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Delhi’s Infrastructure Woes Rs 1100 Crore Squandered: दिल्ली के बुनियादी ढांचे पर आफत : बढ़ते संकट के बीच 1100 करोड़ रुपये बर्बाद

दिल्ली सरकार, जिसने पिछले तीन वर्षों में विज्ञापनों पर 1100 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है, क्योंकि शहर ढहते बुनियादी ढांचे से जूझ रहा है

Delhi’s Infrastructure Woes Rs 1100 Crore Squandered: दिल्ली के बुनियादी ढांचे पर आफत : बढ़ते संकट के बीच 1100 करोड़ रुपये बर्बाद
Photo Credits: ANI

नई दिल्ली, 24 जुलाई: दिल्ली सरकार, जिसने पिछले तीन वर्षों में विज्ञापनों पर 1100 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है, क्योंकि शहर ढहते बुनियादी ढांचे से जूझ रहा है दिल्ली सरकार की विषम प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने वाली सुप्रीम कोर्ट की नवीनतम टिप्पणियों ने धन के कुप्रबंधन पर प्रकाश डाला है और राष्ट्रीय राजधानी में सड़कों, कचरा निपटान और बुनियादी ढांचे के विकास की स्थिति पर चिंता जताई है. यह भी पढ़े: CM Kejriwal Interacts With MCD School Principals: केजरीवाल ने IIM अहमदाबाद में प्रशिक्षण लेने वाले 50 MCD स्कूल प्रिंसिपलों से मुलाकात की

साल दर साल भारी-भरकम बजट पेश करने के बावजूद दिल्ली के बुनियादी ढांचे की हालत चिंता का विषय बनी हुई है दिल्ली सरकार ने 2020-21 में 65,000 करोड़ रुपये, 2021-22 में 69,000 करोड़ रुपये और 2022-23 के लिए 75,800 करोड़ रुपये आवंटित किए हालांकि, इस बजट का एक हिस्सा विज्ञापनों पर बर्बाद किया गया, जो नवीनतम बजट का लगभग 1.41 फीसदी है.

हाल की मानसूनी बारिश ने समस्या को और बढ़ा दिया है, जिससे शहर एक तरह से जलभराव की भूलभुलैया में तब्दील हो गया है पानी भरी सड़कों से गुजरते समय यात्रियों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जो उचित जल निकासी और रखरखाव प्रणालियों की कमी को उजागर करता है.

मानसून के दौरान यमुना नदी के पास रहने वाले निवासियों को विशेष रूप से कड़ी मार पड़ी, कई लोगों को राहत शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा साथ ही शहर को कूड़े के संकट का भी सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि कूड़ा सड़कों पर बिखरा रहता है सार्वजनिक स्थानों पर फैला हुआ कूड़ा-कचरा न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करता है, बल्कि शहर के स्वच्छता मानकों पर भी खराब असर डालता है.

सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों ने वित्तीय कुप्रबंधन के मुद्दे को सामने ला दिया है सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस.के. कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने टिप्पणी की, "अगर पिछले तीन वर्षों में विज्ञापनों पर 1100 करोड़ रुपये खर्च किए जा सकते हैं, तो निश्चित रूप से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए योगदान दिया जा सकता है.

शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार को दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) परियोजना के लिए लगभग 415 करोड़ रुपये के भुगतान में तेजी लाने का निर्देश दिया, जो बुनियादी ढांचे की तत्काल जरूरतों को पूरा करने की तत्काल आवश्यकता का संकेत है शीर्ष अदालत ने दर्ज किया कि अतिदेय राशि का भुगतान दो महीने के भीतर किया जाएगा दिल्ली के नागरिक सड़कों, कचरा निपटान और समग्र बुनियादी ढांचे की स्थिति में स्पष्ट सुधार का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 24, 2023 10:01 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).