दो वयस्क अपनी मर्जी से कर सकते हैं शादी, परिवार नहीं दे सकता दखल: दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला
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नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि दो वयस्कों को आपसी सहमति से शादी करने और शांतिपूर्वक साथ रहने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षित है. कोर्ट ने कहा कि परिवार का विरोध इस व्यक्तिगत स्वतंत्रता को खत्म नहीं कर सकता. जस्टिस संजीव नारूला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी बार-बार इस सिद्धांत को मान्यता देता आया है और पुलिस को ऐसे जोड़ों को किसी भी तरह के धमकी या दबाव से बचाने के निर्देश देता रहा है.

यह फैसला उस मामले में आया जिसमें एक युवा जोड़े ने 23 जुलाई 2025 को दिल्ली के एक आर्य समाज ट्रस्ट में हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह किया. शादी के बाद युवती के माता-पिता ने कथित तौर पर उस पर दबाव डालने की कोशिश की. युवती ने स्वेच्छा से घर छोड़ने और विवाह करने की पुष्टि पुलिस जांच में की थी, लेकिन उसके परिवार की शिकायत पर दर्ज “लापता” रिपोर्ट बाद में बंद कर दी गई.

पुलिस सुरक्षा के आदेश

कोर्ट ने युवती और उसके पति को सुरक्षा देने के लिए स्थानीय थाना प्रभारी (SHO) को आदेश दिया कि एक बीट अधिकारी को उनकी सुरक्षा के लिए नियुक्त किया जाए. कपल को आपातकालीन संपर्क नंबर दिए जाएं. कोर्ट ने कहा है कि किसी भी तरह की धमकी की सूचना तुरंत दर्ज कर कार्रवाई की जाए.

मुद्दे की सच्चाई पर टिप्पणी नहीं

जस्टिस नारूला ने साफ किया कि अदालत इस मामले में लगाए गए आरोपों की सच्चाई पर फैसला नहीं दे रही, बल्कि केवल कपल के जीवन, स्वतंत्रता और गरिमा के मौलिक अधिकार की रक्षा कर रही है.