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कैसे चुना जाता है भारत का उपराष्ट्रपति

विपक्षी पार्टियों के 'इंडिया' ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति चुनाव में उतारने का फैसला किया है.

कैसे चुना जाता है भारत का उपराष्ट्रपति
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

विपक्षी पार्टियों के 'इंडिया' ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति चुनाव में उतारने का फैसला किया है. जानिए कैसे होता है भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव.उपराष्ट्रपति का चुनाव नौ सितंबर को होना है. सत्ताधारी एनडीए पहले ही भारतीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) नेता और इस समय महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाने की घोषणा कर चुका है. विपक्ष के उम्मीदवार की घोषणा के साथ ही चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं.

विपक्ष की तरफ से कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मीडिया को बताया कि इंडिया ब्लॉक् की सभी पार्टियों ने मिल कर एक 'कॉमन कैंडिडेट' को चुनाव में खड़ा करने का फैसला लिया है.

दोनों उम्मीदवारों का परिचय

उन्होंने यह भी कहा कि सभी पार्टियों का सर्वसम्मति से एक नाम पर सहमत हो जाना लोकतंत्र के लिए एक उपलब्धि है. खरगे ने यह भी कहा कि जब भी लोकतंत्र और संविधान खतरे में होता है, तब विपक्ष के लोग "एक होकर अन्याय के खिलाफ लड़ते हैं."

सीपी राधाकृष्णन कई दशकों से आरएसएस और बीजेपी के सदस्य हैं. उन्होंने 1998 और 1999 में बीजेपी के टिकट पर तमिलनाडु के कोयंबटूर से लोकसभा चुनावों में जीत हासिल की थी. उसके बाद उन्होंने तीन बार और चुनाव लड़ा लेकिन हार गए.

वो तमिलनाडु में बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. फरवरी 2023 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल बनाया गया. बाद में उन्होंने तेलंगाना के राज्यपाल और पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाला. जुलाई 2024 में उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया.

दूसरी तरफ, विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी जाने माने कानूनविद हैं. उन्होंने 1971 में आंध्र प्रदेश से वकालत की शुरुआत की थी और वो 1995 में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के जज बन गए थे. वो 2005 में गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने और और 2007 में सुप्रीम कोर्ट के जज.

न्यायमूर्ति रेड्डी 2011 में सेवानिवृत्त हुए. खरगे के मुताबिक वो "सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के चैंपियन" रहे हैं और उनके कई फैसलों में गरीबों के प्रति झुकाव नजर आता है.

कैसे होता है चुनाव

उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचन मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज) द्वारा होता है. चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व (प्रपोर्शनल रिप्रजेंटेशन) पद्धति के अनुसार होता है. इसमें 'सिंगल ट्रांसफरेबल वोट' का इस्तेमाल किया जाता है. मतदान गुप्त होता है.

इस चुनाव में जितने उम्मीदवार होते हैं, हर मतदाता के पास उतनी ही वरीयताएं होती हैं. मतदाता जिस उम्मीदवार को अपनी पहली वरीयता के रूप में चुनता है, अपने मत-पत्र पर उसके नाम के आगे अंक 1 लिखता है.

अगर उम्मीदवार कई हैं, तो मतदाता जितनी चाहे उतनी वरीयताएं दिखा सकता है. ऐसा करने के लिए उसे हर उम्मीदवार के नाम के आगे अंक 2,3,4 आदि लिखना होता है. मतगणना के समय हर उम्मीदवार द्वारा हासिल किए गए प्रथम वरीयता वाले मतों की संख्या का पता लगाया जाता है.

इस प्रकार पता लगाई गई संख्याओं को जोड़ा जाता है, फिर जो संख्या मिली उसे दो से विभाजित किया जाता है और किसी भी शेषफल (रिमेंडर) पर ध्यान न देते हुए भागफल (कोशंट) में एक जोड़ा जाता है. ऐसा करने के बाद जो संख्या हासिल होती है उसे एक कोटा माना जाता है. जिस भी उम्मीदवार ने यह कोटा हासिल कर लिया उसे आगे की प्रक्रिया के लिए योग्य माना जाता है.

इसके बाद अगर पहली, दूसरी या तीसरी आदि गणना के अंत में किसी उम्मीदवार के कुल वोटों की संख्या कोटे के बराबर या उससे अधिक हो, तो उसे चुनाव में विजेता घोषित कर दिया जाता है. अगर किसी गणना के अंत में, कोई भी उम्मीदवार विजेता बन कर नहीं उभरता है तो प्रक्रिया फिर आगे बढ़ती है.

एक एक कर सबसे नीचे वालों को हटाया जाता है

अब इस चरण तक जिस उम्मीदवार को सबसे कम वोट मिले हों उसे चुनाव से बाहर किया जाता है. उसके बैलट पेपरों की फिर से जांच की जाती है और यह देखा जाता है कि उन पर दूसरी वरीयता अंकित की गई है या नहीं. इन बैलट पेपरों को उन उम्मीदवारों को ट्रांसफर कर दिया जाता है जिनके लिए ऐसी दूसरी वरीयताएं अंकित की गई हैं.

उन बैलट पेपरों के वोटों के मूल्य को ऐसे उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त वोटों के मूल्य में जोड़ दिया जाता है. इन मत पत्रों को बाकी बचे हुए उम्मीदवारों को ट्रांसफर कर दिया जाता है. जिन मत पत्रों पर दूसरी वरीयता अंकित नहीं की जाती है, उन्हें समाप्त मत पत्र मान लिया जाता है और आगे उनकी गणना नहीं की जाती है, चाहे उनमें तीसरी या कोई अन्य वरीयता अंकित हो.

इस गणना के अंत में अगर कोई उम्मीदवार कोटा प्राप्त कर लेता है, तो उसे निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है. अगर तब भी कोई भी कोटा की बराबरी नहीं कर पता है, तो गिनती को आगे बढ़ाया जाता है. सबसे पहले इस चरण तक सूची में सबसे नीचे रहने वाले उम्मीदवार को हटा दिया जाता है.

उसके सभी बैलट पेपरों की फिर से जांच की जाती है और यह देखा जाता है कि उनमें "अगली उपलब्ध वरीयता" अंकित है या नहीं. अगर पहली गिनती में उसे हासिल हुए किसी बैलट पेपर पर किसी भी बचे हुए उम्मीदवार के लिए दूसरी वरीयता अंकित दिखाई देती है तो उसे उस उम्मीदवार को ट्रांसफर कर दिया जाता है.

अगर ऐसे किसी बैलट पेपर पर दूसरी वरीयता उस उम्मीदवार के लिए अंकित दिखाई देती है जो पहले ही दूसरे दौर में बाहर हो चुका है, तो ऐसे बैलट पेपर को तीसरी वरीयता के संदर्भ में ट्रांसफर कर दिया जाता है. इसी तरह दूसरे दौर में ट्रांसफर होकर उसे मिले बैलट पेपरों की उन पर अंकित तीसरी वरीयता के संदर्भ में जांच की जाती है.

सूची में सबसे नीचे वाले उम्मीदवारों को हटाने की यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है, जब तक कोई एक उम्मीदवार कोटा हासिल नहीं कर लेता. अंत में कोटा हासिल कर लेने वाले उम्मीदवार को विजेता घोषित कर दिया जाता है.

2022 में हुए पिछले उपराष्ट्रपति चुनावों में एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने जीत हासिल की थी. लेकिन उन्होंने 21 जुलाई 2025 को अपना कार्यकाल समाप्त होने से दो साल पहले ही "स्वास्थ्य कारणों" से अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 19, 2025 07:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).