देश की खबरें | 2023 कमलादेवी चट्टोपाध्याय एनआईएफ बुक प्राइज शॉर्टलिस्ट में महिला लेखकों का दबदबा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गणतंत्र की ‘संस्थापक माताओं’ के रूप में महिलाओं की भूमिका और विभाजन तथा आजादी के बाद दिल्ली के रंगरूप में आए बदलावों समेत आधुनिक भारतीय इतिहास के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल करने वाली गैर गल्प किताबों ने छठे कमलादेवी चट्टोपाध्याय एनआईएफ बुक प्राइज की शार्टलिस्ट में प्रमुखता से जगह बनाई है।

नयी दिल्ली, 21 नवंबर गणतंत्र की ‘संस्थापक माताओं’ के रूप में महिलाओं की भूमिका और विभाजन तथा आजादी के बाद दिल्ली के रंगरूप में आए बदलावों समेत आधुनिक भारतीय इतिहास के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल करने वाली गैर गल्प किताबों ने छठे कमलादेवी चट्टोपाध्याय एनआईएफ बुक प्राइज की शार्टलिस्ट में प्रमुखता से जगह बनाई है।

अच्युत चेतन की "फाउंडिंग मदर्स ऑफ द इंडियन रिपब्लिक", रोटेम गेवा की "डेल्ही रीबॉर्न: पार्टीशन एंड नेशन बिल्डिंग इन इंडियाज कैपिटल", और टेलर सी. शर्मन की "नेहरूज़ इंडिया: ए हिस्ट्री इन सेवन मिथ्स" को उनकी अंतर्दृष्टि के लिए चुना गया है। ये किताबें इतिहास और समकालीन प्रासंगिकता का एक वैचारिक संयोजन प्रदान करने में सक्षम हैं।

शॉर्टलिस्ट में जगह बनाने वाली अन्य किताबों में अक्षय मुकुल की "राइटर, रिबेल, सोल्जर, लवर: द मेनी लाइव्स ऑफ अज्ञेय" और गीता रामास्वामी की "लैंड, गन्स, कास्ट, वुमन: मेमॉयर्स ऑफ ए लैप्स्ड रिवोल्यूशनरी" शामिल हैं।

कमलादेवी चट्टोपाध्याय पुस्तक पुरस्कार "सभी राष्ट्रीयताओं के लेखकों द्वारा भारत के बारे में पिछले कैलेंडर वर्ष में प्रकाशित गैर-काल्पनिक साहित्य में उत्कृष्ट रचनाओं को मान्यता देता है।

2018 में स्थापित इस पुरस्कार में 15 लाख रुपये का नकद पुरस्कार और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।

शॉर्टलिस्ट का चयन एक जूरी द्वारा किया गया जिसमें राजनीतिक विश्लेषक नीरजा गोपाल जयाल (बुक प्राइज की अध्यक्ष), इतिहासकार श्रीनाथ राघवन, स्तंभकार-लेखक नवतेज सरना, वकील राहुल मत्थन, स्तंभकार-लेखक यामिनी अय्यर और उद्यमी मनीष सभरवाल शामिल थे।

जूरी ने एक बयान में कहा, ‘‘ लांगलिस्ट की प्रत्येक पुस्तक उस भारत पर महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रस्तुत करती है जिसमें हम रहते हैं और अंतिम निर्णय लेना एक कठिन काम था। शॉर्टलिस्ट में अंततः चुनी गई पांच पुस्तकें हमारी इस समझ को समृद्ध करती हैं कि राष्ट्र और उसके नागरिक कैसे बने हैं।’’

पिछले साल, शेखर पाठक ने पर्यावरण इतिहास पर लिखी गई किताब "द चिपको मूवमेंट: ए पीपल्स हिस्ट्री" के लिए केसीबीपी जीता था, जिसका हिंदी से अनुवाद मनीषा चौधरी ने किया है।

इस साल के पुरस्कार के विजेता की घोषणा एक दिसंबर को की जाएगी।

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