: EPFO 3.0: 8 करोड़ पीएफ खाताधारकों को बड़ी राहत, अब यूपीआई के जरिए तुरंत निकाल सकेंगे EPF का पैसा
इसके साथ ही, डिजिटल बैंकिंग से दूर या ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले उन अंशधारकों के लिए विशेष ईपीएफ-लिंक्ड एटीएम कार्ड (EPF-linked ATM Cards) पेश किए जा रहे हैं, जिनके पास इंटरनेट की सीमित पहुंच है. ये सदस्य अधिकृत एटीएम मशीनों से सीधे नकदी निकाल सकेंगे.
ऑटो-सेटलमेंट की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये की गई
प्रशासनिक देरी और कागजी कार्रवाई को कम करने के लिए ईपीएफओ ने ऑटोमैटिक क्लेम सेटलमेंट (Automated Claim Settlement) की सीमा को ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दिया है. इसका मतलब यह है कि इस तय सीमा के भीतर किए गए सभी वैध दावों को बिना किसी ईपीएफओ अधिकारी के मानवीय हस्तक्षेप के, सिस्टम द्वारा स्वचालित रूप से प्रोसेस कर दिया जाएगा.
इसके अलावा, अब सामान्य डिजिटल दावों पर नियोक्ता (Employer) के सत्यापन या डिजिटल हस्ताक्षर की पारंपरिक आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है. अब केवल स्व-सत्यापन (Self-Certification) और लिंक्ड केवाईसी (KYC) डेटा के आधार पर ही क्लेम पास हो जाएंगे, जिससे क्लेम रिजेक्शन दरों में भारी कमी आएगी.
निकासी के नियमों में बड़ा बदलाव
पुराने सिस्टम के तहत आंशिक फंड एडवांस के लिए तय की गई 13 अलग-अलग श्रेणियों को अब समेकित कर केवल 5 व्यापक समूहों में बदल दिया गया है. इसमें चिकित्सा, शिक्षा, विवाह, आवास और विशेष परिस्थितियां शामिल हैं. नए और पुराने नियमों के बड़े अंतर को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है.
| विशेषता | पुराने नियम | नए नियम (EPFO 3.0) |
| निकासी की श्रेणियां | 13 विशिष्ट श्रेणियां | 5 व्यापक, समेकित श्रेणियां |
| न्यूनतम सेवा अवधि | 2 से 7 वर्ष (उद्देश्य के आधार पर) | सभी के लिए समान 12 महीने का आधार |
| पहुंच योग्य फंड | मुख्य रूप से केवल कर्मचारी का हिस्सा | कुल संयुक्त बैलेंस का 75% तक |
| पेंशन सुरक्षा लॉक-इन | कोई औपचारिक सुरक्षा नहीं | 25% बैलेंस अनिवार्य रूप से लॉक रहेगा |
नए ढांचे के तहत अब सदस्य केवल अपने हिस्से की राशि ही नहीं, बल्कि कंपनी के योगदान और उस पर अर्जित ब्याज को मिलाकर कुल जमा राशि का 75% तक निकाल सकते हैं. 'विशेष परिस्थितियों' की श्रेणी के तहत अंशधारक बिना कोई कारण बताए या बिना कोई भौतिक दस्तावेज अपलोड किए भी एडवांस के लिए अनुरोध कर सकते हैं.
बेरोजगार होने पर मिलेगा मजबूत सुरक्षा कवच
संशोधित दिशानिर्देशों में नौकरी छूटने की स्थिति में कर्मचारियों के लिए बेहतर वित्तीय राहत की व्यवस्था की गई है. यदि कोई अंशधारक बेरोजगार हो जाता है, तो वह तत्काल खर्चों को पूरा करने के लिए केवल एक महीने की बेरोजगारी के बाद अपने कुल बैलेंस का 75% तक निकाल सकता है. बची हुई 25% राशि का दावा तब किया जा सकता है, जब वह व्यक्ति पूरे 12 महीने की अवधि के बाद भी बेरोजगार रहता है. हालांकि, आधिकारिक सेवानिवृत्ति की आयु पर, या स्थायी विकलांगता और स्थायी रूप से विदेश प्रवास जैसी विशेष स्थितियों में 100% फंड की निकासी की अनुमति पहले की तरह जारी रहेगी.
भविष्य के लिए सख्त पूंजी संरक्षण नियम लागू
जहां एक ओर शुरुआती करियर की जरूरतों के लिए लिक्विडिटी (नकदी उपलब्धता) को प्राथमिकता दी गई है, वहीं दूसरी ओर सेवानिवृत्ति के दीर्घकालिक फंड को सुरक्षित रखने के लिए ईपीएफओ ने कड़े नियम लागू किए हैं. नए 'रिंग-फेंसिंग' नियम के तहत किसी भी सदस्य के कुल संचय का कम से कम 25% हिस्सा अनिवार्य रूप से लॉक रहेगा, जिसे केवल सेवानिवृत्ति के समय ही निकाला जा सकेगा.
इसके अलावा, कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के नियमों को भी सख्त किया गया है. अब सदस्यों को पेंशन लाभ वापस लेने के लिए पात्र होने से पहले कम से कम 36 महीने (3 वर्ष) की सेवा पूरी करनी होगी, जो पहले केवल दो महीने थी. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कर्मचारी अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत में ही महत्वपूर्ण पेंशन संपत्तियों को पूरी तरह समाप्त न कर सकें.












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