Teesta River Elephant Rescue: तीस्ता के तेज बहाव में बहे 4 दिन के नन्हे हाथी को मछुआरों ने बचाया; नाव पर लादकर मां से कराया भावनात्मक मिलन

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में मानवता और साहस की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है. मालबाजार उपखंड के निकट तीस्ता नदी पार करते समय हाथियों के झुंड से बिछड़कर तेज बहाव में करीब 3 से 4 किलोमीटर दूर बहे तीन से चार दिन के नन्हे हाथी के बच्चे को स्थानीय मछुआरों ने जान जोखिम में डालकर सुरक्षित बचा लिया. मछुआरों ने नदी में नाव दौड़ाकर डूब रहे नन्हे शावक को बाहर निकाला और किनारे लाकर वन विभाग को सूचित किया.

Fishermen rescue newborn elephant calf (Photo Credits: X/@MuditKVerma)

जलपाईगुड़ी (पश्चिम बंगाल): पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में उफनती तीस्ता नदी के तेज बहाव के बीच स्थानीय मछुआरों ने अपनी सतर्कता और सूझबूझ से एक नवजात हाथी के शावक को डूबने से बचा लिया. रिपोर्ट के अनुसार, महज 3 से 4 दिन का यह नन्हा हाथी नदी की विनाशकारी जलधारा में बहते हुए अपने झुंड से लगभग तीन से चार किलोमीटर दूर निकल गया था.

नदी में मछली पकड़ रहे स्थानीय मछुआरों ने जैसे ही शावक की केवल सूंड पानी से बाहर संघर्ष करते देखी, उन्होंने अपनी नाव तेज धार की ओर मोड़ दी और अथक प्रयासों के बाद शावक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया.

नदी पार करते समय बहा शावक, 3 किमी तक नाव दौड़ाकर बचाया

रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना गाजोलडोबा तीस्ता बैराज के अपस्ट्रीम में स्पर नंबर 12 (पंजाब तटबंध के पास) घटी:

मछुआरे हाथी के नवजात बच्चे का पता लगाकर उसे बचाते हैं

वन विभाग की सतर्कता: जांच के बाद मां से कराया मिलन

किनारे पहुंचते ही मछुआरों ने काठमबारी रेंज और बैकुंठपुर वन प्रभाग को सूचना दी:

अधिकारियों और सोशल मीडिया पर मछुआरों की सराहना

बैकुंठपुर के संभागीय वन अधिकारी (DFO) मुदित कुमार वर्मा और वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी परवीन कसवां ने इस बचाव अभियान और भावनात्मक पुनर्मिलन के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए:

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