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21 अगस्त की बड़ी खबरें

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21 अगस्त की बड़ी खबरें
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

स्वागत है DW हिंदी के लाइव ब्लॉग में. यहां आपको दिनभर की तमाम जरूरी और बड़ी खबरें एक साथ मिलेंगी. हम इस पेज को लगातार अपडेट कर रहे हैं.जर्मनी के गैस भंडार ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचे

हैदराबाद में कार की टक्कर से युवती की मौत, सांसद के बेटे पर आरोप

न्यायिक सेवा में जाने के लिए अब तीन की बजाय एक साल की प्रैक्टिस होगी जरूरी

छह यूरोपीय देशों ने इस्राएल की नई बस्ती बनाने की योजना का विरोध किया

अलास्का में क्रैश हुआ चार्टर विमान, आठ लोगों की जान गई

भारत में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर, सरकार ने दी ड्यूटी-फ्री आयात की मंजूरी

जर्मनी में हर चार में से एक कंपनी के सामने कुशल कर्मचारियों की कमी

जर्मनी में लगभग हर चार में से एक कंपनी कुशल कर्मचारियों की कमी का सामना कर रही है. म्यूनिख स्थित इफो इंस्टीट्यूट ने शुक्रवार को आंकड़े जारी किए. इफो ने जुलाई में जर्मनी की 23.2 प्रतिशत कंपनियों में कुशल कर्मचारियों की कमी की जानकारी दी. सर्वे के मुताबिक, लंबे समय का औसत अभी भी काफी अधिक है और 31.7 प्रतिशत जर्मन कंपनियां कुशल श्रमिकों की कमी की रिपोर्ट करती रही हैं.

इफो की शोधकर्ता दारिया शॉलर ने कहा कि फिलहाल जर्मनी की कमजोर अर्थव्यवस्था कुशल कर्मचारियों की मांग को सीमित कर रही है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि जैसे-जैसे जर्मन अर्थव्यवस्था में सुधार होगा, कुशल कर्मचारियों की कमी एक बार फिर काफी बढ़ सकती है. टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर में कुशल कर्मचारियों की मांग में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई.

जुलाई में इस क्षेत्र की 31.1 प्रतिशत कंपनियों ने कुशल कर्मचारियों की कमी की बात कही, जबकि अप्रैल में यह आंकड़ा 16.3 प्रतिशत था. वहीं, कंसल्टेंसी और ऑडिटिंग सेक्टर में करीब 65 प्रतिशत कंपनियां कुशल कर्मचारियों की कमी से जूझ रही हैं. अप्रैल में यह आंकड़ा 52.4 प्रतिशत था.

बांग्लादेश ने कहा, पीएम तारिक रहमान के भारत दौरे पर अभी फैसला नहीं हुआ

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. उनके प्रेस सचिव ए.ए.एम. सालेह ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. इससे पहले भारतीय मीडिया में खबरें आई थीं कि तारिक रहमान 23 से 25 अगस्त तक नई दिल्ली का दौरा कर सकते हैं.

बांग्लादेश और भारत के बीच कई हफ्तों से रहमान के नई दिल्ली दौरे को लेकर बातचीत चल रही है. फरवरी में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद यह उनका भारत का पहला दौरा हो सकता है. दोनों देश 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद बिगड़े रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं.

बांग्लादेश कई बार भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर चुका है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए प्रेस सचिव सालेह ने कहा, “दौरे को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है.” उन्होंने बताया कि ढाका भारत की ओर से हसीना और “अन्य फरार अपराधियों” के प्रत्यर्पण को लेकर जवाब का इंतजार कर रहा है. वहीं, भारत के विदेश मंत्रालय ने भी तारिक रहमान के दौरे पर अब कोई टिप्पणी नहीं की है.

हैदराबाद में कार की टक्कर से युवती की मौत, सांसद के बेटे पर आरोप

हैदराबाद में एक सांसद के बेटे ने कथित तौर पर एस्टन मार्टिन कार चलाते हुए 26 वर्षीय महिला को टक्कर मार दी, जिससे महिला की मौत हो गई. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना रविवार, 16 अगस्त को शहर के माधापुर इलाके में हुई. 21 वर्षीय लिंगमानेनी संजुश कथित तौर पर उस समय कार चला रहा था. तभी सड़क पार कर रही महिला को कार ने टक्कर मार दी. हादसे में महिला के सिर में गंभीर चोटें आईं. महिला की उम्र 26 वर्ष बताई जा रही है. वह इनऑर्बिट मॉल में बने लाइफस्टाइल स्टोर में काम करती थीं.

घायल महिला को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने संजुश के खिलाफ तेज और लापरवाही से वाहन चलाने के आरोप में मामला दर्ज किया है. माधापुर के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) सी. श्रीधर ने बताया कि आरोपी को नोटिस जारी कर दिया गया है और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया है.

इस अपराध में अधिकतम सात साल तक की सजा का प्रावधान है. पुलिस के अनुसार, यह अपराध जमानती होने के कारण संजुश को गिरफ्तार नहीं किया गया है. संजुश राज्यसभा सांसद लिंगमानेनी रमेश का बेटा है. रमेश जन सेना पार्टी से राज्यसभा सदस्य हैं जो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है.

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पनामा नहर में कम हुआ पानी, गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटेगी

कम बारिश और सूखे के कारण पनामा नहर से जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ने वाला है. नहर का संचालन करने वाली पनामा कैनाल अथॉरिटी ने गुरुवार को बताया कि अगले महीने से नहर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या कम कर दी जाएगी. दुनिया के दो महासागरों को जोड़ने वाली यह महत्वपूर्ण नहर वैश्विक समुद्री व्यापार के करीब पांच फीसदी हिस्से के लिए अहम है. जहाजों को नहर से गुजारने के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है और यह पानी मुख्य रूप से बारिश से मिलता है.

पनामा कैनाल अथॉरिटी के अनुसार, 3 सितंबर से प्रतिदिन 36 की बजाय 34 जहाजों को नहर से गुजरने की अनुमति होगी. इसके बाद 15 सितंबर से यह संख्या घटाकर 32 जहाज प्रतिदिन कर दी जाएगी.

पनामा दुनिया के सबसे अधिक बारिश वाले देशों में शामिल है, लेकिन इसके बावजूद वहां गंभीर सूखे की स्थिति बनी हुई है. यह स्थिति प्रशांत महासागर के बढ़ते तापमान और अल नीनो के सक्रिय होने का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है. नहर प्राधिकरण के मुताबिक, मई से अगस्त के बीच बारिश ऐतिहासिक औसत से करीब 34 फीसदी कम रही. बारिश में इस कमी के कारण नहर में जहाजों के संचालन के लिए जरूरी जलस्तर बनाए रखना मुश्किल हो रहा है.

जर्मनी के गैस भंडार ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचे

जर्मनी के गैस भंडार फिलहाल सिर्फ 49 प्रतिशत भरे हैं, जबकि पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 67 प्रतिशत था. इस साल अगस्त में स्टोरेज का स्तर 2011 के बाद से अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है.

गैस स्टोरेज समूह आईएनईएस के प्रबंध निदेशक सेबास्टियन हाइनरमान ने जर्मन समाचार एजेंसी डीपीए से कहा कि जर्मनी की कुल गैस भंडारण क्षमता का करीब 78 प्रतिशत हिस्सा फिलहाल बुक है. लेकिन अगर गैस स्टोरेज क्षमता को सर्दियों तक पूरी तरह भर भी दिया जाए, तब भी बहुत ज्यादा ठंड पड़ने की स्थिति में देश की गैस जरूरतों को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त गैस नहीं होगी.

जर्मनी की सूखती नदियों का समाधान क्या होगा

इस बीच जर्मनी के अर्थव्यवस्था मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि मौजूदा जानकारी के आधार पर गैस की कमी की आशंका नहीं है. मंत्रालय ने माना कि गैस भंडार पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम हैं, लेकिन देश की ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा का आकलन केवल भंडारण स्तर के आधार पर नहीं किया जा सकता. जर्मनी को नॉर्वे से पाइपलाइन के जरिए गैस मिलती है. इसके अलावा देश में प्राकृतिक गैस के आयात के लिए टर्मिनल हैं और पड़ोसी यूरोपीय देशों से भी गैस की आपूर्ति होती है.

इस गर्मी में यूरोप में एलएनजी कीमतें असामान्य रूप से ऊंची रही हैं. ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी नाकेबंदी के कारण गैस बाजार पर दबाव बढ़ा है.

जर्मनी की खुफिया एजेंसी का दावा, चीन समेत तीन देश विदेशों में भी अपने विरोधियों पर नजर रखते हैं

जर्मनी की खुफिया एजेंसी 'बीएफवी' ने कहा है कि चीन, रूस और ईरान दूसरे देशों में रहने वाले अपने विरोधियों पर भी नजर रखते हैं और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश कर सकते हैं. यानी जो लोग इन देशों से जर्मनी आते हैं, उन्हें जर्मनी में रहने के बाद भी निगरानी, धमकी और दबाव का सामना करना पड़ सकता है. द एपोक टाइम्स (टीईटी ) की रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मनी की फेडरल ऑफिस फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन (बीएफवी) ने 20 अगस्त को जारी एक रिपोर्ट की समीक्षा की.

बीएफवी ने खास तौर पर चीन को लेकर कहा कि चीनी सरकार अपने आलोचकों, उइगरों, तिब्बतियों, हांगकांग के लोकतंत्र समर्थकों और ताइवान का समर्थन करने वाले लोगों पर नजर रख सकती है. एजेंसी के अनुसार, चीन की सरकार अपने खुफिया अधिकारियों और दूसरे लोगों की मदद से विदेशों में रहने वाले अपने आलोचकों की जानकारी जुटाती है और उन्हें डराने की कोशिश करती है.

कितनी खतरनाक हैं ईरान की खुफिया एजेंसियां जर्मनी में

जर्मनी ने अन्य देशों के कहने पर की जाने वाली गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ भी नया कानून बनाया है. ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मन कानून की धारा 87ए, जो 2 अप्रैल से लागू हुई, में कुछ मामलों में पांच साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है. सितंबर 2025 में जर्मनी की एक अदालत ने जिआन. नाम के व्यक्ति को चीन के लिए जासूसी करने का दोषी पाया. उसे चार साल नौ महीने की जेल की सजा मिली. अदालत ने माना कि वह 2007 से चीन की खुफिया एजेंसी के लिए काम कर रहा था. वह चीनी सरकार के विरोधियों की पहचान कर उनकी जानकारी जुटाता था.

पैलेट गन के इस्तेमाल पर एफआईआर की मांग, थाने के बाहर धरने पर बैठे राहुल गांधी

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार, 21 अगस्त को दिल्ली के एक पुलिस थाने पहुंचे और 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की. यह प्रदर्शन पेपर लीक के मुद्दे पर कॉकरेच जनता पार्टी यानी सीजेपी की ओर से किया गया था.

राहुल गांधी पहले भी इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग चुके हैं. उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों ने छात्रों पर बल प्रयोग किया और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया. पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया है, हालांकि, एक पुलिस रिकॉर्ड में प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल का उल्लेख होने की रिपोर्ट सामने आई है.

प्रदर्शन के दौरान 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचब की आंख में पैलेट लगने से गंभीर चोट आई थी. राहुल गांधी ने 24 जुलाई को साहिल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उसके घाव दिखाए थे और कहा था कि उसकी एक आंख की रोशनी जाने का खतरा है. प्रदर्शन में शामिल हुए इरशाद मंसूरी ने भी डीडब्ल्यू से बातचीत में उन्हें पैलेट लगने की बात कही थी. उनके शरीर से करीब 40 पैलेट यानी छर्रे निकाले गए थे.

कांग्रेस नेता श्रीनिवास बीवी ने डीडबल्यू हिंदी से कहा, “20 जुलाई को संसद के पास छात्रों पर पैलेट गन चलाई गई. सवाल सीधा है, आदेश किसने दिया?” उन्होंने कहा, “साहिल उस दिन गंभीर रूप से घायल हुआ था. एक महीने बाद भी वह सिर्फ एफआईआर दर्ज कराने के लिए एक थाने से दूसरे थाने जा रहा है.” श्रीनिवास ने आगे कहा, “पुलिस के रिकॉर्ड में पैलेट गन के इस्तेमाल की बात सामने आ चुकी है. फिर अमित शाह चुप क्यों हैं और किसे बचाया जा रहा है?”

20 जुलाई को दिल्ली में हुए युवाओं के संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान तैनात थे, जो सीधे गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं. श्रीनिवास बीवी ने कहा कि राहुल गांधी आज साहिल के साथ खड़े हैं और छात्रों के न्याय के अधिकार तथा सरकार से जवाब की मांग कर रहे हैं. राहुल गांधी अपने कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ के जरिए भी छात्रों की समस्याओं और उनके अधिकारों से जुड़े सवालों को लगातार सामने ला रहे हैं.

इमरान खान को जेल से अस्पताल ले जाया गया, जांच के बाद फिर लौटे जेल

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को शुक्रवार को कुछ समय के लिए जेल से निकालकर इस्लामाबाद के एक निजी अस्पताल ले जाया गया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें अदियाला जेल से शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया गया. इमरान खान के समर्थकों में इस बात को लेकर खुशी का माहौल बन गया था कि अब वे अपने नेता से मुलाकात कर पाएंगे. हालांकि, डॉक्टरों की जांच के बाद उन्हें चिकित्सकीय रूप से फिट बताया गया और वापस जेल भेज दिया गया.

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी पीटीआई के प्रवक्ता ने बताया कि इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत अस्पताल ले जाया गया. बाद में पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बताया कि नेत्र रोग विशेषज्ञ, हृदय रोग विशेषज्ञ और फिजिशियन समेत डॉक्टरों की एक टीम ने उनकी विस्तृत जांच की. डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं पाई.

इमरान खान को अस्पताल ले जाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद आया, जिसमें अदालत ने उन्हें 48 घंटे के भीतर एक निजी अस्पताल में शिफ्ट करने का निर्देश दिया था. हालांकि, सरकार ने इस आदेश पर आपत्ति जताई थी. कानून मंत्री आजम नजीर तरार का कहना था कि कानून के तहत किसी दोषी कैदी का इलाज जेल या सरकारी अस्पताल में होना चाहिए. बाद में सरकार ने स्पष्ट किया कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेगी.

इमरान खान के समर्थक लंबे समय से उनकी सेहत को लेकर चिंता जताते रहे हैं. उनका कहना है कि तीन साल से ज्यादा समय जेल में रहने के दौरान उनकी सेहत खराब हुई है. उनके वकीलों ने यह भी दावा किया है कि उनकी दाहिनी आंख की रोशनी काफी कम हो गई है. हालांकि, सरकार पहले कह चुकी है कि उनकी मेडिकल रिपोर्ट में ऐसी कोई गंभीर स्थिति नहीं मिली है, जिसके लिए तत्काल इलाज की जरूरत हो.

इमरान खान 2018 से 2022 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे थे. अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उनकी सरकार गिर गई थी. इसके बाद से उनका पाकिस्तान की सत्ता और सेना के साथ टकराव बढ़ता गया. उन्हें 2023 में गिरफ्तार किया गया और तब से वह जेल में हैं. भ्रष्टाचार और अन्य मामलों में उन्हें सजा सुनाई जा चुकी है. हालांकि, खान और उनकी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हैं.

न्यायिक सेवा में जाने के लिए अब तीन की बजाय एक साल की प्रैक्टिस होगी जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 के अपने फैसले की समीक्षा करते हुए न्यायिक सेवा में सीधे भर्ती होने वाले उम्मीदवारों के लिए तीन साल की प्रैक्टिस की अनिवार्यता में बदलाव किया है. कोर्ट ने अब एक साल की प्रैक्टिस को अनिवार्य कर दिया है. यह फैसला उन लॉ ग्रेजुएट्स के लिए बड़ी राहत है, जो न्यायिक सेवा की तैयारी कर रहे हैं. पिछले साल तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त लागू होने के बाद कई उम्मीदवारों को अपनी तैयारी और करियर को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा था. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले के लंबित रहने के कारण कई राज्यों में न्यायिक सेवा की भर्तियों को लेकर भी स्थिति साफ नहीं थी.

कोर्ट के मुताबिक, 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी होने वाली न्यायिक सेवा की भर्तियों में उम्मीदवारों को तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त पूरी करने की जरूरत नहीं होगी. इस अवधि में आवेदन करने वाले लॉ ग्रेजुएट्स के लिए कम से कम एक साल की प्रैक्टिस जरूरी होगी. चयनित उम्मीदवारों को इसके बाद एक साल की ट्रेनिंग न्यायिक अकादमी में करनी होगी. इसके बाद उन्हें एक साल की क्लर्कशिप करनी होगी, जिसमें वे जजों की निगरानी में काम करेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि न्यायिक सेवा में आने वाले उम्मीदवारों के लिए कानूनी पेशे का व्यावहारिक अनुभव जरूरी है. कोर्ट का मानना है कि एक साल की प्रैक्टिस के साथ ट्रेनिंग और क्लर्कशिप की व्यवस्था से उम्मीदवारों को अदालत की कार्यप्रणाली और न्यायिक प्रक्रिया को समझने का पर्याप्त अनुभव मिलेगा. यह फैसला मई 2025 में लागू की गई तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त की समीक्षा के बाद आया है. इससे न्यायिक सेवा की तैयारी कर रहे नए लॉ ग्रेजुएट्स के लिए भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता फिलहाल आसान हुआ है.

छह यूरोपीय देशों ने इस्राएल की नई बस्ती बनाने की योजना का विरोध किया

येरुशलम के पास इस्राएल की नई बस्ती बनाने की योजना का छह यूरोपीय देशों और कनाडा ने विरोध किया है. उन्होंने इस्राएल से कब्जे वाले फलीस्तीनी क्षेत्र में बस्तियों का विस्तार रोकने की मांग की है. यह बयान ऐसे समय आया है जब इस्राएली अधिकारियों ने इस इलाके में 1,200 से ज्यादा घर बनाने के लिए टेंडर जारी किए हैं.

इन देशों ने इस्राएल से योजना को तुरंत रोकने और पश्चिमी तट पर नई बस्तियां बनाना बंद करने की अपील की. संयुक्त बयान में कहा गया, “पश्चिमी तट में इस समय हालात बहुत खराब हैं. आम लोगों के खिलाफ बस्ती में रहने वाले लोगों की हिंसा बढ़ रही है और फलीस्तीनी अर्थव्यवस्था पर भी कई तरह की पाबंदियां हैं. ऐसे में इस्राएल का यह फैसला और भी चिंता की बात है.” इस पर फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, ब्रिटेन, नॉर्वे और कनाडा ने हस्ताक्षर किए हैं.

ई-1 योजना को इस्राएल ने पिछले साल मंजूरी दी थी. इस प्रोजेक्ट के तहत पूर्वी येरुशलम और वेस्ट बैंक के बीच के इलाके में भी इस्राएली बस्तियां बसाई जाएंगी. पूर्वी येरुशलम पर इस्राएल का कब्जा है और वहां ज्यादातर फीलस्तीनी रहते हैं. आलोचकों का कहना है कि ई-1 योजना पूर्वी येरुशलम को वेस्ट बैंक से अलग कर देगी. संयुक्त राष्ट्र ने भी कहा है कि ई-1 योजना एक जुड़े हुए और स्वतंत्र फलीस्तीनी देश के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा है.

अलास्का में क्रैश हुआ चार्टर विमान, आठ लोगों की जान गई

अमेरिका के अलास्का में गुरुवार को एक चार्टर विमान पश्चिमी अलास्का स्थित रडार साइट पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसे में विमान में सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई. अमेरिकी सेना ने इसकी जानकारी दी. दुर्घटना केप न्यूएनहम लॉन्ग रेंज रडार साइट एयरपोर्ट पर हुई, जो अलास्का के सबसे बड़े शहर एंकोरेज से करीब 725 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है.

फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) के मुताबिक, अलास्का के एंकोरेज स्थित सिक्योरिटी एविएशन कंपनी का सेसना 441 विमान स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 12:15 बजे केप न्यूएनहम एलआरआरएस एयरपोर्ट के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ. विमान एंकोरेज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से केप न्यूएनहम जा रहा था.

अमेरिकी सेना ने घटना पर दुख जताया. केप न्यूएनहम में स्थित यह रडार साइट अलास्का के हवाई क्षेत्र और उसकी सीमाओं के आसपास उड़ान भरने वाले विमानों पर नजर रखने वाले दूरस्थ रडार स्टेशनों के नेटवर्क का हिस्सा है. रडार साइट का प्रबंधन पैसिफिक एयर फोर्सेज रीजनल सपोर्ट सेंटर द्वारा किया जाता है. अधिकारियों ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है.

भारत में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर, सरकार ने दी ड्यूटी-फ्री आयात की मंजूरी

भारत में चीनी की कीमतें पिछले दो महीनों में करीब 40 फीसदी बढ़ गई हैं. घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों और घटती आपूर्ति के बीच सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के आयात को बिना आयात शुल्क के मंजूरी दी है. यह छूट 31 अक्टूबर तक लागू रहेगी. भारत में आम तौर पर चीनी के आयात पर 100 फीसदी शुल्क लगाया जाता है.

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है और इस दौरान चीनी की मांग बढ़ जाती है. रॉयटर्स के मुताबिक, भारत करीब एक दशक में पहली बार चीनी का आयात करने जा रहा है. कम उत्पादन की वजह से घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है.

भारत के इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी देखने को मिल रहा है. लंदन में बेंचमार्क व्हाइट शुगर फ्यूचर्स और न्यूयॉर्क में रॉ शुगर फ्यूचर्स में 4 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है. भारत दुनिया में चीनी की खपत के मामले में सबसे बड़ा बाजार है, इसलिए उसकी आयात मांग का असर वैश्विक कीमतों पर भी पड़ता है. चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर भारत में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चीनी की कमी के लिए सरकार की एथनॉल नीति को जिम्मेदार ठहराया है.

केजरीवाल का कहना है कि सरकार ने पेट्रोल में एथनॉल मिलाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल बढ़ाया, ताकि कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाई जा सके. उनका आरोप है कि इससे चीनी की घरेलू उपलब्धता कम हुई और अब उसी कमी को पूरा करने के लिए सरकार को विदेश से चीनी मंगानी पड़ रही है. केजरीवाल ने कहा, “तेल के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाने के लिए उन्होंने गन्ने से एथनॉल बनाना शुरू किया. इसके नतीजे में चीनी की कमी हो गई. अब उसी विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल चीनी आयात करने में किया जाएगा.”

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 21, 2026 06:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).