जरुरी जानकारी | जाड़े की मांग, कम आपूर्ति से सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन और बिनौला तेल में सुधार

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नयी दिल्ली, चार नवंबर विदेशी बाजारों में तेजी के रुख और जाड़े में हल्के तेलों की मांग बढ़ने से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शुक्रवार को सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन और बिनौला तेल कीमतों में सुधार दिखा। बाकी तेल-तिलहनों की कीमतें पूर्वस्तर पर बंद हुईं।

कारोबारी सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में लगभग 0.7 प्रतिशत की तेजी है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज लगभग 1.5 प्रतिशत मजबूत बंद हुआ है।

सूत्रों ने कहा कि मलेशिया और शिकॉगो एक्सचेंज में तेजी के रुख के कारण सोयाबीन और सरसों तेल- तिलहन कीमतों में सुधार आया। सरसों के थोक में भाव पिछले साल से कम हैं और किसान कम मूल्य पर बिक्री करने के लिए मंडियों में अपनी उपज नहीं ला रहे हैं। सोयाबीन किसानों ने भी पिछले साल से कहीं महंगे भाव पर सोयाबीन बीज की खरीद की थी और उन्हें अपनी उपज के अच्छे दाम नहीं मिल रहे। बाजार में सरकार के हालिया सूरजमुखी और सोयाबीन तेल की ‘कोटा प्रणाली’ की वजह से कोटे के अलावा इन तेलों का बाकी आयात नहीं हो रहा क्योंकि आयात शुल्क की वजह से कोटा व्यवस्था के अतिरिक्त आयातित तेल को कोटा व्यवस्था वाले तेल के सस्ते दाम से प्रतिस्पर्धा करनी होगी। कोटा व्यवस्था के कारण बाजार में आपूर्ति कम होने और सस्ते में किसानों द्वारा मंडियों में बिक्री के लिए माल कम लाने से सरसों और सोयाबीन तेल-तिलहन कीमतों में सुधार आया। दाम कम रहने के कारण किसानों द्वारा मंडियों में बिकवाली के लिए माल कम लाने से बिनौला तेल कीमतों में भी सुधार देखा गया। सर्दियों में हल्के तेलों की मांग बढ़ने का भी इन तेल कीमतों पर अनुकूल असर हुआ।

सूत्रों ने कहा कि विदेशों में सूरजमुखी तेल की भारी कमी है और आयात की सीमा खोलने से देश में आयात और आयातक बढ़ेंगे। कोटा के अलावा आयात ठप होने से हल्के तेलों की घरेलू उपलब्धता प्रभावित हो रही है और इसकी वजह से बाकी हल्के तेलों में मजबूती का रुख है।

सूत्रों ने कहा कि सरकार को समय रहते इस कोटा प्रणाली को खत्म करते हुए आयात पूरी तरह खोल देना चाहिये और पहले की तरह 5.5 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा देना चाहिये।

सूत्रों ने कहा कि जाड़े में सीपीओ और पामोलीन तेल की मांग कम हो जाती है लेकिन काफी सस्ता होने की वजह से वैश्विक मांग होने के कारण मलेशिया एक्सचेंज में तेजी होने के बावजूद सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतें पूर्वस्तर पर बंद हुईं।

सूत्रों ने कहा कि खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता खत्म करना देश के तेल उद्योग, किसानों और उपभोक्ताओं के हित में है और सरकार का प्रयास, तिलहन उत्पादन में देश को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाना होना चाहिये।

शुक्रवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 7,325-7,375 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,875-6,935 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,900 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,560-2,820 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 15,100 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,300-2,430 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,370-2,485 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,800-20,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 15,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 14,650 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 13,250 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 9,400 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,600 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 11,000 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 10,000 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,450-5,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज 5,260-5,310 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

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