जरुरी जानकारी | छाता खरीदते हैं ताकि बारिश होने पर इस्तेमाल कर सकेंः दास

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कमजोर रुपये को सहारा देने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार के इस्तेमाल का पुख्ता संकेत देते हुए कहा कि बारिश के समय इस्तेमाल करने के लिए ही छाता खरीदा जाता है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में आ रही गिरावट के बीच उन्होंने यह बात कही।

मुंबई, 22 जुलाई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कमजोर रुपये को सहारा देने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार के इस्तेमाल का पुख्ता संकेत देते हुए कहा कि बारिश के समय इस्तेमाल करने के लिए ही छाता खरीदा जाता है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में आ रही गिरावट के बीच उन्होंने यह बात कही।

दास ने कहा कि मुद्रा बाजार के अचानक एवं अस्थिर उठापटक के दौरान आरबीआई ने यह सुनिश्चित किया है कि विदेशी मुद्रा बाजार एक टिकाऊ ढंग से काम करे और उसे लेकर अपेक्षाएं भी धरातल पर रहें। उन्होंने कहा कि आरबीआई की विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप बना रहेगा ताकि रुपया अपनी बुनियादी स्थिति के मुताबिक स्तर हासिल कर सके।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत इस साल 7.5 प्रतिशत तक टूट चुकी है। इसने इसी हफ्ते पहली बार 80 रुपये का स्तर भी पार कर लिया।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो की निकासी और आयात जरूरतों से बाजार में डॉलर की आपूर्ति कम हो जाने से केंद्रीय बैंक ने अमेरिकी डॉलर की आपूर्ति बाजार में बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा की नकदी को समुचित स्तर पर रखने के लिए आरबीआई मुद्रा बाजार में डॉलर की आपूर्ति करता रहा है।

उन्होंने कहा, "आखिर विदेशी पूंजी की आवक तेज रहते समय हमने जो विदेशी मुद्रा भंडार खड़ा किया था, उसका यही मकसद है। मैं कहना चाहता हूं कि आप छाता इसीलिए खरीदते हैं कि बारिश होने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके।"

डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट को थामने के लिए आरबीआई ने बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल किया है। गत आठ जुलाई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 8.062 अरब डॉलर कम होकर 580.252 अरब डॉलर रह गया था।

दास ने कहा, "रुपये के एक खास स्तर तक बने रहने के बारे में आरबीआई ने कोई धारणा नहीं तय की हुई है। लेकिन हम इसका व्यवस्थित विकास सुनिश्चित करना चाहेंगे और हम इसमें तेज उतार-चढ़ाव नहीं होने देंगे।"

प्रेम

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