E20 पेट्रोल से BS- III गाड़ियों के रबर पार्ट्स और गास्केट को हो सकता है नुकसान; नितिन गडकरी ने दी राज्यसभा में जानकारी
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल मिश्रित ईंधन) के इस्तेमाल से बीएस-3 मानकों वाली पुरानी गाड़ियों के कुछ रबर पार्ट्स और गास्केट खराब हो सकते हैं. हालांकि, अध्ययन में इंजन में किसी बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं पाई गई है.
नई दिल्ली: देश भर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20 Fuel) की उपलब्धता बढ़ने के बाद पुरानी गाड़ियों के इंजन और माइलेज पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री (Union Road Transport and Highways Minister) नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने संसद को बताया कि E20 ईंधन के प्रयोग से बीएस-3 (BS-III) उत्सर्जन मानक वाली कुछ पुरानी गाड़ियों के रबर पार्ट्स और गास्केट को बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है.
राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बताया कि विस्तृत अध्ययनों में यह पाया गया है कि E20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों की ओवरऑल परफॉर्मेंस, टिकाऊपन (Durability) या इंजन को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुँचता है. यह भी पढ़ें: 'E20 पेट्रोल से बेहतर पिकअप और 30% कम कार्बन उत्सर्जन', केंद्र सरकार ने राज्यसभा में कहा- इंजन खराब होने का कोई सबूत नहीं
किन वाहनों में आ सकती है मेंटेनेंस की जरूरत?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2005 से 2016 के बीच निर्मित केवल बीएस-3 (BS-III) श्रेणी के वाहनों में ही E20 पेट्रोल के इस्तेमाल पर कुछ पार्ट्स प्रभावित हो सकते हैं.
उन्होंने कहा:
"1 अप्रैल 2005 से लागू हुए और 2016 से पहले निर्मित BS-III वाहनों पर किए गए परीक्षणों में पाया गया है कि कुछ रबर पार्ट्स और गास्केट को बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है. इन पार्ट्स का रिप्लेसमेंट वाहन की नियमित सर्विसिंग (Routine Servicing) के दौरान आसानी से किया जा सकता है."
उन्होंने कहा कि कारों या दोपहिया वाहनों के इंजनों में किसी भी प्रकार के बड़े संरचनात्मक बदलाव (Engine Modifications) की कोई जरूरत नहीं है.
माइलेज और वाहन प्रदर्शन पर अध्ययन के निष्कर्ष
E20 पेट्रोल के कारण गाड़ियों के माइलेज में गिरावट के आरोपों पर गडकरी ने कहा कि वाहन का माइलेज केवल इस्तेमाल किए जा रहे ईंधन के प्रकार पर निर्भर नहीं करता. वाहन निर्माताओं और टेस्ट एजेंसियों के अनुसार ड्राइविंग आदतें, टायर प्रेशर, एयर-कंडीशनर का इस्तेमाल और गाड़ी का रखरखाव जैसे कई कारक माइलेज को प्रभावित करते हैं.
सरकार द्वारा कराए गए अध्ययनों के अनुसार:
- पुराने वाहनों के प्रदर्शन और मेटल या प्लास्टिक कंपैटिबिलिटी (घटकों की अनुकूलता) में कोई असामान्य बदलाव नहीं देखा गया.
- वाहन चलाने (Drivability) या स्टार्ट होने (Startability) में कोई तकनीकी रुकावट दर्ज नहीं की गई.
किन शोध संस्थानों ने की थी जांच?
E20 पेट्रोल के देशव्यापी रोलआउट से पहले नीति आयोग द्वारा दिसंबर 2020 में गठित अंतर-मंत्रालयी समिति (IMC) ने इसके प्रभाव की जांच की थी.
यह निष्कर्ष इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) द्वारा किए गए संयुक्त अध्ययनों और प्रयोगशाला परीक्षणों पर आधारित हैं.
विपक्षी दलों और उपभोक्ता समूहों द्वारा पुरानी गाड़ियों के मेंटेनेंस खर्च को लेकर उठाए जा रहे सवालों के जवाब में सरकार ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग की प्रक्रिया को वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है.