8th Pay Commission Update: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों की मांग तेज, ग्रेच्युटी सीमा बढ़ाकर ₹50-75 लाख करने की सिफारिश
एसोसिएशन का कहना है कि 33 वर्ष या उससे अधिक की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट ग्रेच्युटी मूल वेतन और डीए का 32 गुना होनी चाहिए, जो अधिकतम 50 लाख रुपये के दायरे में हो.
8th Pay Commission Update: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के समक्ष ज्ञापन सौंपने की 15 जून की समयसीमा के बीच केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न संगठनों ने अपनी मांगें रख दी हैं. व्यक्तिगत वित्त (Personal Finance) और रिटायरमेंट सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संगठनों ने ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 50 से 75 लाख रुपये करने और इसके कैलकुलेशन के लिए नए फॉर्मूले अपनाने की सिफारिश की है. वर्तमान में अधिकतम ग्रेच्युटी सीमा 25 लाख रुपये है. कर्मचारियों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई और वेतन स्तर को देखते हुए इस व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत है.
IRTSA ने दिया 50 लाख रुपये की सीमा और नया फॉर्मूला
इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने सरकार के सामने प्रस्ताव रखा है कि रिटायरमेंट ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया जाना चाहिए. इसके साथ ही एसोसिएशन ने एक नया फॉर्मूला भी सुझाया है.
IRTSA के मुताबिक, रिटायरमेंट ग्रेच्युटी की गणना इस प्रकार होनी चाहिए:
ग्रेच्युटी = (1/3) × (मूल वेतन + डीए) × (अर्हता सेवा के पूरे हुए छमाही चक्र की संख्या)
एसोसिएशन का कहना है कि 33 वर्ष या उससे अधिक की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट ग्रेच्युटी मूल वेतन और डीए का 32 गुना होनी चाहिए, जो अधिकतम 50 लाख रुपये के दायरे में हो.
सेवाकाल के आधार पर डेथ ग्रेच्युटी का प्रस्ताव
IRTSA ने सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर मिलने वाली डेथ ग्रेच्युटी में भी बड़े बदलाव की मांग की है. इसके लिए उन्होंने निम्नलिखित स्लैब का प्रस्ताव दिया है:
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1 वर्ष से कम की सेवा: मूल वेतन का 4 गुना.
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1 वर्ष से अधिक लेकिन 5 वर्ष से कम सेवा: मूल वेतन का 12 गुना.
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5 वर्ष से अधिक लेकिन 11 वर्ष से कम सेवा: मूल वेतन का 24 गुना.
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11 वर्ष से अधिक लेकिन 20 वर्ष से कम सेवा: मूल वेतन का 30 गुना.
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20 वर्ष या उससे अधिक की सेवा: प्रत्येक छमाही के लिए परिलब्धियों (Emoluments) का आधा हिस्सा, जो अधिकतम 50 गुना तक हो सकता है.
NC-JCM स्टाफ साइड की मांग: 75 लाख की सीमा और 25 दिनों का आधार
नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की स्टाफ साइड ने ग्रेच्युटी की सीमा को सीधे 75 लाख रुपये करने की वकालत की है. संगठन का कहना है कि महीने में 30 दिनों के बजाय 25 प्रभावी कार्यदिवसों के आधार पर ग्रेच्युटी की गणना की जानी चाहिए.
स्टाफ साइड के प्रतिनिधियों के अनुसार, ऐसा करने से सरकारी कर्मचारियों को 'पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट' के तहत आने वाले अन्य कर्मचारियों के मुकाबले नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा. इसके अलावा, उन्होंने मौजूदा 16.5 गुना की अधिकतम सीमा को भी हटाने की मांग की है, क्योंकि यह 33 वर्ष से अधिक सेवा देने वाले कर्मचारियों की ग्रेच्युटी को सीमित कर देता है.
विभिन्न पेंशन प्रणालियों में समानता की मांग
रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने भी अपनी सिफारिशों में कहा है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए ग्रेच्युटी की सीमा की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए. साथ ही, रिटायरमेंट के वक्त बिना किसी प्रक्रियात्मक देरी के तुरंत भुगतान सुनिश्चित किया जाए.
RSCWS ने यह भी मुद्दा उठाया है कि पुरानी पेंशन योजना (OPS), राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और एकीकृत पेंशन योजना (UPS) के तहत ग्रेच्युटी के प्रावधानों को तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए ताकि सभी प्रणालियों के बीच निष्पक्षता और समानता बनी रहे.
क्या हैं वर्तमान नियम?
फिलहाल लागू नियमों के मुताबिक, रिटायरमेंट-कम-डेथ ग्रेच्युटी की गणना कर्मचारी के मूल वेतन + डीए के 1/4 हिस्से को उसकी हर छह महीने की अर्हता सेवा (Qualifying Service) से गुना करके की जाती है. यह भुगतान अधिकतम 16.5 गुना तक ही सीमित है और इसके लिए अधिकतम वित्तीय सीमा 25 लाख रुपये तय है. यह लाभ उन कर्मचारियों को मिलता है जिन्होंने कम से कम 5 वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो.
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये सभी सुझाव और फॉर्मूले फिलहाल विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा 8वें वेतन आयोग को भेजे गए प्रस्ताव मात्र हैं. आयोग ने अभी तक इन पर अपनी अंतिम मंजूरी या सिफारिशें नहीं दी हैं.