Ayodhya Ram Mandir Case: राम मंदिर दान चोरी मामले में 25 सितंबर तक दाखिल होगी पहली चार्जशीट; सुप्रीम कोर्ट में SIT ने कहा- CCTV में कैद हैं 105 घटनाएं

अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान राशि में कथित हेराफेरी और चोरी के बहुचर्चित मामले में विशेष जांच दल 25 सितंबर तक अपनी पहली चार्जशीट अदालत में दाखिल कर देगा. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को जानकारी दी कि मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है. पहली गिरफ्तारी के बाद कानूनन 90 दिनों की वैधानिक मियाद 25 सितंबर को पूरी हो रही है.

Ram Janmabhoomi Temple (Photo Credits: Wikimedia Commons)

नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर (Ayodhya Shri Ram Janmabhoomi Temple) में चढ़ावे और दान की रकम में गड़बड़ी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने कानूनी प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया है. LiveLaw की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में अगले दो दिनों के भीतर, यानी 25 सितंबर 2026 तक सक्षम अदालत में आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल कर दिया जाएगा.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ स्वतंत्र जांच और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय ऑडिट की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. यह भी पढ़ें: Ram Temple Trust CEO: रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ; जानिए कौन हैं 'ऑपरेशन सिंदूर' के नायक

25 सितंबर की समयसीमा क्यों है बेहद अहम?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत में स्पष्ट किया कि आरोप पत्र तय समयसीमा में पेश करना कानूनी रूप से अनिवार्य है:

सीसीटीवी फुटेज में कैद 105 घटनाएं: जेब और जूतों में छिपाई नकदी

Zee News की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में सौंपी गई विस्तृत स्थिति रिपोर्ट में दान चोरी की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है:

आठ आरोपी पहले से जेल में, लाखों की नकदी बरामद

इस मामले में प्राथमिक जांच के बाद 25 जून को राम जन्मभूमि थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है:

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की रिपोर्ट साझा करने की मांग

The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट की प्रति मांगी:

इससे पहले अगस्त में सौंपी गई शुरुआती प्रशासनिक रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट के आंतरिक प्रबंधन और निगरानी तंत्र में खामियां पाई गई थीं, जिसके बाद ट्रस्ट ने दान प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह हाई-टेक और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव किए हैं.

Share Now