EC on Form 6: नए मतदाता पंजीकरण को लेकर राहत, विवाद के बाद चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 के साथ Annexure-D की अनिवार्यता हटाई
विवरण भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता पंजीकरण फॉर्म 6 के साथ Annexure-D जमा करने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। यह फैसला विभिन्न पक्षों से मिली आपत्तियों और विवादों के बाद लिया गया है, जिससे मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया सरल होगी।
EC on Form 6: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है. आयोग ने घोषणा की है कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपयोग किए जाने वाले फॉर्म 6 के साथ अब अतिरिक्त घोषणा पत्र यानी 'Annexure-D' जमा करना अनिवार्य नहीं होगा. यह राहत उन राज्यों और क्षेत्रों में लागू होगी जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है.
राजनीतिक दलों, नागरिक अधिकार समूहों और आयोग के भीतर से ही उठ रही आपत्तियों के बाद यह निर्णय लिया गया है. यह भी पढ़े: Maharashtra SIR Notice: चुनाव आयोग की SIR नोटिस पर बड़ा फैसला, अब दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं; जरूरी दस्तावेजों के लिए BLO खुद घर आएंगे
क्या था विवाद और क्यों उठी थीं आपत्तियां?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत फॉर्म 6 के साथ Annexure-D को जोड़ना अनिवार्य किया गया था. इसके तहत नए आवेदकों से उनके या उनके माता-पिता/दादा-दादी के वर्ष 2000 या उससे पहले के वोटर लिस्ट डेटा, पुराने पोलिंग बूथ नंबर और सीरियल नंबर से संबंधित जानकारी मांगी जा रही थी.
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प्रक्रिया में जटिलता: कई पात्र युवाओं और आवेदकों के लिए दशकों पुरानी पारिवारिक चुनावी जानकारी जुटाना बेहद मुश्किल हो रहा था, जिससे पंजीकरण प्रक्रिया जटिल हो गई थी.
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कानूनी व प्रक्रियात्मक सवाल: निर्वाचन आयोग के भीतर भी चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) ने नियम 1960 में संशोधन किए बिना ऑनलाइन पोर्टल पर इस तरह का वैधानिक बदलाव जोड़ने पर सवाल उठाए थे.
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विपक्ष और नागरिक समूहों का विरोध: विभिन्न राजनीतिक दलों का तर्क था कि यह शर्त पहली बार के मतदाताओं को वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने से रोक रही है.
निर्णय के बाद क्या बदलेगा?
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मूल फॉर्म 6 के कानूनी ढांचे में कभी कोई संशोधन नहीं किया गया था; Annexure-D केवल SIR अवधि के दौरान लिया जाने वाला एक अतिरिक्त दस्तावेज था.
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आसान ऑनलाइन आवेदन: अब ईसीआई (ECINET) पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन भरते समय युवाओं को पुराने पारिवारिक मैपिंग डेटा भरने के लिए बाध्य नहीं होना पड़ेगा.
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बुनियादी दस्तावेज ही पर्याप्त: नए आवेदकों को केवल अपनी व्यक्तिगत जानकारी, आयु का प्रमाण और वर्तमान निवास स्थान का सत्यापन जमा करना होगा.
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समय की बचत: अतिरिक्त सत्यापन पत्र हटने से आवेदन निष्पादन का समय कम होगा और प्रक्रिया यूजर-फ्रेंडली बनेगी.
लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मिलेगी मजबूती
आयोग के अनुसार, जहां SIR की प्रक्रिया अभी जारी है, वहां यह नियम लागू रहेगा, लेकिन अन्य सभी क्षेत्रों में पुराना और सरल फॉर्म 6 सिस्टम ही काम करेगा.
इस फैसले से देश के लाखों युवाओं को मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने में आसानी होगी. निर्वाचन आयोग का यह कदम मतदाता सूची को अधिक समावेशी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है.