Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का कहर, 13 जिलों की करीब 34 लाख आबादी प्रभावित, राहत और बचाव कार्य जारी

राज्य की प्रमुख नदियों में जलस्तर के उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है. गंगा नदी पटना के गांधी घाट और भागलपुर के सुल्तानगंज में अपने रिकॉर्ड स्तर (HFL) को पार कर चुकी है. हालांकि, पिछले कुछ घंटों में कई स्थानों पर गंगा और कोशी नदियों का जलस्तर स्थिर होना शुरू हुआ है.

Bihar Flood: बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर और तटीय इलाकों में फैले पानी से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. आपदा प्रबंधन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 13 जिलों के 79 प्रखंडों की लगभग 34.31 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में है. पटना, भागलपुर, सारण और वैशाली सहित कई प्रमुख जिलों के निचले तथा दियारा क्षेत्रों में पानी घुसने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

प्रमुख नदियों के जलस्तर और खतरे के निशान का हाल

राज्य की प्रमुख नदियों में जलस्तर के उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है. गंगा नदी पटना के गांधी घाट और भागलपुर के सुल्तानगंज में अपने रिकॉर्ड स्तर (HFL) को पार कर चुकी है. हालांकि, पिछले कुछ घंटों में कई स्थानों पर गंगा और कोशी नदियों का जलस्तर स्थिर होना शुरू हुआ है.  यह भी पढ़े:    Bihar Flood Update: बिहार में बाढ़ से हाहाकार: पटना में गंगा ने तोड़ा रिकॉर्ड, 12 जिलों के 22 लाख से अधिक लोग प्रभावित

इसके बावजूद, गंडक, कोशी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा नदियां कई स्थानों पर अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. वाल्मीकि नगर बैराज और इंद्रपुरी बैराज से पानी के डिस्चार्ज में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद जताई जा रही है.

बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान

प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने के लिए राज्य प्रशासन मुस्तैदी से काम कर रहा है. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 10 और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की 27 टीमों को प्रभावित जिलों में तैनात किया गया है. जलमग्न क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकालने के लिए 1,800 से अधिक नौकाओं का संचालन किया जा रहा है.

आपदा पीड़ितों के लिए राज्य भर में 432 सामुदायिक रसोई (Community Kitchens) चालू की गई हैं, जहां रोजाना लाखों लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. इसके अलावा, 14 राहत शिविरों में हजारों विस्थापितों के ठहरने, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है.

प्रशासन की सतर्कता और निगरानी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं. जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन को तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं. मौसम विज्ञान केंद्र ने आने वाले दिनों में कुछ हिस्सों में बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है, जिसके चलते आपदा प्रबंधन विभाग को हाई अलर्ट पर रखा गया है.

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