Sangita Srivastava: इलाहाबाद विश्वविद्यालय के 139 साल के इतिहास में पहली बार किसी कुलपति को मिला दूसरा कार्यकाल; जानिए कौन हैं प्रो. संगीता श्रीवास्तव

'पूरब का ऑक्सफोर्ड' कहे जाने वाले इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के 139 साल के गौरवशाली इतिहास में पहली बार किसी कुलपति को दूसरा पूर्ण कार्यकाल मिला है. विश्वविद्यालय की विजिटर और भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव को अगले पांच वर्षों के लिए दोबारा कुलपति नियुक्त करने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया है. उनका यह दूसरा कार्यकाल 16 सितंबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा और वह 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक इस पद पर रहेंगी.

प्रयागराज: इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है. The Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव को लगातार दूसरे पांच वर्षीय कार्यकाल के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय का कुलपति (Vice-Chancellor) नियुक्त किया है.

विश्वविद्यालय के 1887 में स्थापना के बाद से बीते 139 वर्षों में यह पहला अवसर है जब किसी नियमित कुलपति को लगातार दूसरा पूर्ण कार्यकाल सौंपा गया है.

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद शिक्षा मंत्रालय ने जारी किया आदेश

Dainik Bhaskar की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय की कुलाध्यक्ष (विजिटर) महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रो. संगीता श्रीवास्तव के नाम पर अपनी औपचारिक मुहर लगाई:

कौन हैं प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव?

प्रो. संगीता श्रीवास्तव का शैक्षणिक और प्रशासनिक सफर बेहद समृद्ध और उपलब्धियों भरा रहा है:

पहले कार्यकाल की उपलब्धियां और NAAC A+ ग्रेड

The Pioneer की रिपोर्ट के अनुसार, प्रो. श्रीवास्तव का पहला कार्यकाल बड़े नीतिगत और ढांचागत सुधारों के लिए जाना गया:

जन्मदिन और स्थापना दिवस का अनूठा संयोग

इस ऐतिहासिक पुनर्नियुक्ति के साथ दो सुखद संयोग भी जुड़े रहे:

अपनी पुनर्नियुक्ति पर प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि स्थापना दिवस पर मिला यह उपहार विश्वविद्यालय को ज्ञान के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता का केंद्र (Centre of Excellence) बनाने के उनके संकल्प को और मजबूत करेगा.

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