VIDEO: हरियाणा के अंबाला बोरवेल हादसे में 220 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 4 साल के मासूम की मौत, कई घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी बच्चे को नहीं बचाया जा सका
(Photo Credits: X/@Benarasiyaa)

Ambala Borewell Tragedy: हरियाणा के अंबाला जिले के बराड़ा क्षेत्र के धनौरा गांव में मंगलवार सुबह एक खुले बोरवेल में गिरे चार साल के बच्चे निर्भय की मौत हो गई है. सेना, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों द्वारा चलाए गए 21 घंटे लंबे संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बुधवार तड़के लगभग 3.30 बजे बच्चे को बाहर निकाला गया. उसे तुरंत अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे 'मृत घोषित' (ब्रॉट डेड) कर दिया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर वायरल हुए वीडियो और बोरवेल के भीतर डाले गए कैमरे के फुटेज से पता चला है कि पाइपलाइन या आंतरिक रिसाव के कारण बोरवेल के अंदर पानी भर गया था, जिससे बच्चा उसमें डूब गया.

कैसे हुआ यह हादसा?

यह दुखद घटना मंगलवार सुबह करीब 6.30 बजे की है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, 4 वर्षीय निर्भय अपने पिता मंजीत के साथ खेत पर काम कर रहे अपने दादा करनैल सिंह के लिए नाश्ता लेकर गया था. दादा जब नाश्ता करने बैठे, तो निर्भय पास ही खेत में खेलने लगा.  यह भी पढ़े:  UP: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में बोरवेल में गिरे पांच साल के बच्चे की मौत

खेलते-खेलते बच्चा खेत में ही बने करीब 9 इंच चौड़े बोरवेल के पास चला गया और उसमें मिट्टी के ढेले फेंकने लगा. चश्मदीदों और पुलिस के अनुसार, बोरवेल के आसपास की जमीन गीली और फिसलन भरी थी. मिट्टी फेंकने के बाद जब निर्भय अंदर देखने के लिए आगे झुका, तो उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे गहरे बोरवेल के शाफ्ट में जा गिरा.

रेस्क्यू ऑपरेशन करते जवान

अंबाला बोरवेल हादसा

21 घंटे चला मल्टी-एजेंसी रेस्क्यू ऑपरेशन

बच्चे के गिरने की आवाज सुनकर दादा और पिता तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस हेल्पलाइन 112 पर सूचना दी. स्थानीय स्तर पर बचाव के प्रयास विफल होने के बाद सुबह करीब 7.30 बजे जिला प्रशासन को सूचित किया गया. इसके बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), स्थानीय पुलिस और भारतीय सेना के जवानों ने मोर्चा संभाला.

बचाव दल ने बोरवेल के भीतर विशेष कैमरा और ऑक्सीजन लाइनें नीचे भेजीं. ऑपरेशन के दौरान कैमरे में कैद हुए विजुअल्स से पुष्टि हुई कि बोरवेल के अंदर लगभग 60 फीट की गहराई से पानी का रिसाव हो रहा था. लगातार हो रही बारिश और पानी के बढ़ते स्तर के कारण बच्चा धीरे-धीरे पानी में डूबता चला गया, जिससे ऑपरेशन में भारी मुश्किलें आईं और बच्चे को बचाया नहीं जा सका.

मेडिकल टीम का बयान

बुधवार तड़के जब बच्चे को बोरवेल से बाहर निकाला गया, तो उसे तुरंत एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया. अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. ऋषिपाल ने संवाददाताओं को बताया, "घंटों के निरंतर प्रयासों के बाद बच्चे को बाहर निकाला गया और तुरंत आपातकालीन विभाग में लाया गया. रेस्क्यू साइट पर ही बच्चे की स्थिति बेहद नाजुक दिख रही थी. अस्पताल लाने पर जब हमने ईसीजी (ECG) किया, तो पुष्टि हुई कि बच्चे की मौत पहले ही हो चुकी थी. शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया गया है और मौत के सटीक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही चलेगा."

परिजनों की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई

अस्पताल द्वारा मौत की पुष्टि किए जाने से पहले बच्चे के परिवार और ग्रामीणों ने प्रशासन द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की थी. निर्भय के चाचा ने मीडिया से कहा, "प्रशासन, पुलिस, सेना और सभी रेस्क्यू टीमों ने पूरी ताकत लगाई और ग्रामीणों ने भी पूरा सहयोग किया."

इस बीच, अंबाला के उपायुक्त (DC) अजय सिंह तोमर ने इस लापरवाही के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने बताया कि बोरवेल को खुला छोड़ने वाले जमीन के मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि महज एक टाइल, ईंट या कंक्रीट के टुकड़े से इस 9 इंच के गड्ढे को ढका जा सकता था, लेकिन इस लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली. उन्होंने सभी किसानों से अपने खेतों में बोरवेल को हमेशा ढककर रखने की अपील की है.