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Ajit Pawar On Meeran Borwankar Books: अजित पवार ने सरकारी भूमि सौदे पर पुणे की पूर्व पुलिस कमिश्नर मीरा बोरवंकर के आरोप को खारिज किया, दी ये सफाई

पिछले कुछ दिनों से आलोचनाओं का सामना कर रहे उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मंगलवार को कहा कि एक सरकारी साजिश के संबंध में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और पुणे की पूर्व पुलिस आयुक्त मीरां चड्ढा-बोरवंकर द्वारा यरवदा पुलिस स्टेशन (पुणे) की जमीन के सौदे बारेे में लगाए गए आरोप से उनका कोई लेना-देना नहीं है

Ajit Pawar On Meeran Borwankar Books: अजित पवार ने सरकारी भूमि सौदे पर पुणे की पूर्व  पुलिस कमिश्नर मीरा बोरवंकर के आरोप को खारिज किया, दी ये सफाई
Photo Credits: ANI

Ajit Pawar On Meeran Borwankar Books: पिछले कुछ दिनों से आलोचनाओं का सामना कर रहे उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मंगलवार को कहा कि एक सरकारी साजिश के संबंध में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और पुणे की पूर्व पुलिस आयुक्त मीरां चड्ढा-बोरवंकर द्वारा यरवदा पुलिस स्टेशन (पुणे) की जमीन के सौदे बारेे में लगाए गए आरोप से उनका कोई लेना-देना नहीं है. यह स्वीकार करते हुए कि संरक्षक मंत्री के रूप में उन्होंने पुणे की तत्कालीन सीपी मीरां चड्ढा-बोरवंकर से मुलाकात की थी, अजित पवार ने कहा कि वह यरवदा पुलिस स्टेशन परिसर के आसपास 3 एकड़ जमीन से संबंधित 'निर्णय लेने की प्रक्रिया' से किसी भी तरह से चिंतित नहीं थे.

अजित पवार ने ज़ोर देकर कहा, "मैं निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल नहीं था, मैंने इसका मूल्यांकन नहीं किया, न ही मैं इससे संबंधित किसी बैठक में शामिल हुआ... मेरा इससे कोई लेना-देना नहीं है. विपक्षी कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (सपा), शिवसेना (यूबीटी) और अन्य की मांग पर अजित पवार ने कहा कि जमीन अभी भी वहां है, इसलिए जांच होने में दिक्कत नहीं है. यह भी पढ़े: एनसीपी नेता अजित पवार को बैंक घोटाले मामले में बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने FIR दर्ज करने के आदेश पर दखल देने से किया इंकार

उन्‍होंने कहा, “जमीन कहीं चली तो नहीं गई? यह अभी भी है... इसलिए, जांच कराओ या जो चाहो करो... इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है. विभिन्न दलों की दलीलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि वह "कभी भी ऐसा कुछ नहीं करेंगे जो अवैध हो या सरकार को नुकसान पहुंचाए" और राजनेता पुणे की तरह सार्वजनिक भूमि के 'संरक्षक' हैं.

मीरां के इस दावे पर कि उन्होंने 2010 में उनके साथ मोटे तौर पर बात की थी, अजित ने कहा कि वह 32 वर्षों से अधिक समय तक मंत्री और डिप्टी सीएम रहे हैं, कई अधिकारियों के साथ बातचीत की है और उन्हें कभी भी इस तरह के आरोप का सामना नहीं करना पड़ा है.

उन्होंने कहा, "मैंने सभी प्रमुख विभागों को संभाला है, आप किसी भी विभाग के किसी भी अधिकारी से पूछ सकते हैं... हालांकि मेरा स्वभाव सख्त है, लेकिन मैं उनसे बहुत सौहार्दपूर्ण और सम्मानपूर्वक बात करता हूं.

वह मुस्कुराए और कहा, "सेवानिवृत्त आईपीएस ने अपनी किताब 'मैडम कमिश्‍नर : द एक्स्ट्राऑर्डिनरी लाइफ ऑफ एन इंडियन पुलिस चीफ' में कई अन्य मुद्दों पर भी लिखा है, लेकिन सबका ध्यान "केवल मुझ पर ही क्यों केंद्रित है?"

अजित पवार अपनी बात साबित करने के लिए अपने साथ यरवदा की जमीन से संबंधित पुराने सरकारी रिकॉर्ड भी लाए। बैठक में शामिल होने वाले लोगों के नाम, घटनाओं का क्रम बताया और कहा कि विभिन्न आपत्तियों के कारण सौदा आखिरकार रद्द कर दिया गया.

मीरां चड्ढा-बोरवंकर ने अपनी किताब में 2010 में पुणे के डिविजनल कमिश्‍नर के कार्यालय में दादा (अजित पवार) के साथ हुई 'मुठभेड़' का जिक्र किया है और यह भी बताया है कि कैसे तत्कालीन गृहमंत्री (दिवंगत) आर.आर. पाटिल ने बाद में उन्हें उस जमीन के सौदे से 'दूर रहने' की सलाह दी थी.

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने अजित पवार के दबावों का विरोध किया और पुणे पुलिस की 3 एकड़ जमीन को 'बचाया', जिसे मुंबई स्थित बिल्डर, डीबी रियल्टी के अध्यक्ष शाहिद उस्मान बलवा को सौंपा जाना था, जिन्हें बाद में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला के सिलसिले में रफ्तार किया गया था.

मीरां ने अजित पवार के साथ उस बैठक के बारे में विस्तार से बताया, जिनके पास यरवदा पुलिस स्टेशन के भूखंड क्षेत्र का एक बड़ा कागजी नक्शा था। उन्होंने उन्हें सूचित किया कि जमीन की नीलामी पूरी हो गई है और उन्हें शीर्ष बोली लगाने वाले को भूखंड सौंपने के लिए आगे बढ़ना चाहिए.

 

मीरां ने उन्हें बताया था कि यह पुलिस महकमे की जमीन है जो भविष्य में पुलिसकर्मियों के लिए कार्यालयों/आवासीय क्वार्टरों के विस्तार के लिए है। इसे बेचना पुलिस विभाग के हितों के विपरीत होगा।

अजित पवार ने उनकी बात को खारिज कर दिया था और उन्हें (जमीन सौंपने की) प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया और यहां तक कि नीलामी प्रक्रिया में खामियां भी गिनाईं और इस बात पर प्रतिवाद किया कि अगर जमीन पहले ही नीलाम हो चुकी थी तो उनके पूर्ववर्ती ने ऐसा क्यों नहीं किया.

इसके बाद अजित पवार ने कथित तौर पर अपना आपा खो दिया था और शीशे की मेज पर नक्शा फेंक दिया था। उन्‍होंने राजनीतिक हलकों में 'आबा' के नाम से सम्मानित आर.आर. पाटिल के बारे में कुछ अशोभनीय संदर्भ भी दिए, जिन्हें मीरां ने स्पष्ट नहीं किया है। उन्‍होंने लिखा है कि उस 'ठंडी मुठभेड़' के बाद मीरां चड्ढा-बोरवंकर ने मंत्री को सलाम किया और बिना कुछ बोले कार्यक्रम स्थल से चली गईं.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 17, 2023 10:33 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).