Cyclone Arnab Live Tracker: तट के बेहद करीब पहुंचा डीप डिप्रेशन; कलिंगपटनम के पास लैंडफॉल, ओडिशा-आंध्र में भारी बारिश और भूस्खलन का अलर्ट

बंगाल की खाड़ी में बना मौसमी तंत्र, जिसे विंडाई और विभिन्न ट्रैकिंग पोर्टल्स पर 'चक्रवात अर्नब 2026' के रूप में ट्रैक किया जा रहा है, उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा तट के बेहद करीब पहुंच चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, हालांकि यह तंत्र चक्रवाती तूफान बनने के बजाय 'डीप डिप्रेशन' के रूप में ही बरकरार है, लेकिन यह बुधवार, 23 सितंबर 2026 की देर रात विशाखापट्टनम और गोपालपुर के बीच स्थित कलिंगपटनम के पास तट पार (लैंडफॉल) करेगा.

A map of the Deep Depression shared by IMD (Photo Credits: X/@Indiametdept)

भुवनेश्वर/विशाखापट्टनम: बंगाल की खाड़ी के ऊपर सक्रिय गहरे दबाव (Deep Depression) की हलचल से पूर्वी भारत के तटीय इलाकों में मौसम गंभीर हो गया है. LatestLY की रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल मौसम ट्रैकर 'विंडाई' (Windy) पर लाइव ट्रैक किया जा रहा यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए बुधवार, 23 सितंबर 2026 की देर रात कलिंगपटनम (आंध्र प्रदेश) के पास तट को पार करेगा.

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पुष्टि की है कि यह वेदर सिस्टम पूर्ण चक्रवात की श्रेणी में पहुंचे बिना ही तट पार करेगा. इसके बावजूद इसके विशाल बादलों का दायरा (Cloud Bands) तट पर भीषण बारिश, तेज हवाओं और समुद्री अशांति की स्थिति पैदा कर रहा है. यह भी पढ़ें: Cyclone Arnab Landfall Update: आज रात कलिंगपटनम के पास तट पार करेगा डीप डिप्रेशन; ओडिशा और आंध्र में भारी तबाही की आशंका, तेलंगाना-छत्तीसगढ़ भी अलर्ट पर

वर्तमान स्थिति और लैंडफॉल का मार्ग

विशाखापट्टनम स्थित डॉपलर वेदर रडार इस सिस्टम की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए है:

Windy पर चक्रवात अर्नब का लाइव ट्रैकर मैप

मूसलाधार बारिश, बाढ़ और भूस्खलन का गंभीर खतरा

India TV की रिपोर्ट के अनुसार, सिस्टम के तटीय हिस्से से टकराने के चलते कई राज्यों में चेतावनी जारी की गई है:

ओडिशा में 5,000 से अधिक लोगों की निकासी, प्रशासन अलर्ट पर

तटीय इलाकों में जनहानि को रोकने के लिए आपदा प्रबंधन टीमों ने व्यापक स्तर पर राहत अभियान शुरू किया है:

प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे लैंडफॉल के दौरान घरों के भीतर रहें, बिजली के ढीले तारों व जलभराव वाले ढांचों से दूर रहें और कम से कम दो-तीन दिनों के लिए आवश्यक भोजन, पानी और पावर बैंक की व्यवस्था सुरक्षित रखें.

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