देश की खबरें | अन्नाद्रमुक में उठापटक से द्रमुक को फायदा, भाजपा के लिए नयी संभावना

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक में जारी कलह और उठापटक के मद्देनजर जहां सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) चुनावी लिहाज से काफी फायदेमंद स्थिति में है, वहीं फिलहाल हाशिये पर खड़ी भाजपा चुनावी राजनीति में अधिक हिस्सेदारी की आकांक्षा पाल सकती है।

चेन्नई, 11 जुलाई तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक में जारी कलह और उठापटक के मद्देनजर जहां सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) चुनावी लिहाज से काफी फायदेमंद स्थिति में है, वहीं फिलहाल हाशिये पर खड़ी भाजपा चुनावी राजनीति में अधिक हिस्सेदारी की आकांक्षा पाल सकती है।

हालांकि, अन्नाद्रमुक के अधिकतर पार्टी कार्यकर्ता और पदाधिकारी कद्दावर नेता ई.के़ पलानीस्वामी के समर्थन में खड़े दिखते हैं, लेकिन तमिलनाडु के चुनिंदा क्षेत्रा में पार्टी कार्यकर्ताओं के कई धड़ों में निष्कासित नेता ओ पनीरसेल्वम का भी प्रभाव है।

ठीक इसी समय वीके शशिकला, दिवंगत पार्टी दिग्गज जे जयललिता की भरोसेमंद, भी दिवंगत नेता की विरासत पर दावा कर रही हैं। शशिकला ने ऐलान किया है कि पनीरसेल्वम और पलानीस्वामी, दोनों ही ‘छाया मात्र’ हैं, जबकि वह एक मात्र ‘सच’ हैं। यानी वह खुद को वास्तविक नेता बता रही हैं।

पन्नीरसेल्वम के निष्कासन और अन्नाद्रमुक मुख्यालय में हिंसा के बाद शशिकला का यह बयान आया है। पुदुकोट्टई जिले में अपने समर्थकों को एक किस्सा सुनाते हुए उन्होंने परोक्ष रूप से उन दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ता केवल उनके साथ हैं।

शशिकला ने इस बात को रेखांकित किया है कि वह पार्टी नेतृत्व पर काबिज होने की दौड़ में बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि वह अन्नाद्रमुक को एकजुट करके जीत की ओर ले जाएंगी।

शशिकला के साथ उनके भतीजे टीटीवी दिनाकरन, जो एक अलग संगठन के प्रमुख हैं, भी अन्नाद्रमुक समर्थक और द्रमुक विरोधी वोट हासिल करने की दौड़ में हैं। इससे अन्नाद्रमुक के वोट के लिए लड़ने के लिए प्रमुख नेता पलानीस्वामी सहित चार खिलाड़ियों के लिए मैदान खुला हुआ है।

दिनाकरन की अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में कई निर्वाचन क्षेत्रों में अन्नाद्रमुक का खेल खराब करने का काम किया।

राजनीतिक टिप्पणीकार और कई दशकों तक अन्नाद्रमुक के इतिहासकार दुरई करुणा ने ‘पीटीआई-’ से कहा कि विभाजित अन्नाद्रमुक चुनावी लिहाज से केवल द्रमुक को काफी फायदा पहुंचाने का काम करेगी। अन्नाद्रमुक के मतदाताओं में 'द्रविड़ियन और एमजीआर-अम्मा वोट' शामिल हैं, जो द्रविड़ समर्थक विचारधारा के हैं, लेकिन द्रमुक और उसके नेतृत्व के खिलाफ हैं। अन्नाद्रमुक के संस्थापक एमजी रामचंद्रन को प्यार से एमजीआर कहा जाता है।

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