Animal Care in Rainy Season: मानसून की बारिश जहां गर्मी से राहत दिलाती है, वहीं यह पशुओं के लिए कई तरह की बीमारियां भी लेकर आती है. इस मौसम में नमी और जलभराव के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. चाहे आपके पास गाय-भैंस जैसे दुधारू पशु हों, मुर्गी-बकरी जैसे छोटे जानवर हों या फिर कुत्ता-बिल्ली जैसे पालतू दोस्त, सभी को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है. आइए, आसान भाषा में जानते हैं कि बरसात में अपने बीमार पशुओं का ख्याल कैसे रखें और उन्हें बीमारियों से कैसे बचाएं.
गाय और भैंस
बरसात के मौसम में बड़े जानवरों जैसे गाय और भैंस में कई तरह की समस्याएं देखने को मिलती हैं.
आम बीमारियाँ:
- खुरपका-मुंहपका (FMD): यह एक बहुत ही संक्रामक बीमारी है, जिसमें पशु के मुंह और खुरों में छाले पड़ जाते हैं.
- गलघोंटू (Haemorrhagic Septicaemia): इसमें पशु को तेज बुखार आता है, गले में सूजन होती है और सांस लेने में तकलीफ होती है.
- पेट फूलना (Bloat): गीला और सड़ा-गला चारा खाने से गैस बनने लगती है और पेट फूल जाता है.
- थनैला (Mastitis): यह बीमारी थनों में होती है, जिससे थन में सूजन और दर्द होता है और दूध खराब हो जाता है.
बचाव और देखभाल के टिप्स:
- साफ-सफाई: पशुओं के रहने की जगह (बाड़े) को हमेशा सूखा और साफ रखें. जलभराव न होने दें. फर्श पर सूखी रेत या पुआल बिछा सकते हैं.
- सही चारा: पशुओं को भीगा हुआ या सड़ा-गला चारा बिल्कुल न खिलाएं. हमेशा सूखा और साफ चारा ही दें. चारे को ऊंचे और सूखे स्थान पर स्टोर करें.
- ताजा पानी: पीने के लिए हमेशा साफ और ताजा पानी दें. बारिश का जमा हुआ पानी पिलाने से बचें.
- टीकाकरण: बरसात शुरू होने से पहले ही गलघोंटू और खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों का टीका जरूर लगवा लें.
- कीड़ों से बचाव: बाड़े में मक्खी-मच्छर भगाने के लिए नीम की पत्तियों का धुआं कर सकते हैं या कीटनाशक का छिड़काव कर सकते हैं. पशुओं के शरीर पर लगे कीड़ों (चिचड़ी) को हाथ से या दवा लगाकर हटाएं.
बीमार होने पर क्या करें? अगर कोई पशु बीमार लगता है, जैसे सुस्त है, खाना-पीना कम कर दिया है या उसे बुखार है, तो उसे तुरंत बाकी स्वस्थ पशुओं से अलग कर दें और नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें.
मुर्गी
मुर्गियों में बरसात के समय बीमारियां बहुत तेजी से फैलती हैं.
आम बीमारियाँ:
- रानीखेत: यह एक जानलेवा बीमारी है, जिसमें मुर्गी को सांस लेने में दिक्कत होती है और वह गर्दन घुमा देती है.
- सर्दी-जुकाम (Coryza): इसमें मुर्गियों की आंखों और नाक से पानी बहता है.
- कॉक्सीडियोसिस (Coccidiosis): यह खूनी दस्त की बीमारी है.
बचाव और देखभाल के टिप्स:
- सूखा दड़बा: मुर्गियों के दड़बे (घर) में पानी और नमी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए. फर्श को सूखा रखने के लिए लकड़ी का बुरादा या धान की भूसी बिछाएं.
- सही दाना-पानी: दाना और पानी के बर्तन जमीन पर न रखें, बल्कि थोड़ी ऊंचाई पर टांग दें ताकि वे गीले न हों.
- जगह की कमी न हो: दड़बे में जरूरत से ज्यादा मुर्गियां न रखें, इससे गंदगी और बीमारियां फैलती हैं.
- विटामिन: पीने के पानी में विटामिन A और C मिलाकर देने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
बकरी
बकरियां नमी और गीलेपन को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर पाती हैं और जल्दी बीमार पड़ जाती हैं.
आम बीमारियाँ:
- निमोनिया: ठंड लगने और भीगने से बकरियों को निमोनिया हो जाता है.
- पेट के कीड़े: गीली घास चरने से पेट में कीड़े हो जाते हैं, जिससे वे कमजोर हो जाती हैं.
- खुरों का सड़ना: लगातार गीली जगह पर रहने से उनके खुर सड़ने लगते हैं.
बचाव और देखभाल के टिप्स:
- ऊंचा और सूखा बाड़ा: बकरियों के रहने की जगह ऊंची होनी चाहिए ताकि पानी न भरे. फर्श को सूखा रखें.
- बाहर चराने से बचें: बारिश के दौरान या गीली घास पर चराने के लिए बाहर न भेजें. उन्हें बाड़े में ही सूखा चारा खिलाएं.
- कीड़े की दवा: बरसात से पहले और बीच में पेट के कीड़ों की दवा (डीवॉर्मिंग) जरूर पिलाएं.
- खुरों की जांच: नियमित रूप से उनके खुरों की जांच करें. अगर कोई गंदगी या सड़न दिखे तो उसे साफ करें.
कुत्ता और बिल्ली
हमारे पालतू दोस्त, कुत्ते और बिल्लियां भी मानसून में कई तरह के संक्रमण का शिकार हो सकते हैं.
आम बीमारियाँ:
- त्वचा का संक्रमण (Skin Infection): नमी के कारण फंगल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन हो सकता है, जिससे खुजली और चकत्ते पड़ जाते हैं.
- पेट की समस्या: गंदा पानी पीने या बाहर कुछ गलत खा लेने से उल्टी-दस्त हो सकते हैं.
- टिक फीवर (Tick Fever): बरसात में कीड़े-मकोड़े (टिक) बहुत होते हैं, जिनके काटने से खतरनाक टिक फीवर हो सकता है.
बचाव और देखभाल के टिप्स:
- सूखा रखें: बारिश में भीगने के बाद उन्हें तुरंत सूखे तौलिये से अच्छे से पोंछ दें, खासकर उनके पंजे और कान.
- साफ पानी: उन्हें हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पीने को दें.
- पंजे की सफाई: बाहर से घर आने पर उनके पंजे जरूर साफ करें. इससे संक्रमण का खतरा कम होता है.
- कीड़ों से बचाव: टिक और पिस्सू से बचाने वाले कॉलर, पाउडर या स्पॉट-ऑन दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से करें.
- संतुलित भोजन: उन्हें घर का बना ताजा और संतुलित भोजन दें जिससे उनकी इम्यूनिटी मजबूत रहे.
निष्कर्ष
थोड़ी सी सावधानी और सही देखभाल से आप अपने पशुओं को बरसात की बीमारियों से बचा सकते हैं. याद रखें, किसी भी बीमारी के लक्षण दिखने पर घरेलू इलाज में समय बर्बाद करने की बजाय तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लेना सबसे बेहतर होता है. आपके पशु स्वस्थ रहेंगे तो आप भी खुश रहेंगे.










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