BREAKING: गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, कक्षा 9-12 तक सभी माध्यमों में भगवद् गीता अनिवार्य, उर्दू स्कूल भी शामिल; जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने जताया विरोध

गुजरात सरकार ने एक अपने महत्वपूर्ण निर्णय में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए गुजराती, हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू माध्यम के स्कूलों में प्रथम भाषा की पाठ्यपुस्तकों में श्रीमद् भगवद् गीता को अनिवार्य रूप से शामिल करने का ऐलान किया है

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Bhagavad Gita Compulsory in Gujarat Schools:  गुजरात सरकार ने एक अपने महत्वपूर्ण निर्णय में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए गुजराती, हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू माध्यम के स्कूलों में प्रथम भाषा की पाठ्यपुस्तकों में श्रीमद् भगवद् गीता को अनिवार्य रूप से शामिल करने का ऐलान किया है. सरकार की तरफ यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत उठाया गया बताया गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों को गीता के मूल्य-आधारित शिक्षाओं के माध्यम से नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की समझ देना है.

फैसले का डिटेल्स

गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (GSHSEB) ने इस शैक्षणिक वर्ष से कक्षा 9 से 12 के प्रथम भाषा के पाठ्यपुस्तकों में भगवद् गीता के मूल्य-आधारित अध्यायों को शामिल किया है. प्रत्येक भाषा — गुजराती, हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू — के पाठ्यपुस्तकों में दो-दो अध्याय जोड़े गए हैं. शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, गुजराती माध्यम के लिए गीता के अध्याय सीधे पाठ्यपुस्तकों में सम्मिलित किए गए हैं, जबकि हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू माध्यम के लिए पूरक पुस्तिकाएँ तैयार की गई हैं. यह भी पढ़े: Bhagavad Gita In Gujarat Syllabus Textbooks: गुजरात के स्कूलों में 6वीं से 8वीं तक के बच्चे पढेंगे ‘भगवद गीता’, पाठ्यक्रम में शामिल

पहले भी कक्षा 6 से 8 में हुआ था अनिवार्य

इससे पहले, पिछले शैक्षणिक वर्ष में कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए गीता पर आधारित एक पूरक पाठ्यपुस्तक लागू की गई थी, जिसे गीता जयंती के अवसर पर लॉन्च किया गया था.

शिक्षा राज्यमंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया की प्रतिक्रिया

प्रदेश के शिक्षा राज्यमंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने इस फैसले पर कहा, “गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह नैतिक और आध्यात्मिक जीवन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है। इससे छात्रों में नैतिकता और भारतीय संस्कृति के प्रति गर्व की भावना जागृत होगी.

विवाद और समर्थन

इस निर्णय को कई लोगों ने भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने वाला सकारात्मक कदम बताया है, वहीं कुछ संगठनों ने इसे एक धर्म विशेष को प्राथमिकता देने वाला निर्णय करार दिया है.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद का विरोध

सरकार के इस फैसले को जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने गुजरात हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर विरोध जताया है. याचिका में फैसले की संवैधानिक वैधता पर प्रश्न उठाए गए. हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, और मामला अभी विचाराधीन है.

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