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भारत एक 'कनेक्टर देश' के रूप में कार्य करने की मजबूत स्थिति में आगे बढ़ रहा: आरबीआई

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा कि वैश्विक व्यापार पुनर्गठन और औद्योगिक नीति में बदलाव के बीच भारत एक 'कनेक्टर देश' के रूप में कार्य करने की मजबूत स्थिति में आगे बढ़ रहा है. देश टेक्नोलॉजी, डिजिटल सर्विस और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर में एक प्रमुख मध्यस्थ बन सकता है.

भारत एक 'कनेक्टर देश' के रूप में कार्य करने की मजबूत स्थिति में आगे बढ़ रहा: आरबीआई
RBI (img: ANI)

नई दिल्ली, 22 मई : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा कि वैश्विक व्यापार पुनर्गठन और औद्योगिक नीति में बदलाव के बीच भारत एक 'कनेक्टर देश' के रूप में कार्य करने की मजबूत स्थिति में आगे बढ़ रहा है. देश टेक्नोलॉजी, डिजिटल सर्विस और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर में एक प्रमुख मध्यस्थ बन सकता है. केंद्रीय बैंक की 'स्टेट ऑफ द इकोनॉमी' रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मौद्रिक, वित्तीय और राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत स्थिरता और निश्चितता, अनुकूल कारोबारी माहौल और मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल के साथ-साथ ट्रांसपेरेंट, नियम-आधारित और दूरदर्शी पॉलिसी इकोसिस्टम से घिरी हुई है.

अप्रैल 2025 के आईएमएफ अनुमानों के अनुसार, भारत इस साल सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा और जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन सकता है. मुद्रास्फीति का दबाव काफी कम हो गया है. अब यह उम्मीद है कि मुद्रास्फीति की दर निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप बनी रहेगी, जो कि 2025-26 के लिए निर्धारित किया गया है. उपभोक्ता और व्यवसाय आर्थिक गतिविधि को मजबूत करने के लिए आश्वस्त और सहायक बने हुए हैं. यह भी पढ़ें : Sensex Update: कमजोर वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 644 अंक फिसला

इसके अलावा, जनवरी 2025 से रिजर्व बैंक के उपायों ने लिक्विडिटी की स्थिति को काफी हद तक आसान बना दिया है. मार्च 2025 के अंत से सिस्टम लिक्विडिटी अधिशेष में बनी हुई है. वैश्विक पूंजी प्रवाह पर अनिश्चितताओं के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने मार्च 2025 में निफ्टी-500 कंपनियों के स्वामित्व में एफपीआई को पीछे छोड़ दिया है. यह भारतीय इक्विटी बाजारों में एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है क्योंकि म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों सहित डीआईआई ने खुदरा और एसआईपी प्रवाह के साथ एफपीआई द्वारा उत्पन्न अस्थिरता को तेजी से संतुलित किया है, जो एक स्थिर दीर्घकालिक निवेश आधार प्रदान करता है.

रिजर्व बैंक ने कहा कि भारत-पाकिस्तान तनाव कम होने, वैश्विक व्यापार परिदृश्य में सुधार और घरेलू मुद्रास्फीति में नरमी के बीच घरेलू वित्तीय बाजारों के सेंटिमेंट में बदलाव देखा गया है. आरबीआई के अनुसार, इस परिदृश्य में, हाल ही में ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौते का पूरा होना द्विपक्षीय व्यापार संबंधों के मजबूत होने की ओर इशारा करता है. आरबीआई के अनुसार, "मौजूद चुनौतीपूर्ण स्थितियों के बावजूद, भारत आत्मविश्वास के साथ इन वैश्विक चुनौतियों का सामना करने, उभरते अवसरों का लाभ उठाने और वैश्विक विकास के प्रमुख चालक के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करने के लिए अच्छी स्थिति में है."

(The above story first appeared on LatestLY on May 22, 2025 04:38 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).