क्या अमेरिका में इस बार क्रिसमस पर सरकार शटडाउन में होगी

अमेरिकी सांसद शटडाउन से बचाने के लिए पुरजोर कोशिश में जुटे हुए हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

अमेरिकी सांसद शटडाउन से बचाने के लिए पुरजोर कोशिश में जुटे हुए हैं. निर्वाचित राष्ट्पति डॉनल्ड ट्रंप और इलॉन मस्क ने दोनों पार्टियों के बीच हुई सहमति को ध्वस्त करके इसे क्रिसमस के बाद तक टालने से रोक दिया.अमेरिका में सरकारी खर्च के लिए पैसे की सीमा शुक्रवार 20 दिसंबर की रात खत्म हो रही है. रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत वाले संसद के निचले सदन में लाया गया प्रस्ताव कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने पाला बदल कर पास नहीं होने दिया. अब इस सदन के सामने आनन फानन में एक फंडिंग पैकेज तैयार करने की चुनौती है, जो उस करार के जैसा ही हो जिसे, पास नहीं किया जा सका. अगर अगले कुछ घंटों में इस पर सहमति नहीं बन सकी तो संघीय एजेंसियों, राष्ट्रीय पार्कों और कई दूसरी सेवाओं से जुड़े करीब 875,000 लोग बिना वेतन के ही क्रिसमस की छुट्टियों में घर जाने पर मजबूर होंगे. अगर यह बिल पास हो जाता तो सरकार को मार्च के मध्य तक का समय मिल जाता.

पिछले शटडाउन का दुनिया पर असर

हफ्ते भर की नाटकीय घटनाएं

कैपिटॉल हिल पर एक सप्ताह चली नाटकीय घटनाओं की शुरुआत रिपब्लिकन हाउस स्पीकर माइक जॉनसन के पेश किए विशाल फंडिंग बिल से हुई. इसमें कुछ ऐसे उपाय थे जिसने खर्च को काफी ज्यादा बढ़ा दिया. इसके बाद रुढ़िवादी सांसदों ने 1,547 पन्नों के बिल और बढ़े खर्चों पर काफी निराशा जताई. निर्वाचित राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप सरकार का खर्च घटाना चाहते हैं. ट्रंप के सहयोगी इलॉन मस्क ने पूरा बुधवार इस डील की बुराई में बिताया. उन्होंने एक्स पर कई पोस्ट डाल कर इसके खिलाफ लामबंदी की. दूसरी तरफ ट्रंप ने बयान जारी कर मांग की दोनों पार्टियों में इस करार पर दोबारा से बातचीत हो और अतिरिक्त खर्चों को बाहर निकाला जाए. इसके साथ ही दो साल के लिए सरकारी कर्ज की सीमा बढ़ाने पर स्वघोषित रोक लगाई जाए.

ट्रंप को कर्ज पर चर्चा से मुक्त रखने और नई मांग को पूरी करने के लिए रिपब्लिकन सांसद गुरुवार को एक नया पैकेज तैयार करने में जुट गए जो रुढ़िवादियों, ट्रंप, इलॉन मस्क और डेमोक्रैट सांसदों को खुश कर सके. हालांकि यह असंभव साबित हुआ. एक तरफ डेमोक्रैट सांसदों ने इसे दोनों दलों के बीच समझौते के टूटने से खुद को ठगा महसूस कर रहे थे तो दूसरी तरफ दर्जनों रिपब्लिकन सांसदों ने अपने ही नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह कर दिया नतीजा में नया पैकेज संसद से पास नहीं हो सका.

क्या अमेरिका सही मायने में अब भी एक लोकतंत्र है

डॉनल्ड ट्रंप के लिए झटका

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में डेमोक्रैटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज ने सदन में कहा, "कई दशकों से रिपब्लिकन पार्टी वित्तीय जिम्मेदारी, कर्ज और घाटे पर भाषण देती आई है. यह हमेशा पाखंड ही रहा है." उधर निर्वाचित उप राष्ट्रपति जेडी वैंस ने डेमोक्रैट पार्टी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया. उनकी दलील थी कि पार्टी ने रिपब्लिकन पार्टी के पास बहुमत होने के बावजूद भी ट्रंप के एजेंडे को ध्वस्त करने के लिए, "सरकार के शटडाउन को वोट दिया."

पैकेज को जरूरी वोट नहीं मिल पाना ट्रंप के लिए राष्ट्रपति बनने से एक महीने पहले हार के रूप में सामने आया है. कुछ लोग इसे ट्रंप के कार्यकाल में होने वाली उठापटक का संकेत भी मान रहे हैं. ट्रंप और मस्क ने इस संशोधित पैकेज के लिए काफी जोर लगाया था. डॉनल्ड ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि अगर उनकी पसंद का बिल संसद से पास नहीं होता है तो फिर शटडाउन हो जाना चाहिए, और अब यह होना लगभग निश्चित दिख रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति के दफ्तर व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट ने पहले ही एजेंसियों से संभावित शटडाउन के लिए बात करनी शुरू कर दी है. दूसरी तरफ रिपब्लिकन अब तक नये बिल को पास कराने के लिए कोई स्पष्ट तरीका पेश नहीं कर सके हैं.

रिपब्लिकन पार्टी के विभाजन का रिकॉर्ड

सरकार के लिए धन हमेशा से ही एक बोझ रहा है और सांसदों पर इस समय ज्यादा दबाव इशलिए था क्योंक वे 2025 के पूरे साल के लिए बजट पर महीनों की कोशिश के बाद भी सहमति नहीं बना सके. स्पीकर जॉनसन की आलोचना हर तरफ से हो रही क्योंकि वे बातचीत को ठीक से नहीं संभाल सके. जनवरी में जब वो दोबाराच इस पद के चुनाव के लिए उतरेंगे तो उनकी संभावनाएं कमजोर हो सकती हैं.

संसद के उच्च सदन सीनेट में डेमोक्रैटिक पार्टी का बहुमत है. रिपब्लिकन की मदद में उनके लिए कोई खास राजनीतिक फायदा नहीं है. जेफ्रीज ने जोर दे कर कहा है कि वो सिर्फ दोनों पार्टियों के पैकेज को ही वोट देंगे. जाहिर है कि ट्रंप की पार्टी को इस मामले में सहमति के लिए अकेले ही सारी कोशिश करनी होगी. रिपब्लिकन पार्टी के सांसद किसी भी मुद्दे पर असहमति की स्थिति में अपनी ही पार्टी के खिलाफ जा कर वोट दे आते हैं. अमेरिकी संसद में कई बड़े मुद्दों पर लाए गए बिल का यह हाल हो चुका है और इस बार भी ऐसा नहीं होगा यह कोई नहीं कह सकता.

एनआर/आरपी (एएफपी)

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