देश की खबरें | उत्तराखंड के बचाने के लिए कुछ भी करेंगे: धामी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तराखंड में जिलाधारिकों को तीन महीने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लागू करने का अधिकार देने के राज्य सरकार के फैसले की विभिन्न राजनीतिक दलों ने तीखी आलोचना की है। इन आलोचनाओं के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को फैसले का बचाव करते हुए कहा कि प्रदेश को बचाने के लिए सब कुछ किया जाएगा।

देहरादून, पांच अक्टूबर उत्तराखंड में जिलाधारिकों को तीन महीने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लागू करने का अधिकार देने के राज्य सरकार के फैसले की विभिन्न राजनीतिक दलों ने तीखी आलोचना की है। इन आलोचनाओं के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को फैसले का बचाव करते हुए कहा कि प्रदेश को बचाने के लिए सब कुछ किया जाएगा।

इस संबंध में संवाददाताओं द्वारा पूछे जाने पर मुख्यमंत्री धामी ने केवल इतना कहा कि प्रदेश के लिए जो अच्छा होगा, किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘प्रदेश को बचाने के लिए कुछ भी करेंगे।’’

उत्तराखंड सरकार ने हिंसा की घटनाओं की आशंका को देखते हुए प्रदेश में सभी जिलाधिकारियेां को तीन माह के लिए रासुका का उपयोग करने का अधिकार दे दिया है।

प्रदेश के अपर मुख्य सचिव आनंद बर्धन द्वारा सोमवार को यहां जारी अधिसूचना में एक अक्टूबर से 31 दिसंबर 2021 तक तीन माह के लिए प्रदेश के सभी 13 जिलों के जिलाधिकारियों को रासुका के उपयोग का अधिकार दिया गया है।

अधिसूचना के अनुसार, पिछले दिनों उत्तराखंड के कुछ जिलों में हिंसा की घटनाएं हुई हैं और उनकी प्रतिक्रियास्वरूप भी ऐसी घटनाएं हुई हैं और भविष्य में राज्य के अन्य भागों में ऐसी घटनाएं होने की आशंका के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है।

हरिद्वार जिले के रूडकी में एक गिरिजाघर पर रविवार को हमले और तोड़फोड़ की घटना और सरकारी कर्मचारियों के आंदोलन के कारण प्रदेश में उत्पन्न तनाव के मद्देनजर रासुका लागू करने को अहम माना जा रहा है।

पुलिस के एक उच्च अधिकारी के अनुसार, हिंसक घटनाओं को बढ़ावा देने या माहौल खराब करने की कोशिश करने वाले व्यक्ति या समूह के खिलाफ अब जिलाधिकारियों को रासुका के तहत कार्रवाई के लिए सशक्त कर दिया गया है। अधिकारी के अनुसार इस कानून में देश की सुरक्षा को लागू करने के कार्य में बाधा बन रहे व्यक्ति की गिरफ्तारी का भी प्रावधान है।

इस बीच, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं ने सरकार के निर्णय की कडी आलोचना करते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। कांग्रेस महासचिव हरीश रावत ने कहा कि रासुका लगाकर सरकार लोकतांत्रिक लडाई लड़ रहे लोगों में खौफ पैदा करना चाहती है।

उन्होंने कहा, ‘‘उत्तराखंड में तीन माह के लिए रासुका लगाने का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्य सरकार यह बताने में असमर्थ है कि क्या ऐसी स्थितियां पैदा हो गई हैं कि जिसकी वजह से रासुका लगाने का फैसला लिया गया और जिलाधिकारियों को अधिकार दे दिया गया। यह लोकतंत्र व जनतांत्रिक भावनाओं की हत्या है।’’

पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भी मुख्यमंत्री धामी को पत्र लिखकर इस 'काले निर्णय' को वापस लेने को कहा है।

पत्र में उपाध्याय ने कहा कि राज्य में रासुका लागू करने के मुख्यमंत्री धामी के निर्णय से उन्हें अत्यंत दुःख हुआ है और उन्हें उम्मीद है कि वह इसे वापस लेंगे।

महात्मा गांधी की जयंती के ठीक बाद लिए गए इस निर्णय को उन्होंने उस भावना पर कुठाराघात बताया कि जिस भावना से केंद्र और राज्यों की सरकारें उनकी जयन्ती के कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि रासुका लगाना उन हुतात्माओं का अपमान है जिन्होंने अपना वर्तमान और भविष्य इस राज्य को बनाने के लिये क़ुर्बान कर दिया। उपाध्याय ने कहा कि असह​मति के स्वरों को सुनने की व्यवस्था ही नहीं अपितु उसे सम्मान देने के उत्सव का नाम ही लोकतंत्र है। संवाद को अनेक समस्याओं का समाधान बताते हुए कांग्रेस नेता ने धामी से रासुका लागू करने के निर्णय को वापस लेने का आग्रह किया ।

पृथक राज्य आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले क्षेत्रीय राजनीतिक दल उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकारी अध्यक्ष हरीश चंद्र पाठक ने कहा कि रासुका को लागू करना गलत है और इसका निश्चित रूप से दुरूपयोग होगा। उन्होंने कहा, ‘‘मजिस्ट्रेट को अधिकार देने से इनका दुरूपयोग सरकारी कर्मचारियों पर भी हो सकता है। सरकार को अपना इस निर्णय वापस लेना चाहिए।’’

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