Anti-Paper Leak Amendment Bill 2026: लोकसभा में 'एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक' पर चर्चा; सरकार 10 घंटे की बहस के लिए तैयार, किरण रिजिजू ने दी जानकारी

लोकसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा शुरू हो गई है. संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सदन में स्पष्ट किया कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण कानून पर सरकार 8 से 10 घंटे तक विस्तृत चर्चा कराने के लिए पूरी तरह तैयार है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Photo)

नई दिल्ली: लोकसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' (Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026) पर विस्तृत बहस का रास्ता साफ हो गया है. संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने मंगलवार (28 जुलाई) को सदन को सूचित किया कि सरकार विपक्ष और अन्य राजनीतिक दलों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए इस विधेयक पर 10 घंटे तक की चर्चा कराने के लिए तैयार है.

यह संशोधन विधेयक 2024 में पारित मूल कानून को और अधिक प्रभावी व सख्त बनाने के उद्देश्य से लाया गया है. यह भी पढ़ें: CJP Protest: दिल्ली पुलिस का दावा- FRS तकनीक से विरोध प्रदर्शन में पहचाने गए 2,873 आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग

चर्चा का समय बढ़ाने पर सर्वसम्मति

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सदन में बताया कि उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और एनसीपी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से बातचीत की है। पहले इस बिल पर 6 घंटे की चर्चा तय की गई थी.

किरण रिजिजू ने कहा, "मैंने सभी दलों के सचेतकों (Chief Whips) से बात की और सभी 6 घंटे की अवधि को बढ़ाकर 8 घंटे करने पर सहमत हुए हैं." उन्होंने आगे कहा कि यदि सदस्य और अधिक समय चाहते हैं, तो सरकार को चर्चा की अवधि को 10 घंटे तक बढ़ाने में भी कोई आपत्ति नहीं है.

युवाओं के भविष्य के लिए 'मील का पत्थर' कानून

इससे पहले, केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में विधेयक पर बहस की शुरुआत की. उन्होंने इस विधेयक को देश के युवाओं के भविष्य और कल्याण को सुरक्षित करने वाला एक "मील का पत्थर" बताया.

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2024 का मूल अधिनियम स्वतंत्र भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं में शुचिता लाने वाला पहला समर्पित कानून था. 2026 के इस नए संशोधन विधेयक के जरिए परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा है, ताकि मेहनत करने वाले योग्य छात्रों के प्रयासों का सही फल मिल सके. इस नए कानून में अपराधों को संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) बनाने के साथ-साथ त्वरित सुनवाई और कड़े दंड का प्रावधान शामिल किया गया है.

परीक्षा सुधारों का इतिहास और पृष्ठभूमि

बहस के दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार के पिछले प्रयासों का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि 1992 में पहली बार समान परीक्षा प्रणाली (Common Testing) की सिफारिश की गई थी और 2010 में UPA सरकार के दौरान इस पर एक समिति बनी थी.

सरकार ने 2017 में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का गठन किया. जनवरी 2024 में 'लोक परीक्षा कानून' लाया गया था, जिसे जून 2024 में लागू किया गया. अब 2024 के कानून के क्रियान्वयन से मिले अनुभवों के आधार पर 2026 का संशोधन विधेयक लाया गया है, ताकि मुकदमों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके और पेपर लीक जैसी धांधलियों पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके.

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