बिहार में बर्ड फ्लू ने दी दस्तक, सुपौल में मुर्गे, बतख, कौवों की हो रही मौत; पक्षियों को मारने के लिए बनी टीम
बिहार के सुपौल जिले में एवियन इन्फ्लुएंजा (एच5एन1) का डर बढ़ गया है और प्रशासन ने गुरुवार को प्रभावित क्षेत्रों में स्थित पोल्ट्री फार्मो में मुर्गियों को मारने का निर्देश दिया है. जिला अधिकारियों ने लोगों से क्षेत्र में चिकन के सेवन से बचने की अपील की.
पटना: बिहार के सुपौल जिले में एवियन इन्फ्लुएंजा (एच5एन1) का डर बढ़ गया है और प्रशासन ने गुरुवार को प्रभावित क्षेत्रों में स्थित पोल्ट्री फार्मो में मुर्गियों को मारने का निर्देश दिया है. जिला अधिकारियों ने लोगों से क्षेत्र में चिकन के सेवन से बचने की अपील की. सुपौल के संभागीय वनाधिकारी सुनील कुमार शरण ने बताया कि सदर थाना क्षेत्र के चापकही गांव में 31 मार्च को कौवा, बत्तख, मुर्गियां समेत चार दर्जन से अधिक पक्षी रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाए गए.
चापकाही के ग्रामीणों ने देखा कि पक्षी बड़ी संख्या में मर रहे हैं. उन्होंने उस समय स्थानीय पशु चिकित्सकों से संपर्क किया और कुछ पक्षियों को दवाएं और इंजेक्शन दिए, लेकिन वे बीमारी से उबर नहीं पाए.
प्रारंभिक जांच के दौरान पशुपालन अधिकारियों ने पक्षियों में विक्षिप्त रोग के लक्षणों की ओर इशारा किया. हालांकि, उन्होंने नमूने एकत्र किए और मौत के सही कारण का पता लगाने के लिए उन्हें भोपाल की प्रयोगशाला में भेज दिया.
शरण ने कहा, "पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने पक्षियों के नमूने एकत्र कर उन्हें परीक्षण के लिए भोपाल की प्रयोगशाला में भेजा था. इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. क्षेत्र में एवियन इन्फ्लूएंजा की रोकथाम, नियंत्रण और रोकथाम के लिए एक कार्य योजना सक्रिय है."
उन्होंने कहा, "जिला मजिस्ट्रेट कौशल कुमार के निर्देश पर चापकाही गांव के एक किमी के दायरे में स्थित पोल्ट्री फार्मो में मुर्गियों को मिट्टी में दफनाने के लिए विशेषज्ञ पशुपालन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों सहित 4 त्वरित प्रतिक्रिया टीमों का गठन किया गया है. चापकही गांव से एक किमी के दायरे में क्षेत्र को संक्रमित क्षेत्र घोषित किया गया है. प्रत्येक टीम एसडीओ रैंक के अधिकारी की निगरानी में काम कर रही है. इसके अलावा, टीमें 9 के दायरे में स्थित पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों के नमूने भी ले रही हैं. चापकाही गांव से लेकर 9 किमी क्षेत्रों को निगरानी क्षेत्र घोषित किया गया है."
जिला प्रशासन के निर्देशानुसार मुर्गियों और बत्तखों को दफनाने के लिए स्थानों की पहचान कर ली गई है. भूजल संदूषण से बचने के लिए स्थान निचले इलाकों से दूर और जल निकायों से दूर हैं.
रैपिड रिस्पांस टीम जूट के थैलों में डालने और दफनाने से पहले कैल्शियम कार्बोनेट पाउडर का छिड़काव करेगी. जिला प्रशासन ने हत्या करने वाले हर मजदूर को पीपीई किट मुहैया कराई है. उन्हें संख्या गिनने और टीम को रिपोर्ट करने के लिए भी सौंपा जाएगा और जिला सिविल सर्जन जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय को रिपोर्ट करेंगे.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 15, 2022 10:00 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

