देश

पांच प्रवेश परीक्षाएं, पांच मंत्रालयों का बजट और राहुल गांधी के ‘कोटा फैक्ट्री’ दावे की पड़ताल

राहुल गांधी का दावा है कि देश की शीर्ष पांच प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी पर होने वाला कुल खर्च भारत के शिक्षा बजट से तीन गुना अधिक है.

पांच प्रवेश परीक्षाएं, पांच मंत्रालयों का बजट और राहुल गांधी के ‘कोटा फैक्ट्री’ दावे की पड़ताल
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

राहुल गांधी का दावा है कि देश की शीर्ष पांच प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी पर होने वाला कुल खर्च भारत के शिक्षा बजट से तीन गुना अधिक है. उन्होंने इसकी तुलना केंद्र सरकार के पांच मंत्रालयों के संयुक्त बजट से भी की.इन दिनों सोशल मीडिया पर विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का एक दावा चर्चा का विषय बन गया है. उनका यह वीडियो 17 जून को राजस्थान के कोटा में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का है. राहुल गांधी के अनुसार मेडिकल प्रवेश भर्ती परीक्षा नीट की तैयारी करने वाले 22 लाख छात्रों के परिवार हर साल कोचिंग, परीक्षा शुल्क और अन्य खर्चों पर लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये का निजी खर्च करते हैं. यह राशि केंद्र सरकार के शिक्षा बजट के लगभग बराबर है.

राजस्थान में कोटा के मंच से अपने तर्क को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी ने एसएससी, यूपीएससी, आरआरबी, जेईई और नीट जैसी पांच प्रमुख परीक्षाओं का उदाहरण दिया और दावा किया कि इन परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र व उनके परिवार हर साल लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं. इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद अधिकांश युवाओं को नौकरी या करियर की गारंटी नहीं मिलती, जिससे उनमें निराशा और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है.

मई 2026 में आयोजित नीट-यूजी परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया. मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई. प्रश्नपत्र लीक करने वाले नेटवर्क के संचालन के आरोप सामने आए. जांच में कई राज्यों से आरोपियों की गिरफ्तारी हुई. यह परीक्षा फिर से 21 जून को आयोजित की गई.

राहुल गांधी ने मंच से कहा, "यह अपराध है. हर साल 22 लाख अभ्यर्थी नीट की परीक्षा में बैठते हैं. उनके परिवार से 1.32 लाख करोड़ रुपये हर साल लिए जाते हैं. ये 22 लाख परिवारों की जेब से खींचा जाता है. भाईयो और बहनो, जितना पैसा 22 लाख लोग देते हैं, उतना ही पैसा हिंदुस्तान की सरकार अपने पूरे के पूरे एजुकेशन बजट में डालती है. सोचिए इसके बारे में."

राहुल गांधी ने लगभग 45 मिनट तक स्टेज से छात्रों से बात की. इस दौरान कुछ छात्रों को भी मंच पर बुलाया गया जो अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. उनसे बात करने के बाद राहुल गांधी कुछ आंकड़े सामने रखते हैं. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की मौजूदा व्यवस्था में सफलता की संभावना बेहद कम है. वह उदाहरण के साथ समझाते हैं कि यदि हर फील्ड में 3,000 छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, तो उनमें से केवल लगभग 30 छात्र ही आईआईटी तक पहुंच पाते हैं, करीब 180 छात्र डॉक्टर बनते हैं और मात्र एक छात्र आईएएस अधिकारी बनने में सफल होता है. इसी आधार पर उन्होंने वर्तमान व्यवस्था को 'रिजेक्शन सिस्टम' बताया.

पांच मंत्रालयों के बजट के बराबर खर्च करते हैं परिवार

नेता विपक्ष का आरोप है कि भर्ती परीक्षा के पैसे का इस्तेमाल सरकार शिक्षा बजट की आपूर्ति के लिए करती है. वह बताते हैं कि हर साल 22 लाख छात्र नीट का एग्जाम देते हैं. कोचिंग, हॉस्टल, खाना, किताबों और परीक्षा शुक्ल पर खर्च मिला दिया जाए तो 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं. यानी प्रति अभ्यर्थी औसत खर्च लगभग 6 लाख रुपये है. बता दें इस प्रस्तुति को तैयार करने के लिए टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, केंद्रीय बजट 2026-27, एसएससी, एनटीए, विभिन्न कोचिंग संस्थानों की फीस संबंधी जानकारी तथा मीडिया रिपोर्टों का स्रोत के रूप में उपयोग किया गया है.

इसके बाद उन्होंने एक और आंकड़ा पेश किया. इसके मुताबिक 2 करोड़ छात्र एसएससी, 5 लाख छात्र यूपीएससी, 3.58 करोड़ छात्र आरआरबी, 15 लाख छात्र जेईई और 22 लाख छात्र नीट की परीक्षाओं में बैठते हैं. इनकी तैयारी करने वाले 'जेन-जी' छात्रों के परिवार कोचिंग, परीक्षा शुल्क और अन्य संबंधित खर्चों पर कुल मिलाकर लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं. इन परीक्षाओं में 6 करोड़ के आसपास अभ्यर्थी बैठते हैं.

राहुल गांधी आगे कहते हैं, "ये 3.5 लाख करोड़ रुपये जो आपकी जेब, परिवारों, लोन, दर्द और दुख से निकलता है, उतना पैसा हिंदुस्तान की सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, लेबर, साइंस, और महिला एवं बाल विकास विभाग के बजट में डालती है. यानी इन पांच मंत्रालयों का पैसा आपकी जेब से निकाला जाता है."

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026–27 के लिए शिक्षा पर लगभग 1.39 लाख करोड़ रुपये, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय पर 0.33 लाख करोड़ रुपये, स्वास्थ्य पर 1.05 लाख करोड़ रुपये, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग पर 0.28 लाख करोड़ रुपये तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय पर भी लगभग 0.28 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. इस प्रकार, इन पांच मंत्रालयों का कुल बजट मिलाकर लगभग 3.33 लाख करोड़ रुपये बैठता है. यह राहुल गांधी के दावे के लगभग सामान ही है.

परीक्षा में खर्च का दावा और असल खर्च

डीडब्ल्यू की टीम ने दिल्ली, प्रयागराज और कोटा में इन पांच परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रति छात्र एक साल में होने वाले खर्च का आकलन किया और उसकी तुलना राहुल गांधी द्वारा किए गए दावों से की.

मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (खर्च: रुपये में)

तैयारी करने का स्थान: कोटा (राजस्थान)

कोचिंग: 1.5-2 लाख

हॉस्टल: 1.2-1.44 लाख

खाना: 50-70 हजार

किताबें और अन्य खर्च: 15-20 हजार

परीक्षा शुल्क: 1700

कुल औसत खर्च: 3.86 लाख रुपये

_

तैयारी करने का स्थान: दिल्ली

कोचिंग: 1.85-2 लाख

हॉस्टल: 1-1.80 लाख

खाना: 50-80 हजार

किताबें और अन्य खर्च: 40-50 हजार

परीक्षा शुल्क: 1700

कुल औसत खर्च: 4.4 लाख रुपये

राहुल गांधी का दावा: 6 लाख रुपये

इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई

तैयारी करने का स्थान: दिल्ली

कोचिंग: 1.5-1.65 लाख

हॉस्टल: 1-1.80 लाख

खाना: 50-80 हजार

किताबें और अन्य खर्च: 30-40 हजार

परीक्षा शुल्क: 1000

कुल औसतन: 4 लाख रुपये

_

तैयारी करने का स्थान: कोटा

कोचिंग: 90,000-1.8 लाख

हॉस्टल: 50,000-1.2 लाख

खाना: 40-50 हजार

किताबें और अन्य खर्च: 20-30 हजार

परीक्षा शुल्क: 1000

कुल औसतन: 3 लाख रुपये

राहुल गांधी का आंकड़ा: 8.67 लाख रुपये

सिविल सेवा परीक्षा यूपीएससी

जगह: दिल्ली

कोचिंग: 1.85-2 लाख

हॉस्टल: 1-1.80 लाख

खाना: 1-1.80 लाख

किताबें और अन्य खर्च: 50-80 हजार

परीक्षा शुल्क: 100

कुल औसतन: 5.38 लाख रुपये

_

तैयारी करने का स्थान: प्रयागराज

कोचिंग: 1-1.5 लाख

हॉस्टल: 40-60 हजार

खाना: 40-50 हजार

किताबें और अन्य खर्च: 15-20 हजार

परीक्षा शुल्क: 100

कुल औसतन: 2.38 लाख रुपये

राहुल गांधी का आंकड़ा: 5 लाख रुपये

कर्मचारी चयन आयोग द्वारा केंद्र सरकार की विभिन्न नौकरियों के लिए एसएससी परीक्षा

तैयारी करने का स्थान: दिल्ली

कोचिंग: 15,000-40,000

हॉस्टल, खाना, किताबें और अन्य: एक से डेढ़ लाख

परीक्षा शुल्क: 100

कुल औसतन:1.53 लाख रुपये

_

तैयारी करने का स्थान: प्रयागराज

कोचिंग: 15,000-30,000

हॉस्टल, खाना, किताबें और अन्य: एक से डेढ़ लाख

परीक्षा शुल्क: 100

कुल औसतन:1.48 लाख रुपये

राहुल गांधी का आंकड़ा: 10 हजार रुपये

रेलवे भर्ती बोर्ड आरआरबी परीक्षा

तैयारी करने का स्थान: दिल्ली

कोचिंग: 10,000-25,000

हॉस्टल, खाना, किताबें और अन्य: 1-1.5 लाख

परीक्षा शुल्क: 500

कुल औसतन: 1.43 लाख रुपये

_

तैयारी करने का स्थान: प्रयागराज

तैयारी करने का स्थान: 8,000-20,000

हॉस्टल, खाना, किताबें और अन्य: 85,000-1.70 लाख

परीक्षा शुल्क: 500

कुल औसतन: 1.45 लाख रुपये

राहुल गांधी का आंकड़ा: 10 हजार

अनुमान या शोध से निकला डाटा?

ऊपर दिए आंकड़ों में घर या कमरे का महंगा किराया, स्टूडेंट लाइफ से जुड़े कुछ विशेष खर्च, नियमित परिवहन और यात्रा व्यय जैसे खर्चों का स्पष्ट जिक्र नहीं है. राहुल गांधी द्वारा बताए गए आंकड़ों में वास्तविकता से कुछ अंतर दिखाई देता है. कुछ जगह ये ज्यादा लगते हैं और कुछ जगह कम. इसे समझने के लिए हमने उनके संचार प्रमुख से बात की.

डीडब्ल्यू हिंदी ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कार्यालय से इस बाबत संपर्क किया. उनके अनुसार यह डाटा पार्टी के आंतरिक सर्वे, कोचिंग इंस्टिट्यूट और इन परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों के सैंपल पर आधारित है. इस डाटा के पीछे कई अलग-अलग कारकों को ध्यान में रखा गया है.

पार्टी सूत्र ने कहा, "कोटा, हैदराबाद या दिल्ली में तैयारी के लिए कोचिंग और अन्य खर्च मिलाकर औसतन 4 से 4.5 लाख रुपये तक का खर्च आता है लेकिन कुछ परिवार इससे कहीं ज्यादा खर्च करते हैं. हमने कई छात्रों, परिवारों और कोचिंग संस्थानों से बात की. कीमतों की तुलना की. नीट परीक्षा में बैठने वाले लगभग 22 लाख छात्रों में से करीब 3 लाख छात्र एलीट संस्थानों और महंगे कोचिंग विकल्पों का चयन करते हैं, जिनका खर्च 10 लाख रुपये या उससे अधिक होता है. कई जेईई और नीट की तैयारी में कई छात्र कम से कम डेढ़ साल की कोचिंग लेते हैं.”

वह आगे कहते हैं, "कई परीक्षाओं जैसे एसएससी और आरआरबी में उम्र सीमा अधिक होती है. अभ्यर्थी यूपीएससी या किसी अन्य परीक्षा के साथ इसकी तैयारी करते हैं. कुछ घर बैठकर भी इसके लिए पढ़ते हैं. इसी वजह से औसत खर्च कम है."

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 23, 2026 03:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).