Eid Milad-Un-Nabi, Onam 2026: ओणम और ईद मिलाद-उन-नबी पर पीएम मोदी का देशवासियों को संदेश, खुशी, एकता और समृद्धि की कामना
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, ओणम राजा महाबली की अपने प्रजाजनों से वार्षिक मुलाकात की याद में मनाया जाता है. राजा महाबली को न्यायप्रिय, उदार और लोकप्रिय शासक माना जाता था, जिनके शासनकाल को शांति और समृद्धि का युग कहा जाता है.
Eid Milad-Un-Nabi, Onam 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को ओणम और ईद मिलाद-उन-नबी के पावन अवसर पर देश और दुनिया के लोगों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने सभी के जीवन में खुशी, एकता, भाईचारा और समृद्धि की कामना करते हुए इन पर्वों के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया. Eid Milad Un Nabi 2026: ईद-उल-मिलाद को लेकर दिल्ली, मुंबई समेत देशभर में निकाले जा रहे जुलूस, मोहम्मद साहब की याद में मांगी जा रही अमन और शांति की दुआएं
ओणम पर क्या बोले प्रधानमंत्री मोदी?
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि, "सभी को ओणम की हार्दिक शुभकामनाएं. यह एक जीवंत और उत्साह से मनाया जाने वाला त्योहार है, जिसे दुनिया भर में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. यह पर्व सभी के जीवन में खुशियां, एकता और समृद्धि लेकर आए." उन्होंने कहा कि ओणम लोगों को एक साथ जोड़ने वाला पर्व है और इसकी सांस्कृतिक विरासत पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखती है.
पीएम मोदी ने ओणम और ईद की बधाई दी:
ईद मिलाद-उन-नबी पर भी दी शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री ने ईद मिलाद-उन-नबी के अवसर पर भी देशवासियों को बधाई देते हुए कहा, "ईद मुबारक. मिलाद-उन-नबी की सभी को शुभकामनाएं. मैं आशा करता हूं कि यह अवसर हमारे समाज में खुशियां और आपसी भाईचारा बढ़ाए. दया, करुणा और समाज की सेवा की भावना हमेशा हमारा मार्गदर्शन करती रहे."
क्या है ओणम का महत्व?
ओणम केरल का सबसे बड़ा और प्रमुख फसल उत्सव माना जाता है. यह पर्व मलयालम कैलेंडर के चिंगम महीने में लगातार 10 दिनों तक मनाया जाता है और आमतौर पर अगस्त या सितंबर में पड़ता है. यह त्योहार अच्छी फसल, समृद्धि, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष थिरुवोणम, जो ओणम का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, बुधवार को मनाया जा रहा है.
राजा महाबली से जुड़ी है ओणम की मान्यता
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, ओणम राजा महाबली की अपने प्रजाजनों से वार्षिक मुलाकात की याद में मनाया जाता है. राजा महाबली को न्यायप्रिय, उदार और लोकप्रिय शासक माना जाता था, जिनके शासनकाल को शांति और समृद्धि का युग कहा जाता है.
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर राजा महाबली से तीन पग भूमि मांगी. दो कदम में उन्होंने पृथ्वी और स्वर्ग नाप लिया. तीसरे कदम के लिए जब स्थान नहीं बचा तो महाबली ने अपना सिर अर्पित कर दिया. उनकी भक्ति और दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने का वरदान दिया. इसी प्रतीकात्मक वापसी की याद में ओणम मनाया जाता है.
क्या है ईद मिलाद-उन-नबी?
ईद मिलाद-उन-नबी, जिसे ईद-ए-मिलाद या मावलिद भी कहा जाता है, इस्लाम के अंतिम पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है. यह इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-उल-अव्वल की 12वीं तारीख को मनाया जाता है. भारत में इस वर्ष यह पर्व 26 अगस्त को मनाया जा रहा है, जबकि उत्सव की शुरुआत 25 अगस्त से ही हो गई थी.
कैसे शुरू हुई मिलाद-उन-नबी मनाने की परंपरा?
इतिहास के अनुसार, इस्लाम के शुरुआती दौर में इस दिन पैगंबर मोहम्मद की प्रशंसा में कविताएं और धार्मिक सभाएं आयोजित की जाती थीं. बाद में मिस्र के फातिमी खिलाफत के समय इस पर्व को व्यापक पहचान मिली. समय के साथ यह परंपरा पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के कई देशों में फैल गई. आज भारत के अलावा श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्रिटेन, रूस और जर्मनी समेत कई देशों में भी ईद मिलाद-उन-नबी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है.