NSA Ajit Doval Russia Visit: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल रूस की राजधानी मॉस्को पहुंच गए हैं. उनका यह दौरा एक ऐसे नाजुक समय पर हो रहा है जब अमेरिका, भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर बेहद नाराज है और भारी-भरकम टैक्स (टैरिफ) लगाने की धमकी दे रहा है. इस दौरे में डोभाल रूस के बड़े अधिकारियों और राष्ट्रपति पुतिन से भी मुलाकात कर सकते हैं.
अमेरिका क्यों नाराज है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि भारत, रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर एक तरह से यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी फंडिंग कर रहा है. ट्रंप ने भारत को धमकी देते हुए कहा है कि उसे रूस से तेल खरीदना तुरंत बंद कर देना चाहिए, वरना अमेरिका भारत के सामानों पर भारी टैरिफ लगाएगा.
ट्रंप ने पहले 25% टैरिफ लगाने की बात कही थी, लेकिन बाद में उन्होंने कहा, "भारत एक अच्छा कारोबारी पार्टनर नहीं है. मुझे लगता है कि अगले 24 घंटों में हम उन पर इससे कहीं ज़्यादा टैरिफ लगाने वाले हैं."
इसके साथ ही ट्रंप ने रूस को भी चेतावनी दी है कि अगर उसने यूक्रेन में जल्द ही युद्धविराम (सीजफायर) नहीं किया, तो अमेरिका उस पर और भी कड़े प्रतिबंध लगाएगा.
भारत का करारा जवाब
ट्रंप के आरोपों पर भारत ने भी अमेरिका को आईना दिखाया है. भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जब 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था, तब खुद अमेरिका चाहता था कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदे ताकि दुनिया के बाजार में तेल की कीमतें स्थिर रहें.
भारत ने साफ किया कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा. भारत ने यह भी इशारा किया कि अमेरिका खुद भी रूस के साथ बड़ा व्यापार कर रहा है.
डोभाल के दौरे का असली मकसद क्या है?
हालांकि डोभाल का यह दौरा पहले से तय था, लेकिन मौजूदा तनावपूर्ण माहौल ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया है. इस दौरे के मुख्य एजेंडे में ये बातें शामिल हैं:
- रक्षा सौदे: भारत और रूस पुराने रक्षा सहयोगी हैं. इस बातचीत में S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की बाकी बची दो यूनिट्स की डिलीवरी में तेजी लाने पर बात हो सकती है.
- कच्चा तेल: रूस से तेल की सप्लाई को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा होगी.
- रणनीतिक साझेदारी: दोनों देश आपसी संबंधों को और मजबूत करने पर विचार करेंगे.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी इस महीने के अंत में रूस का दौरा कर सकते हैं, जो यह दिखाता है कि दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा.
S-400 डील इतनी अहम क्यों?
भारत ने 2018 में रूस के साथ लगभग 40,000 करोड़ रुपये में 5 S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने का सौदा किया था. यह सिस्टम हवा में ही दुश्मन की मिसाइलों, ड्रोन और लड़ाकू विमानों को मार गिराने की क्षमता रखता है. भारत को अब तक 3 सिस्टम मिल चुके हैं और उन्हें तैनात भी कर दिया गया है. बाकी 2 की डिलीवरी रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से लेट हो गई है, जो अब 2026 तक मिलने की उम्मीद है.
कुल मिलाकर, अजित डोभाल का यह दौरा भारत की विदेश नीति के लिए एक बड़ी चुनौती है, जहां उसे अपने पुराने दोस्त रूस के साथ संबंधों को बनाए रखना है और अमेरिका के दबाव को भी झेलना है.












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