UP Voter List Row: यूपी में 16.18 लाख 'रहस्यमयी' वोटरों के जुड़ने के दावे खारिज; मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा बोले- पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमानुसार
उत्तर प्रदेश में विशेष गहन संशोधन के दौरान मतदाता सूची में 16.18 लाख 'रहस्यमयी' वोटरों के जोड़े जाने के आरोपों को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने पूरी तरह से निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए खारिज कर दिया है. चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के तहत अत्यंत पारदर्शी तरीके से पूरी की गई है.
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर छिड़े विवाद पर राज्य निर्वाचन तंत्र ने स्थिति स्पष्ट की है. उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने मतदाता सूची में 16.18 लाख वोटरों के कथित 'रहस्यमयी' तरीके से जोड़े जाने की मीडिया रिपोर्ट का खंडन करते हुए इसे गलत अनुमानों पर आधारित बताया है.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी विस्तृत स्पष्टीकरण में कहा गया है कि विशेष गहन संशोधन (SIR) की समूची प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, कानून सम्मत और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के दिशानिर्देशों के अनुरूप संपन्न कराई गई है.
मीडिया रिपोर्ट के दावे और सीईओ का खंडन
हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 16.18 लाख मतदाताओं को बिना सार्वजनिक ब्योरा दिए मतदाता सूची में शामिल किया गया था:
- तथ्यों से परे दावे: सीईओ नवदीप रिणवा ने कहा कि संबंधित रिपोर्ट में लगाए गए आरोप मनगढ़ंत धारणाओं और अनुचित तर्कों पर आधारित हैं.
- वेबसाइट पर प्रदर्शित की गई सूची: निर्वाचन कार्यालय ने स्पष्ट किया कि दावे और आपत्तियों (Claims and Objections) की अवधि के दौरान नए आवेदनों की पूरी सूची सीईओ की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक की गई थी, जिससे किसी भी व्यक्ति द्वारा इसकी समीक्षा की जा सके.
- राजनीतिक दलों की भागीदारी: उन्होंने रेखांकित किया कि इस पुनरीक्षण अभियान में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी रही है और अब तक किसी भी दल या व्यक्ति ने इस संबंध में ऐसी कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी.
क्या है फॉर्म 6 और पुनरीक्षण में इसका महत्व?
मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में फॉर्म 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण का प्राथमिक विधिक माध्यम होता है:
- पात्र नागरिकों का आवेदन: 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले या किसी क्षेत्र में स्थानांतरित होकर आए पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म 6 भरते हैं.
- लाखों आवेदन प्राप्त: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एसआईआर अवधि (6 जनवरी से 6 मार्च) के दौरान नाम जोड़ने के लिए 69 लाख से अधिक फॉर्म 6 आवेदन मिले थे, जबकि नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए 2.68 लाख फॉर्म 7 आवेदन प्राप्त हुए थे.
- स्वीकृति का कोई पूर्व-निर्धारित फॉर्मूला नहीं: सीईओ ने इस आरोप को भी खारिज किया कि फॉर्म 6 को किसी निश्चित प्रतिशत के आधार पर स्वीकार किया जा रहा था. उन्होंने कहा कि विधिक नियमों के तहत बीएलओ (BLO) द्वारा घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन के बाद ही पात्र आवेदनों को मंजूरी दी गई.
2027 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बढ़ी राजनीतिक संवेदनशीलता
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के चलते मतदाता सूची का यह संशोधन राजनीतिक दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है:
- सटीक रोल का लक्ष्य: चुनाव आयोग का कहना है कि इस सघन अभियान का उद्देश्य केवल पात्र मतदाताओं को जोड़ना और मृत, अनुपस्थित या डुप्लीकेट (दोहरे) मतदाताओं के नाम हटाकर त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करना है.
- विपक्षी दलों की नजर: इससे पहले विपक्षी दलों ने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम कटने और जोड़े जाने की प्रक्रियाओं पर चिंता जताई थी.
सीईओ कार्यालय ने पुनः दोहराया कि निर्वाचन प्रक्रिया की शुचिता और निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं किया गया है और सभी प्रक्रियाएं वैधानिक मानकों के तहत पूरी तरह खुली और जांच योग्य रही हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 07, 2026 12:39 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

