EPFO 3.0: अब UPI और ATM से PF निकासी की तैयारी; ₹5 लाख तक ऑटो-सेटलमेंट और सेंट्रलाइज्ड सिस्टम से बदल जाएगा पीएफ का नियम

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन संगठित क्षेत्र के करोड़ों वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए अपने डिजिटल और प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए 'EPFO 3.0' सिस्टम लागू करने जा रहा है। इस तकनीकी अपग्रेड का मुख्य उद्देश्य पुराने आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर को क्लाउड-आधारित केंद्रीय प्रणाली से बदलना, कागजी कार्यवाही और नियोक्ता पर निर्भरता को कम करना तथा दावों के निपटान में लगने वाले समय को घटाना है.

नई दिल्ली: संगठित क्षेत्र के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि (PF) का प्रबंधन और निकासी अब पहले से कहीं अधिक तेज और आसान होने जा रही है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपनी कार्यप्रणाली और सूचना प्रौद्योगिकी ढांचे को पूरी तरह आधुनिक बनाते हुए 'EPFO 3.0' फ्रेमवर्क लागू कर रहा है.

इस महत्वाकांक्षी अपग्रेड का प्राथमिक उद्देश्य पुराने क्षेत्रीय सर्वरों की जगह एक केंद्रीकृत (Centralised) और क्लाउड-समर्थित डिजिटल व्यवस्था स्थापित करना है. इससे दावा निपटान में होने वाली प्रशासनिक देरी खत्म होगी और सदस्यों को हर छोटे-बड़े बदलाव के लिए कंपनी के एचआर या नियोक्ता पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. यह भी पढ़ें: EPFO Wage Ceiling: सरकार ने बढ़ाई PF की वेतन सीमा, ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई, जानें कब से होगी लागू

UPI और डिजिटल चैनल: आपात स्थिति में तुरंत फंड मिलने का रास्ता

पारंपरिक तौर पर पीएफ से अग्रिम निकासी की राशि एनईएफटी (NEFT) के जरिए बैंक खातों में भेजी जाती है, जिसमें क्लेम अप्रूव होने के बाद भी कई दिनों का समय लग जाता है:

ऑटो-सेटलमेंट की सीमा बढ़कर ₹5 लाख: महज 3 दिनों में निपटारा

दावों के भारी बैकलॉग और लंबी प्रतीक्षा सूची को समाप्त करने के लिए ईपीएफओ ने ऑटोमेटेड क्लेम सेटलमेंट की सीमा में बड़ा विस्तार किया है:

सेंट्रलाइज्ड आईटी सॉफ्टवेयर और यूनिवर्सल डैशबोर्ड

पुराने सिस्टम में सदस्यों का डेटा अलग-अलग क्षेत्रीय कार्यालयों (Regional Offices) में बंटा रहता था, जिससे नौकरी बदलने पर खातों के विलय (Merge) और ट्रैकिंग में भारी परेशानी होती थी:

KYC और फंड ट्रांसफर में नियोक्ता (कंपनी) पर निर्भरता होगी खत्म

पहले नियमित केवाईसी विवरण अपडेट करने या पुरानी कंपनी से नई कंपनी में पीएफ ट्रांसफर करने के लिए नियोक्ता के डिजिटल हस्ताक्षर और कागजी सत्यापन की अनिवार्य शर्त होती थी, जिससे हफ्तों की देरी होती थी:

निकासी के नियमों का सरलीकरण: तीन स्पष्ट श्रेणियां

निकासी से जुड़े दर्जनों जटिल और भ्रमित करने वाले पुराने प्रावधानों को समाप्त कर ईपीएफओ 3.0 में नियमों को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. अनिवार्य आवश्यकताएं (Essential Needs): जैसे चिकित्सा उपचार और पारिवारिक आपात स्थितियां.
  2. आवास आवश्यकताएं (Housing Needs): घर की खरीद, निर्माण या गृह ऋण का पुनर्भुगतान.
  3. विशेष परिस्थितियां (Special Circumstances): विवाह, बच्चों की उच्च शिक्षा और सेवानिवृत्ति से पूर्व विशेष जरूरतें.

इसके साथ ही सामान्य आंशिक निकासी के लिए 12 महीने की न्यूनतम सेवा अवधि जैसी स्पष्ट शर्तें तय की गई हैं, ताकि रिटायरमेंट फंड की सुरक्षा और तात्कालिक वित्तीय जरूरतों के बीच संतुलन बना रहे.

सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

ईपीएफओ 3.0 की आधुनिक सेवाओं का निर्बाध लाभ उठाने के लिए अंशधारकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि उनका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) सक्रिय हो, और उनका बैंक खाता व मोबाइल नंबर आधार से सही तरीके से जुड़े (लिंक) हों. प्रणाली का मुख्य स्वचालित ढांचा पहले ही सक्रिय हो चुका है, जबकि यूपीआई और अन्य उन्नत भुगतान विकल्प आगामी चरणों में पूरी तरह उपलब्ध कराए जाएंगे.

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