देश की खबरें | वालयार दुष्कर्म पीड़िताओं की मां ने पूर्व अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए अदालत का रुख किया

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कोच्चि, 12 जुलाई वालयार बलात्कार मामले में पीड़िताओं की मां द्वारा केरल उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है जिसमें लड़कियों के बारे में कथित रूप से ‘अशोभनीय’ और ‘अपमानजनक’ टिप्पणियों के लिए एक पूर्व जांच अधिकारी (आईओ) के खिलाफ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

अदालत ने बुधवार को मामले में सुनवाई 20 जुलाई तक स्थगित कर दी और मामले में सहायता के लिए एक न्यायमित्र की नियुक्ति भी की।

पीड़िताओं की मां ने वकील पीवी जीवेश के माध्यम से दायर अपनी याचिका में एक सत्र अदालत के आदेश को चुनौती दी है जिसने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के तहत अपराध पर संज्ञान नहीं लिया। महिला की शिकायत के अनुसार अधिकारी ने इस अपराध को अंजाम दिया।

महिला की याचिका में कहा गया कि सत्र अदालत ने केवल ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण’ (पॉक्सो) कानून की धारा 23(1) के तहत अपराध का संज्ञान लिया था।

पॉक्सो कानून की धारा 23(1) कहती है, ‘‘कोई भी व्यक्ति पूर्ण और प्रामाणिक जानकारी के बिना किसी भी प्रकार के मीडिया या स्टूडियो या फोटोग्राफिक सुविधाओं से किसी भी बच्चे पर कोई रिपोर्ट या टिप्पणी प्रस्तुत नहीं करेगा, जिसका प्रभाव उसकी प्रतिष्ठा को कम करने या उसकी गोपनीयता का उल्लंघन करने पर हो सकता है।’’

याचिका में दावा किया गया कि विशेष जांच दल की अगुवाई कर रहे जांच अधिकारी ने एक विशेष अदालत द्वारा मामले में सुनवाई के दौरान जानबूझकर एक प्रमुख दृश्य मीडिया के माध्यम से एक टिप्पणी की जो नाबालिग लड़कियों और उनकी मां की साख, निजता और गरिमा को कम करने वाली और जानबूझकर उन्हें अपमानित करने के लिए थी।

इस मामले में दो बहनें उनके कथित यौन उत्पीड़न के बाद 2017 में करीब दो महीने के अंतर से अपनी झोपड़ी में रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत पाई गई थीं।

बड़ी बहन 13 साल की थी और 13 जनवरी को उसका शव झोपड़ी में फांसी के फंदे से लटका पाया गया था, वहीं उसकी नौ साल की बहन इसी तरह 4 मार्च, 2017 को मृत पाई गई थी।

लड़कियों की मां ने आरोप लगाया था कि यह हत्या का मामला है, लेकिन वायलार पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि पांच लोगों ने अप्राकृतिक तरीके से लड़कियों का करीब एक साल तक यौन शोषण किया और इस तरह उन्हें खुदकुशी के लिए मजबूर किया गया। आरोपियों में एक किशोर था।

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