BR Shetty Lawsuit: बैंक ऑफ बड़ौदा पर बीआर शेट्टी ने ठोका 15 बिलियन डॉलर का मुकदमा; बैंक बोला- 'नहीं मिला कोई नोटिस, मजबूती से लड़ेंगे'
यूएई के दिग्गज स्वास्थ्य समूह एनएमसी हेल्थकेयर (NMC Health) और यूएई एक्सचेंज के संस्थापक डॉ. बावगुथु रघुराम शेट्टी (बीआर शेट्टी) ने सरकारी स्वामित्व वाले बैंक ऑफ बड़ौदा और 25 अन्य सह-प्रतिवादियों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में 15 बिलियन डॉलर (लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये) के हर्जाने का मुकदमा दायर किया है.
मुंबई: भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के खिलाफ यूएई के पूर्व अरबपति कारोबारी और एनएमसी हेल्थकेयर के संस्थापक डॉ. बीआर शेट्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, शेट्टी ने बैंक और उससे जुड़े अधिकारियों पर धन की अवैध हेराफेरी, जालसाजी और एनएमसी हेल्थ के पतन में भूमिका निभाने का आरोप लगाते हुए 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर के हर्जाने की मांग की है.
इस सनसनीखेज मुकदमे की खबर सामने आने के बाद बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार में बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों में 2 से 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
बीआर शेट्टी के आरोप: फंड डायवर्जन और जाली हस्ताक्षर
बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिका में बीआर शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा, उसके 10 अधिकारियों और अन्य 25 पक्षों को नामजद किया है:
- हर्जाने का वर्गीकरण: इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में 5 बिलियन डॉलर प्रत्यक्ष नुकसान, 5 बिलियन डॉलर परिणामी (कॉन्सिक्वेंशियल) नुकसान और 5 बिलियन डॉलर प्रतिष्ठा और गुडविल को पहुंचे नुकसान के रूप में मांगे गए हैं। इस पर 18% वार्षिक ब्याज की भी मांग की गई है.
- जालसाजी का दावा: शेट्टी का दावा है कि उन्होंने 2012 में ही समूह का दैनिक नियंत्रण छोड़ दिया था और मार्च 2017 में सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया था. उनका आरोप है कि बैंक अधिकारियों और पूर्व अधिकारियों ने जाली हस्ताक्षरों और अनधिकृत निर्देशों के जरिए पैसे को इधर-उधर किया, जिससे ऐसा दिखाया गया कि वे इन सौदों में शामिल थे.
- ऑडिट छुपाने का आरोप: याचिका में यह भी कहा गया है कि बैंक ने नियमों को ताक पर रखकर असुरक्षित कर्ज बांटे और इस एक्सपोजर को छुपाने की कोशिश की.
NMC हेल्थ के फाउंडर के मुक़दमे के बाद बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने अपना रुख साफ किया
बैंक ऑफ बड़ौदा का रुख: 'कोई औपचारिक नोटिस नहीं, दावों का कोर्ट में परीक्षण बाकी'
इक्विटीपंडित की रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ऑफ बड़ौदा ने रेगुलेटरी फाइलिंग में स्थिति स्पष्ट की है:
- नोटिस नहीं मिलने का बयान: बैंक ने कहा, "बैंक ऑफ बड़ौदा ने मीडिया में डॉ. बावगुथु रघुराम शेट्टी द्वारा 13 अक्टूबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में मुकदमा दायर करने की खबरें देखी हैं. बैंक को इस तरह के किसी मुकदमे की तामील (सर्विस) नहीं हुई है. चूंकि इन दावों का अभी अदालत में परीक्षण नहीं हुआ है, इसलिए बैंक इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता."
- मजबूत बचाव की तैयारी: बैंक ने साफ किया कि जैसे ही औपचारिक दस्तावेज प्राप्त होंगे, वह कानूनी तौर पर इसका कड़ा विरोध करेगा और अपने कॉरपोरेट हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा.
2,800 करोड़ की वसूली में जुटा है बैंक, शेट्टी पहले से दिवालिया घोषित
बैंक ऑफ बड़ौदा ने यह भी रेखांकित किया कि वह स्वयं शेट्टी के खिलाफ रिकवरी की प्रक्रिया चला रहा है:
- बकाया राशि: बैंक ऑफ बड़ौदा भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में बीआर शेट्टी से करीब 2,800 करोड़ रुपये की बकाया राशि की वसूली और प्रवर्तन कार्यवाही में जुटा है. बैंक के पक्ष में कई अदालती डिक्री (फैसले) पहले से मौजूद हैं.
- संपत्तियों पर रोक: वर्ष 2021 में ही कर्नाटक हाईकोर्ट ने शेट्टी को अपनी किसी भी संपत्ति को बेचने या किसी अन्य को हस्तांतरित करने से प्रतिबंधित कर दिया था.
- एनसीएलटी में दिवालियापन: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के समक्ष पिछली कार्यवाहियों में बीआर शेट्टी स्वयं यह स्वीकार कर चुके हैं कि वे दिवालिया (Insolvent) हैं और बैंकों का बकाया चुकाने में असमर्थ हैं.
क्या था एनएमसी हेल्थकेयर संकट?
खाड़ी क्षेत्र का सबसे बड़ा निजी हेल्थकेयर नेटवर्क रहा एनएमसी हेल्थ वर्ष 2020 में अचानक ढह गया था:
- छिपा हुआ कर्ज: वित्तीय कुप्रबंधन और जांच के बाद पता चला कि कंपनी पर 6 बिलियन डॉलर से अधिक का अघोषित कर्ज था, जिसे बही-खातों में नहीं दिखाया गया था. इसके बाद कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया (Administration) में डाल दिया गया था.
- 600 मिलियन डॉलर का पुराना सेटलमेंट: बैंक ऑफ बड़ौदा यूएई में इस समूह का एक बड़ा ऋणदाता था. इससे पहले बैंक ने किसी भी गलत कार्य या दायित्व को स्वीकार किए बिना, एनएमसी संस्थाओं के संयुक्त प्रशासकों के साथ 600 मिलियन डॉलर का भुगतान कर पुराने विवादों को सुलझा लिया था.