Annamalai Breaks Silence On NEET-UG Row: तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई (K Annamalai) ने बुधवार, 22 जुलाई को NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार से कई सवाल पूछे. हाल ही में बीजेपी से अलग हुए अन्नामलाई ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों से सार्थक बातचीत शुरू करने में सरकार ने काफी देर कर दी. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर छात्रों का आंदोलन उग्र होने के बाद ही संवाद की पहल क्यों की गई. NEET Paper Leak Debate: संसद का गतिरोध समाप्त करने की दिशा में कदम; लोकसभा में नीट विवाद पर विशेष चर्चा कराने को तैयार हुई केंद्र सरकार
NEET का समर्थन किया, लेकिन पेपर लीक पर जताई चिंता
अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट में कहा कि उन्होंने हमेशा नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) का समर्थन किया है, क्योंकि इससे मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में एकरूपता आई और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को भी डॉक्टर बनने का अवसर मिला. हालांकि उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में NEET-UG का प्रश्नपत्र तीन बार लीक होने के आरोपों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है.
उन्होंने लिखा कि बार-बार पेपर लीक होने से छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ा, क्योंकि उन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ी, जबकि व्यवस्था निष्पक्ष परीक्षा कराने में विफल रही. अन्नामलाई ने कहा कि इसी वजह से छात्रों का भरोसा टूटा और वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए.
के अन्नामलाई ने NEET-UG 2026 विरोध प्रदर्शन से जुड़ी बातचीत में देरी को लेकर केंद्र से सवाल किया:
Over the past many years, I have taken a personal stand in support of the NEET examination, arguing that it brought uniformity in student selection across the country and gave students from underprivileged backgrounds a real shot at pursuing their dream of medical education. In…
— K.Annamalai (@annamalai_k) July 22, 2026
सरकार से पूछा- बातचीत में इतनी देरी क्यों हुई?
अन्नामलाई ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है. उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया कि प्रदर्शनकारी छात्रों से समय रहते संवाद क्यों नहीं किया गया.
उन्होंने लिखा, "लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन मौलिक अधिकार है. लेकिन सवाल यह है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत शुरू करने में इतनी देर क्यों की? आंदोलन के गंभीर रूप लेने तक इंतजार क्यों किया गया?"
प्रदर्शनकारियों को भी दी नसीहत
अन्नामलाई ने छात्र नेताओं को भी आगाह करते हुए कहा कि लंबे समय तक चलने वाले आंदोलनों में अक्सर ऐसे लोग शामिल हो जाते हैं जिनके अपने राजनीतिक या निजी हित होते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को आंदोलन के मूल उद्देश्य से ध्यान भटकाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. उन्होंने लिखा कि अगर छात्र ऐसे तत्वों को खुली छूट देंगे तो आंदोलन अपनी मूल मांगों से भटक जाएगा. इसलिए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोगों को सतर्क रहना चाहिए.
सरकार से पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई की अपील
अन्नामलाई ने केंद्र सरकार से छात्रों के साथ सीधे संवाद करने, पारदर्शिता बनाए रखने और उनकी चिंताओं का जल्द समाधान निकालने की अपील की. उन्होंने कहा कि किसी भी देश की ताकत उसकी युवा पीढ़ी का अपने संस्थानों पर विश्वास होता है. यदि छात्र शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भरोसा खो देंगे तो यह देश के भविष्य के लिए गंभीर खतरा होगा.
NEET-UG आंदोलन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
दिल्ली के जंतर-मंतर समेत कई इलाकों में छात्र कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प, आंसू गैस के गोले, हिरासत और बल प्रयोग के आरोप भी सामने आए हैं.
इससे पहले अन्नामलाई ने NEET-UG री-एग्जाम के दौरान की गई व्यापक सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए थे. उन्होंने प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए CRPF, CISF, भारतीय वायुसेना की मदद, AI आधारित CCTV निगरानी, बायोमेट्रिक और फेस रिकग्निशन जांच जैसी व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए पूछा था कि अगर इतनी सुरक्षा की जरूरत थी, तो पहले परीक्षा की सुरक्षा क्यों सुनिश्चित नहीं की गई. गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा को कथित पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने रद्द कर दिया था.













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