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India-China: सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का बड़ा बयान, कहा- चीन से लगती उत्तरी सीमा पर खतरा अभी भी कम नहीं हुआ है

सकारात्मक घटनाक्रम के बारे में एक सवाल के जवाब में, शीर्ष सैन्य अधिकारी ने बताया, बातचीत लंबे समय से चल रही है. यह अच्छी बात है कि बातचीत चल रही है. हमें एक-दूसरे से बात करते रहना है. हालांकि, सेना प्रमुख ने कहा कि आंशिक रूप से सैनिक पीछे हटे हैं, लेकिन खतरा कम नहीं हुआ है.

India-China: सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का बड़ा बयान, कहा- चीन से लगती उत्तरी सीमा पर खतरा अभी भी कम नहीं हुआ है
मनोज मुकुंद नरवणे (Photo Credits: Twitter)

नई दिल्ली: सेना प्रमुख (सीओएएस) जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (Manoj Mukund Naravane) ने बुधवार को कहा कि बेशक आंशिक तौर पर सैनिक (Soldier) पीछे हटे हों, मगर चीन से लगती उत्तरी सीमा पर खतरा कम नहीं हुआ है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय पक्ष से बल की तैनाती में वृद्धि हुई है. भारतीय सेना (Indian Army) के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए, नरवणे ने कहा, हम अपने दावों की पवित्रता सुनिश्चित करते हुए पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) से शांतिपूर्ण तरीके से निपटना जारी रखेंगे. आवश्यक सुरक्षा उपाय मौजूद हैं. India-China: चीन की ओर से पैंगोंग झील पर पुल के अवैध निर्माण पर भारत ने जताया कड़ा विरोध

सेना प्रमुख ने कहा कि पिछले एक साल में देश की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर सकारात्मक विकास हुआ है. उन्होंने कहा कि उत्तरी सीमाओं पर, भारतीय सेना पीएलए के साथ निरंतर बातचीत में संलग्न रहते हुए, उच्चतम स्तर की परिचालन तैयारियों को बनाए रखना जारी रखे हुए है.

यह कहते हुए कि लगातार संयुक्त प्रयासों के बाद, कई स्थानों पर दोनों पक्षों की ओर से सैनिकों को पीछे हटाया गया है, नरवणे ने कहा कि कोर कमांडर स्तर की 14वें दौर की वार्ता चल रही है और उन्हें आने वाले दिनों में कुछ सकारात्मक विकास की उम्मीद है.

उन्होंने कहा, हम मौजूदा दौर की बातचीत में पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 (हॉट स्प्रिंग) मुद्दे को हल करने की उम्मीद करते हैं. एक बार ऐसा हो जाने के बाद, हम मौजूदा गतिरोध से पहले के अन्य मुद्दों पर गौर करेंगे.

सकारात्मक घटनाक्रम के बारे में एक सवाल के जवाब में, शीर्ष सैन्य अधिकारी ने बताया, बातचीत लंबे समय से चल रही है. यह अच्छी बात है कि बातचीत चल रही है. हमें एक-दूसरे से बात करते रहना है. हालांकि, सेना प्रमुख ने कहा कि आंशिक रूप से सैनिक पीछे हटे हैं, लेकिन खतरा कम नहीं हुआ है.

नरवणे ने कहा कि उन क्षेत्रों में बल का स्तर पर्याप्त रूप से बढ़ाया गया है, जहां अभी तक सैनिक पीछे नहीं हटे हैं. क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करने के सेना के जनादेश को ध्यान में रखते हुए और पीएलए बलों और सैन्य बुनियादी ढांचे के प्रमुख वृद्धि का जवाब देने के लिए खतरे के आकलन और आंतरिक विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप बलों का पुन: संगठन और पुनसंर्रेखण हुआ है.

उत्तरी सीमाओं के साथ बुनियादी ढांचे के उन्नयन और विकास के बारे में बात करते हुए, अधिकारी ने कहा कि इसे समग्र और व्यापक तरीके से किया जा रहा है, जिसमें हर मौसम में संपर्क के लिए सड़कों और सुरंगों का निर्माण, रणनीतिक रेलवे लाइनें, ब्रह्मपुत्र पर अतिरिक्त पुल, महत्वपूर्ण भारत-चीन सीमा सड़कों पर पुलों का उन्नयन, और ईंधन एवं गोला बारूद की आपूर्ति के लिए भंडारण शामिल हैं.

उन्होंने कहा, दोहरे उपयोग के बुनियादी ढांचे की पहचान करने के लिए भी प्रमुख प्रयास किए गए हैं. पाकिस्तान के साथ सीमाओं के बारे में बात करते हुए, नरवणे ने कहा कि नियंत्रण रेखा के साथ, लंबी अवधि के लिए तनावपूर्ण स्थिति के बाद, पिछले साल फरवरी में डीजीएमओ की समझ का उद्देश्य पारस्परिक रूप से लाभप्रद और स्थायी शांति प्राप्त करना था.

नरवणे ने कहा, परिणामस्वरूप, स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. हालांकि, नियंत्रण रेखा के पार लॉन्च पैड में आतंकवादियों की एकाग्रता में वृद्धि और बार-बार घुसपैठ के प्रयास एक बार फिर उनके (पाकिस्तान के) नापाक इरादों को उजागर कर रहे हैं. उन्होंने कहा, हमने अपनी ओर से आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस दिखाने का संकल्प लिया है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 12, 2022 05:44 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).