देश की खबरें | संविधान और अदालत के आदेश का सम्मान नहीं करने वालों को सबक सिखाया जाना चाहिये: कर्नाटक गृह मंत्री

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कोप्पल, 31 मार्च कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने हलाल विवाद के बीच बृहस्पतिवार को कहा कि संविधान और अदालत के फैसले का सम्मान नहीं करने वालों को सबक सिखाया जाना चाहिये।

दरअसल कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने हिंदुओं से 'होसा तड़ाकू' महोत्सव के दौरान हलाल मांस का इस्तेमाल नहीं करने का अनुरोध किया है।

मंत्री का बयान ऐसे समय में आया है जब हिजाब पर कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ मुसलमानों के एक वर्ग ने राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। न्यायालय ने कक्षाओं में स्कूल में वर्दी के साथ हिजाब पहनने की अनुमति देने की उडुपी गवर्नमेंट गर्ल्स प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज की मुस्लिम छात्राओं की याचिका को खारिज कर दिया था।

ज्ञानेंद्र ने यहां पत्रकारों से कहा, ''जो लोग भारतीय संविधान का सम्मान नहीं करते और कहते हैं कि अदालत का फैसला उन पर लागू नहीं होता, उन्हें सबक सिखाया जाना चाहिए। हम उन्हें विनम्रतापूर्वक कह रहे हैं कि आपको इस देश में इस तरह के काम नहीं करने चाहिए। कोई भी आपसे नफरत नहीं करता और हमें भाइयों की तरह रहना है।''

मंत्री ने कहा कि हलाल से संबंधित मुद्दे पर सरकार की सीमित भूमिका है, जिसे लोगों की समझ पर छोड़ दिया गया है।

ज्ञानेंद्र ने कहा कि 'हलाल भोजन का बहिष्कार' अभियान कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि आस्था और भावनाओं से जुड़ा है, जिसे हर कोई जानता है।

एक अप्रैल को मनाए जाने वाले उगाड़ी उत्स्व के एक दिन बाद हिंदुओं का एक वर्ग जो मांसाहारी भोजन करते हैं, वे ‘होसा तड़ाकू’ का आयोजन करते है। जहां वे मांस पकाते हैं ।

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