देश की खबरें | जहांगीरपुरी में नियमित प्रशासनिक कवायद को अनुचित सांप्रदायिक रंग दिया गया: निगम ने अदालत से कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने (एनडीएमसी) सोमवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि जहांगीरपुरी में अतिक्रमण-रोधी अभियान मामले के याचिकाकर्ताओं ने एक नियमित प्रशासनिक कवायद को अनुचित ढंग से सांप्रदायिक रंग देकर इसे सनसनीखेज बना दिया।

नयी दिल्ली, नौ मई उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने (एनडीएमसी) सोमवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि जहांगीरपुरी में अतिक्रमण-रोधी अभियान मामले के याचिकाकर्ताओं ने एक नियमित प्रशासनिक कवायद को अनुचित ढंग से सांप्रदायिक रंग देकर इसे सनसनीखेज बना दिया।

जहांगीरपुरी में अतिक्रमण-रोधी अभियान के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद एवं अन्य द्वारा दायर याचिका पर जवाबी हलफनामा दाखिल करते हुए एनडीएमसी ने कहा कि यह याचिका खारिज करने योग्य है क्योंकि उन्होंने झूठ का सहारा लिया है।

एनडीएमसी ने कहा, ''याचिका इसी आधार पर खारिज करने योग्य है कि याचिकाकर्ता ने झूठ का सहारा लिया और एक नियमित प्रशासनिक कवायद को अनुचित सांप्रदायिक रंग देकर इसे सनसनीखेज बना दिया।''

निगम ने कहा कि उसने केवल सार्वजनिक भूमि पर बने अवैध निर्माण और घरों की चारदीवारी से बाहर निकलकर बनाए गए अस्थायी ढांचे को ही हटाया था, जिसके लिए नोटिस दिए जाने की जरूरत नहीं होती।

दिल्ली नगर निगम अधिनियम का हवाला देते हुए एनडीएमसी ने कहा कि इस तरह के निर्माण को हटाने के लिए पहले से नोटिस दिए जाने की जरूरत नहीं होती।

निगम ने कहा कि यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश के बाद, जिन लोगों को सड़क से हटाया गया था, उन्होंने दोबारा से फुटपाथ/सड़क पर अतिकम्रण कर लिया है।

इसने कहा कि जब एक सड़क या फुटपाथ से अतिक्रमण हटाया जाता है तो यह प्रक्रिया एक हिस्से से शुरू होकर अंतिम हिस्से पर जाकर समाप्त होती है और ऐसा बिना किसी धार्मिक भेदभाव के किया जाता है।

अतिक्रमण-रोधी अभियान के दौरान ‘बुलडोजर’ के उपयोग के संबंध में निगम ने कहा कि सड़क/फुटपाथ पर कुछ अस्थायी निर्माण इस तरह के थे, जिसे हटाने के लिए इस मशीन की आवश्यकता थी।

निगम ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर मामले को सनसनीखेज बनाया। साथ ही उन आरोपों से भी इनकार किया कि एक विशेष धर्म या समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।

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