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प्याज निर्यात पर पाबंदी से भारत के पड़ोसी देश परेशान

भारत सरकार ने प्याज की महंगाई को काबू करने के लिए निर्यात पर पाबंदी लगा दी है.

प्याज निर्यात पर पाबंदी से भारत के पड़ोसी देश परेशान
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारत सरकार ने प्याज की महंगाई को काबू करने के लिए निर्यात पर पाबंदी लगा दी है. अब इसका असर उसके पड़ोसी देशों में देखने को मिल रहा है.भारत सरकार ने प्याज की महंगाई को काबू करने के लिए निर्यात पर पाबंदी लगा दी है. अब इसका असर उसके पड़ोसी देशों में देखने को मिल रहा है. भारत के किसान भी सरकार के फैसले से नाराज हैं और फैसले के खिलाफ विरोध पर उतर आए हैं.

आठ दिसंबर को केंद्र सरकार ने प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी. सरकार ने यह फैसला प्याज की कीमतों को काबू करने के लिए था. यह पाबंदी 31 मार्च 2024 तक लागू रहेगी. इससे पहले सरकार ने प्याज की महंगाई को काबू करने के लिए निर्यात पर 40 फीसदी का शुल्क लगाया था. और उसके बाद इसका न्यूनतम निर्यात मूल (एमईपी) 800 डॉलर प्रति टन कर दिया था.

सरकारके फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र के किसान और प्याज व्यापारी काफी नाराज हैं. सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं बाकी के अन्य राज्यों के किसान भी सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि प्याज का निर्यात बंद होने से उसका दाम गिर गया है और उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है.

किसानों की मांग है कि सरकार प्याज के निर्यात पर लगी रोक को हटाए, ताकि उन्हें फसल का उचित दाम मिल सके और वे अपनी लागत निकाल सकें. लेकिन रॉयटर्स के मुताबिक भारत सरकार इस फैसले को अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले शायद ही वापस ले ले.

पड़ोसी देशों में महंगाई की मार

लेकिन सिर्फ भारत के किसानों पर ही इस फैसले का असर नहीं दिखने को मिल रहा है बल्कि उसके पड़ोसी देश भी इस फैसले से परेशान हैं. काठमांडू से लेकर कोलंबो तक आम ग्राहक प्याज के ऊंचे दाम से परेशान हैं.

भारत के पड़ोसी देश जैसे बांग्लादेश, मलयेशिया, नेपाल और यहां तक की संयुक्त अरब अमीरात भीभारतीय प्याज पर निर्भर रहते हैं.

ढाका में निजी दफ्तर में काम करने वाली मौसमी अख्तर ने कहा, "प्याज की जरूरत हर खाने में पड़ती है. अब अचानक दाम बढ़ने से हमारी परेशानी बढ़ गई है." उन्होंने बताया, "अब मुझे प्याज की खरीदारी में कटौती करनी पड़ रही है."

व्यापारियों का अनुमान है कि एशियाई देशों द्वारा किए जाने वाले प्याज के आयात में आधे से अधिक हिस्सा भारत का है. चीन या मिस्र जैसे प्रतिद्वंद्वी निर्यातकों के मुकाबले भारत से कम शिपमेंट समय अहम भूमिका निभाता.

भारत ने 31 मार्च को समाप्त वित्तीय वर्ष में रिकॉर्ड 25 लाख मीट्रिक टन प्याज का निर्यात किया, जिसमें से 6,71,125 टन पड़ोसी देश बांग्लादेश को गया, जो इस सब्जी का सबसे बड़ा खरीदार है.

चुनौती से कैसे निपट रहे देश

बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी तपन कांति घोष ने बताया कि इस कमी को दूर करने के लिए वह चीन, मिस्र और तुर्की से अधिक से अधिक प्याज मंगाने की कोशिश कर रहे हैं.

बांग्लादेश में अगले साल आम चुनाव होने हैं. ऐसे में वहां की सरकार गरीबों को कम कीमत में प्याज बेच रही है. वह भारत द्वारा लगाए बैन के असर को चुनाव के पहले कम करना चाहती है.

इससे भी बुरा हाल नेपाल में है. नेपाल के वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी तीर्थराज चिलुवाल ने कहा, "भारत द्वारा प्रतिबंध के बाद से हमने विभिन्न जगहों पर सप्लाई की स्थिति की निगरानी की. वहां बिक्री के लिए प्याज नहीं है."

नेपाल के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता गजेंद्र कुमार ठाकुर ने बताया कि नेपाल चीन से आयात पर विचार कर रहा है और भारत से खास छूट देने के लिए कह सकता है.

भारतीय व्यापारियों का कहना है कि निर्यात पर लगी पाबंदी के बाद प्याज के दामों में 20 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई. नई फसल के बाद दाम और गिर गए हैं. दिल्ली ने चावल, चीनी और गेहूं के निर्यात पर भी लगाम लगाई है.

एए/वीके (रॉयटर्स)

(The above story first appeared on LatestLY on Dec 21, 2023 11:40 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).