देश की खबरें | आज की राजनीति तथ्यों को चुन-चुनकर पेश करने की है: जयशंकर ने टीपू सुल्तान पर कहा

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नयी दिल्ली, एक दिसंबर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि इतिहास ‘‘जटिल’’ है और आज की राजनीति अपने हिसाब से तथ्यों को ‘‘चुन-चुनकर पेश’’’ करने की है तथा टीपू सुल्तान के मामले में भी काफी हद तक ऐसा ही हुआ है।

विदेश मंत्री ने दावा किया कि मैसूर के पूर्व शासक के बारे में पिछले कुछ वर्षों में एक ‘‘विशेष विमर्श’’ प्रचारित किया गया।

जयशंकर ने यहां ‘टीपू सुल्तान: द सागा ऑफ मैसूर इंटररेग्नम 1761-1799’ पुस्तक के विमोचन के अवसर पर अपने संबोधन में कहा, ‘‘कुछ बुनियादी सवाल हैं जिनका आज हम सभी को सामना करना पड़ रहा है कि हमारे अतीत को कितना छिपाया गया है, जटिल मुद्दों को कैसे नजरअंदाज किया गया है और कैसे तथ्यों को शासन की सुविधा के अनुसार ढाला गया है।’’

यह पुस्तक इतिहासकार विक्रम संपत ने लिखी है।

विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘पिछले दशक में हमारी राजनीतिक व्यवस्था में आए बदलावों ने वैकल्पिक दृष्टिकोणों और संतुलित बातों के उद्भव को प्रोत्साहित किया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम अब वोट बैंक के बंधक नहीं हैं, न ही असहज करने वाले सत्य को सामने लाना राजनीतिक रूप से गलत है। ऐसे कई और विषय हैं जिन पर समान स्तर की निष्पक्षता की आवश्यकता है।’’

मंत्री ने कहा कि खुले विचारों वाली विद्वता और वास्तविक बहस ‘‘बहुलवादी समाज और जीवंत लोकतंत्र के रूप में हमारे विकास’’ के लिए अहम है।

जयशंकर ने रेखांकित किया कि टीपू सुल्तान भारतीय इतिहास में एक ‘‘जटिल शख्सियत’’ हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘एक ओर उनकी छवि एक ऐसे प्रमुख व्यक्ति की है जिन्होंने भारत पर ब्रिटिश औपनिवेशिक नियंत्रण थोपे जाने का विरोध किया। यह एक तथ्य है कि उनकी हार और मृत्यु को प्रायद्वीपीय भारत के भाग्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा सकता है। साथ ही, आज भी कई क्षेत्रों में, मैसूर में, कूर्ग और मालाबार में कुछ लोग उनके प्रति तीव्र प्रतिकूल भावना रखते हैं।’’

जयशंकर ने दावा किया कि निश्चित रूप से राष्ट्रीय स्तर पर समकालीन इतिहास लेखन मुख्य रूप से पहले पहलू पर ही केंद्रित रहा है, जबकि दूसरे पहलू को ‘‘कम महत्व दिया गया।’’

विदेश मंत्री ने कहा कि ऐसा ‘‘बिना सोचे समझे नहीं’’ हुआ।

उन्होंने कहा, ‘‘सभी समाजों में इतिहास जटिल होता है और वर्तमान राजनीति तथ्यों को अकसर चुन-चुनकर पेश करती है। टीपू सुल्तान के मामले में काफी हद तक ऐसा ही हुआ है।’’

मंत्री ने कहा कि ‘‘अधिक जटिल वास्तविकता को दरकिनार कर टीपू-अंग्रेज पहलू’’ को उजागर करके ‘‘पिछले कुछ वर्षों में एक विशेष विमर्श को आगे बढ़ाया गया है।’’

उन्होंने कहा कि संपत की किताब को जीवनी कहना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘‘यह इससे कहीं बढ़कर है, यह तेजी से बदलते एक जटिल युग को दर्शाने के साथ-साथ राजनीति, रणनीति, प्रशासन, समाजशास्त्र और यहां तक ​​कि कूटनीति के बारे में भी जानकारी देती है।’’

जयशंकर ने कहा कि यह किताब टीपू सुल्तान के बारे में न केवल तथ्य प्रस्तुत करती है ताकि पाठक स्वयं निर्णय ले सकें, बल्कि यह उन्हें सभी जटिलताओं के साथ सामने लाती है।

मंत्री ने रेखांकित किया कि इस प्रक्रिया में संपत को ‘‘रूढ़िवाद की कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा होगा।’’

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