विदेश की खबरें | यूक्रेन: रूस की 2020 की नीति परमाणु हथियारों के 'रक्षात्मक' उपयोग की अनुमति देती है

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. लंदन, 31 मार्च (द कन्वरसेशन) 24 फरवरी को रूसी सेना के यूक्रेनी क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही, परमाणु संघर्ष का संभावित खतरा बताया गया था। आक्रमण से कुछ दिन पहले रूस ने विशाल पैमाने पर अभ्यास किया, जिसमें परमाणु हमले का जवाब देने वाले हथियारों को शामिल किया गया।

लंदन, 31 मार्च (द कन्वरसेशन) 24 फरवरी को रूसी सेना के यूक्रेनी क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही, परमाणु संघर्ष का संभावित खतरा बताया गया था। आक्रमण से कुछ दिन पहले रूस ने विशाल पैमाने पर अभ्यास किया, जिसमें परमाणु हमले का जवाब देने वाले हथियारों को शामिल किया गया।

फिर, जैसे ही उनके सैनिकों ने यूक्रेन में सीमा पार की, व्लादिमीर पुतिन ने नाटो और पश्चिम के लिए तत्काल एक धमकी जारी करते हुए कहा कि अगर उन्होंने इस संघर्ष में हस्तक्षेप किया तो उन्हें ‘‘इसका ऐसा नतीजा भुगतना पड़ेगा, जैसा उन्होंने इतिहास में कभी नहीं देखा होगा।’’

कुछ ही दिन बाद, 27 फरवरी को, रूसी राष्ट्रपति ने घोषणा की कि उन्होंने अपने देश के परमाणु बलों को "विशेष युद्ध तत्परता" की स्थिति में आने का आदेश दिया है।

लेकिन परमाणु हथियारों के इस्तेमाल तक पहुंचने की रूस की धमकी में विश्वसनीयता का अभाव है। यूक्रेन में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से भयानक विनाश हो सकता है, और यह जरूरी नहीं कि ऐसा करके रूस इस युद्ध को जीत ही जाए। दूसरी ओर, इस बात का जोखिम भी अधिक है कि रूस के इस कदम का पश्चिमी देश भी परमाणु प्रतिक्रिया के रूप में जवाब दें।

नई नीति

हाल के वर्षों में, रूस ने अपने परमाणु शस्त्रागार के उपयोग पर अपनी नीति की समीक्षा की है। जून 2020 में, रूसी संघ के राष्ट्रपति के कार्यालय ने एक कार्यकारी आदेश प्रकाशित किया: परमाणु निरोध पर रूसी संघ की राज्य नीति के मूल सिद्धांत। इस आदेश ने इस बारे में काफी बहस पैदा कर दी है कि क्या यह इस बात का संकेत है कि रूस पहले की तुलना में परमाणु हथियारों का उपयोग करने के लिए अधिक तैयार हो सकता है।

आदेश में कहा गया है कि रूस परमाणु हथियारों को "विशेष रूप से निरोध के साधन के रूप में" मानता है। इसमें कहा गया है : रूस की रणनीति, स्वभाव से रक्षात्मक है, इसका उद्देश्य परमाणु बलों की क्षमता को परमाणु निरोध के लिए पर्याप्त स्तर पर बनाए रखना है, और राष्ट्रीय संप्रभुता और राज्य की क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा की गारंटी देता है, और रूसी संघ और / या उसके सहयोगियों के खिलाफ आक्रामण की स्थिति में विरोधी की रोकथाम के लिए है।

लेकिन दस्तावेज़ यह सुझाव भी देता है कि पारंपरिक संघर्ष को हारने की स्थिति आने पर रूस परमाणु हथियारों के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ सकता है : "एक सैन्य संघर्ष की स्थिति में, यह नीति सैन्य कार्रवाइयों की वृद्धि को रोकने और उन शर्तों पर इसकी समाप्ति का प्रावधान करती है, जो रूसी संघ और/या उसके सहयोगियों को स्वीकार्य हों"।

इसे अमेरिकी विश्लेषकों द्वारा व्यापक रूप से "एस्केलेट टू डीस्केलेट" की नीति के रूप में वर्णित किया गया है, हालांकि रूसी सैन्य विशेषज्ञों द्वारा इससे इनकार किया गया है।

यह समझना मुश्किल है कि मौजूदा संघर्ष के मामले में यह कैसे लागू होगा, क्योंकि यूक्रेन रूसी आक्रमण के खिलाफ खुद का बचाव कर रहा है और फिलहाल, किसी भी मामले में - रूस की "राष्ट्रीय संप्रभुता" या "क्षेत्रीय अखंडता" के लिए खतरा नहीं है। रूस पूरी तरह से युद्ध के बढ़ने के लिए जिम्मेदार है और किसी भी समय युद्ध को समाप्त कर सकता है।

इतना ही नहीं, बल्कि यह सोचना भी मुश्किल है कि यूक्रेन के संदर्भ में एक छोटे, सामरिक परमाणु हथियार का भी कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि इसे प्रभावी बनाने के लिए यूक्रेनी सैनिकों की पर्याप्त सांद्रता नहीं है।

उपरोक्त उल्लिखित 2020 के मूल सिद्धांतों पर दस्तावेज़ में रूस को परमाणु हथियारों के संभावित इस्तेमाल की स्थिति तक लाने की जो परिस्थितियां बताई गई हैं उसमें "रूसी संघ और / या उसके सहयोगियों के क्षेत्र पर हमला करते हुए" बालिस्टिक मिसाइल छोड़ना या रूस और उसके सहयोगियों के खिलाफ सामूहिक विनाश के हथियारों के अन्य उपयोग शामिल हैं। ।

इनमें "रूसी संघ के महत्वपूर्ण सरकारी या सैन्य स्थलों पर विरोधी द्वारा हमला, जिसके विघटन से परमाणु बलों की प्रतिक्रिया कार्रवाई कमजोर होगी" और साथ ही "रूसी संघ के खिलाफ पारंपरिक हथियारों के उपयोग के साथ आक्रामकता के कारण जब राज्य का अस्तित्व खतरे में हो"।

मिश्रित इशारे

यूक्रेन के भीतर के किसी ठिकाने पर किसी भी परमाणु हमले को व्यापक परिचालन समस्याओं का सामना करना पड़ेगा क्योंकि रूसी सेनाएं यूक्रेन के हर हिस्से में जमीन पर हैं। रूसी सेना के काफी पीछे हटने से पहले यूक्रेन में कहीं भी परमाणु हमले से न केवल बड़ी संख्या में नागरिक मारे जाएंगे, बल्कि बड़ी संख्या में रूसी सैनिकों और उपकरणों को भी नष्ट कर दिया जाएगा।

यही नहीं, यह संघर्ष के बाद देश को रूसी संघ में एकीकृत करने में अतुलनीय चुनौतियां पैदा करेगा - अगर ऐसा कोई इरादा हो ता।

रूस के परमाणु सिद्धांत पर 2020 के दस्तावेज़ में हाल के बयानों ने फिर से पुष्टि की कि रूसी परमाणु बलों का मुख्य उद्देश्य निरोध है और आक्रामक युद्ध लड़ना नहीं है।

लेकिन जैसा कि यूक्रेन में रूसी सेना की प्रगति रुक ​​गई है और रूस ऐसे संकेत दे रहा है कि वह पश्चिमी यूक्रेन से पीछे हट सकता है और लुहान्स्क, डोनबास और क्रीमिया पर ध्यान केंद्रित कर सकता है, रूस के परमाणु हथियारों का उपयोग करने की आशंकाएं फिर उभरने लगी हैं।

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