Uttarakhand Tension: चमोली विवाद के बाद उत्तराखंड-हिमाचल बॉर्डर पर भारी तनाव; पुलिस बैरिकेड्स तोड़ राज्य में घुसे निहंग सिख
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित कुल्हाल चेक पोस्ट पर गुरुवार देर रात भारी तनाव पैदा हो गया। चमोली के कर्णप्रयाग में स्थानीय निवासियों के साथ हुए विवाद के बाद, पंजाब से आ रहे निहंग सिखों के एक समूह ने पुलिस द्वारा लगाए गए सुरक्षा बैरिकेड्स को तोड़ दिया और उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश कर गए. इसके बाद देहरादून सहित पूरे मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है.
देहरादून: उत्तराखंड (Uttarakhand) में गुरुवार, 25 जून 2026 की देर रात उस समय कानून-व्यवस्था की स्थिति संवेदनशील हो गई, जब निहंग सिखों (Nihang Sikhs) के एक समूह ने उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा (Uttarakhand-Himachal Pradesh Border) स्थित कुल्हाल चेक पोस्ट पर पुलिस के मल्टी-लेयर बैरिकेड्स को कथित तौर पर तोड़ दिया और राज्य की सीमा में प्रवेश कर गए. यह पूरा घटनाक्रम चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हाल ही में स्थानीय निवासियों और निहंग सिखों के बीच हुए एक तीखे विवाद के बाद उपजे तनाव का हिस्सा है. निहंग सिखों का यह जत्था हेमकुंड साहिब की ओर बढ़ने की मांग पर अड़ा हुआ है, जिसके बाद देहरादून प्रशासन ने पूरे जिले में अलर्ट जारी कर दिया है. यह भी पढ़ें: Ratlam: रतलाम में मुहर्रम जुलूस के दौरान बड़ा हादसा, हाईटेंशन लाइन से टकराया ताजिया; करंट लगने से लोगों की मौत, कई झुलसे
बॉर्डर पर घंटों चला गतिरोध, वार्ता रही विफल
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, चंडीगढ़ और पंजाब के मोहाली से लगभग 200 निहंग सिखों का एक जत्था हिमाचल प्रदेश के रास्ते उत्तराखंड की ओर बढ़ रहा था. इसकी पूर्व सूचना मिलते ही उत्तराखंड पुलिस और जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर विकासनगर क्षेत्र के कुल्हाल चेक पोस्ट को एक किले में तब्दील कर दिया था और भारी बैरिकेडिंग कर दी थी.
तनाव को टालने के लिए हिमाचल के पोंटा साहिब गुरुद्वारे में प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस कप्तानों और निहंग सिखों के प्रतिनिधियों के बीच करीब दो घंटे तक लंबी बैठक चली, जो बेनतीजा रही. हालांकि जत्थे का एक हिस्सा वापस लौटने पर सहमत हो गया, लेकिन करीब 20 से 30 निहंग सिख कुल्हाल पुल को पार कर सीधे चेक पोस्ट पर पहुंच गए, जहां सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके बाद बॉर्डर पर कई घंटों तक गतिरोध (Standoff) बना रहा.
तलवारें लहराते हुए आगे बढ़े, सुरक्षा में आईटीबीपी तैनात
रात के बढ़ते अंधेरे के बीच, स्थिति तब और बिगड़ गई जब सुरक्षा घेरे को दरकिनार करते हुए निहंग सिखों का यह समूह जबरन बैरिकेड्स को पार कर देहरादून-पोंटा हाईवे की ओर बढ़ गया. अधिकारियों ने बताया कि समूह के कुछ सदस्यों को धर्मवाला की ओर बढ़ते समय पारंपरिक हथियार और तलवारें लहराते हुए देखा गया.
इस घटना के बाद उत्तराखंड प्रशासन ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए हाईवे और संवेदनशील चौकियों पर भारी पुलिस बल के साथ-साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों को तैनात कर दिया है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के विभिन्न थानों से अतिरिक्त पुलिस फोर्स को बॉर्डर और विकासनगर रूट पर रवाना किया गया है.
देहरादून शहर के प्रवेश द्वारों पर नाकाबंदी
गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात को पुलिस ने इस समूह को देहरादून मुख्य शहर में प्रवेश करने से रोकने के लिए प्रेम नगर चौक पर मजबूत बैरिकेड्स लगा दिए. देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) पारमेंद्र डोबाल खुद आधी रात को मौके पर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया.
शुक्रवार तड़के करीब 1 बजे तक यह समूह प्रेम नगर क्षेत्र तक नहीं पहुंचा था, जिसके बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां ड्रोन (Drones) की मदद से इन निहंग सिखों की सही लोकेशन और उनके द्वारा अपनाए गए वैकल्पिक रास्तों का पता लगाने में जुट गईं.
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
इस मौजूदा तनाव की जड़ें 16 जून 2026 को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुई एक घटना से जुड़ी हैं। वहां श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा से लौट रहे कुछ निहंग तीर्थयात्रियों और स्थानीय निवासियों के बीच वाहन पार्किंग को लेकर विवाद हो गया था, जिसने बाद में हिंसक झड़प का रूप ले लिया. इस झड़प में दोनों पक्षों के लोग घायल हुए थे, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार निहंग सिखों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था.
सिख संगठनों का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई एकतरफा थी और गिरफ्तार किए गए युवाओं के साथ अमर्यादित व्यवहार किया गया. निहंग जत्थे की मुख्य मांग है कि उनके गिरफ्तार किए गए चार साथियों को तुरंत रिहा किया जाए और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हो, तभी वे अपना मार्च समाप्त करेंगे। इस बीच रुद्रप्रयाग के नागरासू गुरुद्वारे में भी तीन दिनों तक चला ऐसा ही एक गतिरोध हाल ही में सुलझाया गया था, लेकिन बॉर्डर पर अब भी सतर्कता बरती जा रही है.