CBSE Digital Evaluation Issues 2026: सीबीएसई में 18 मई से शुरू होगी री-चेकिंग और री-वेरिफिकेशन प्रक्रिया, जानें कैसे करें आवेदन

सीबीएसई कक्षा 12वीं के नतीजों के बाद 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम पर उठे सवालों के बीच बोर्ड ने सफाई जारी की है. बोर्ड ने मूल्यांकन को पूरी तरह पारदर्शी बताते हुए 18 मई 2026 से स्क्रूटनी, फोटोकॉपी और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है.

CBSE Digital Evaluation Issues 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12वीं के परिणाम घोषित होने के बाद डिजिटल मूल्यांकन यानी 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम पर खड़े हो रहे विवादों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है. दरअसल, इस वर्ष फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और मैथमेटिक्स जैसे मुख्य विषयों में उम्मीद से बेहद कम अंक मिलने पर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे.

सोशल मीडिया पर कई छात्रों ने दावा किया था कि उन्होंने जेईई (JEE) जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाएं तो पास कर ली हैं, लेकिन सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में वे अनुत्तीर्ण हो गए हैं या उनके नंबर बहुत कम हैं. इस बहस के बीच बोर्ड ने अपने मूल्यांकन तंत्र का बचाव करते हुए छात्रों को री-चेकिंग का अवसर देने की बात कही है.

सीबीएसई ने किया 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' का बचाव

बोर्ड ने अपने आधिकारिक बयान में ओएसएम (OSM) प्रणाली का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि इसे मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और निरंतरता लाने के लिए पेश किया गया था.

सीबीएसई के अनुसार, "यह प्रणाली हर स्टेप के लिए अंक (Stepwise Marking) सुनिश्चित करती है, जो बोर्ड के मूल्यांकन ढांचे की एक प्रमुख विशेषता रही है. इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों और विषयों में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में एकरूपता और निष्पक्षता को बढ़ावा देना है."

बोर्ड ने आगे कहा कि जो छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, उन्हें हर साल की तरह इस बार भी पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) का पूरा मौका दिया जाएगा. छात्र अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी के लिए आवेदन कर सकते हैं और विसंगति पाए जाने पर सुधारात्मक कार्रवाई का अनुरोध कर सकते हैं.

7 साल में सबसे कम रहा 12वीं का पास प्रतिशत

इस वर्ष सीबीएसई कक्षा 12वीं का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत (Overall Pass Percentage) पिछले वर्ष की तुलना में 3.19% गिर गया है, जो पिछले सात वर्षों में सबसे कम रिकॉर्ड किया गया है. इस साल कुल 85.2% छात्र ही पास हो पाए हैं. बोर्ड के नियमों के मुताबिक, छात्रों को किसी भी विषय में पास होने के लिए थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों परीक्षाओं में अलग-अलग कम से कम 33% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है.

18 मई से शुरू होगी तीन चरणों वाली री-चेकिंग प्रक्रिया

सीबीएसई आगामी 18 मई 2026 से पुनर्मूल्यांकन और अंकों के सत्यापन के लिए ऑनलाइन आवेदन स्वीकार करना शुरू करेगा. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि छात्रों को री-चेकिंग के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा, जिसमें तीन मुख्य सेवाएं शामिल हैं:

  1. अंकों का सत्यापन (Verification of Marks): इसमें केवल अंकों को दोबारा जोड़ा जाता है और देखा जाता है कि कोई प्रश्न बिना जांचे तो नहीं छूट गया.

  2. उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी प्राप्त करना (Photocopy of Evaluated Answer Book): अंकों के सत्यापन के बाद ही छात्र अपनी जांची गई कॉपी की डिजिटल प्रति मांग सकते हैं.

  3. प्रश्नों का पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation of Answers): कॉपी मिलने के बाद छात्र किसी विशिष्ट प्रश्न के मूल्यांकन को चुनौती दे सकते हैं.

इन प्रत्येक सेवाओं के लिए छात्रों को बोर्ड द्वारा निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा.

सीबीएसई री-वेरिफिकेशन और पुनर्मूल्यांकन के लिए ऐसे करें आवेदन

जो छात्र अपने अंकों की दोबारा जांच करवाना चाहते हैं, वे इन चरणों का पालन कर आवेदन कर सकते हैं:

सीबीएसई ने कहा है कि समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद संशोधित अंक और परिणाम बोर्ड की वेबसाइट पर अपडेट कर दिए जाएंगे.

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