देश की खबरें | दूरदृष्टा दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को दबा दिया गया: आर एन रवि
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि ने मंगलवार को दावा किया कि राजनेता और एकात्म मानववाद के प्रवर्तक दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को दबा दिया गया क्योंकि वह जनसंघ से जुड़े थे।
चेन्नई, 21 फरवरी तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि ने मंगलवार को दावा किया कि राजनेता और एकात्म मानववाद के प्रवर्तक दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को दबा दिया गया क्योंकि वह जनसंघ से जुड़े थे।
राज्यपाल ने कहा कि सालों से देश की नीतियां कार्ल मार्क्स एवं रूसो जैसे दार्शनिकों के नजरिये से बनायी गयीं और उनमें भारतीय दृष्टिकोण का अभाव था।
उन्होंने लोगों को धर्म का मतलब हिंदू धर्म समझ नहीं लेने की अपील करते हुए कहा कि धर्म का तात्पर्य नियमों का एक ऐसा समुच्च्य है जिसमें नास्तिक या मूर्तिपूजक जैसे शब्द नहीं है बल्कि सभी को समान दृष्टि से देखा जाता है।
राज्यपाल ने यहां राजभवन में अलगप्पा विश्वविद्यालय की दीनदयाल उपाध्याय पीठ के साथ आयोजित एक कार्यक्रम में एकात्म मानववाद संबंधी उपाध्याय की किताब के तमिल संस्करण का लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से लंबे समय तक महान दूरदृष्टा दीनदयाल के विचारों को इसलिए दबाया गया क्योंकि वह जनसंघ से जुड़े थे। उनका एकात्म मानववाद भले ही बहुत दार्शनिक लगे लेकिन इसे हमारे देश में निरक्षर के लिए भी आसानी से स्पष्ट किया गया है। उन्होंने जो कुछ कहा है, वह ऐसी बात है जो हमारी संस्कृति और हमारे भारत में पहले से है।’’
इस लोकार्पण समारोह में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ तमिलनाडु के कुलपति एम कृष्णन, आईसीएसएसआर के पूर्व अध्यक्ष पी कनग सबापति, स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक और लेखा परीक्षक आर सुंदरम, पांडे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के पंजीयक आर गायत्री एवं पुस्तक के लेखक और दीनदयाल पीठ के अध्यक्ष प्रोफेसर बी धर्मलिंगम भी मौजूद थे।
राज्यपाल ने कहा, ‘‘ दीनदयाल ने जो कुछ कहा, वह देश में आम निरक्षर या आम व्यक्ति समझ जाता है लेकिन शिक्षित, खासकर अंग्रेजी पढे -लिखे लोग नहीं समझ पाते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ ब्रिटिश देश को बर्बाद कर गये, उन्होंने देश को आर्थिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से पूरी तरह बर्बाद कर दिया। यह केवल राजनीतिक अधीनता नहीं थी बल्कि देश के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत ढांचे को भी ध्वस्त कर दिया गया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ एक प्रकार से, देश अपने मार्ग से भटक गया और नीतियां पश्चिमी चिंतन, विचारों एवं विचारधाराओं के आधार पर बनायी गयीं जबकि ऐसे विचार एवं विचारधारा से दुनिया में विनाश ही हुए हैं।’’
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