देश की खबरें | अयोग्यता याचिका पर विचार करते समय विधानसभाध्यक्ष को पूर्व विधायक का दर्जा वापस लेने का अधिकार नहीं : न्यायालय

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नयी दिल्ली, 28 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को व्यवस्था दी कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत किसी विधायक के खिलाफ अयोग्यता याचिका का फैसला करते समय विधानसभा अध्यक्ष को पूर्व विधायक का दर्जा वापस लेने का अधिकार नहीं है।

न्यायालय ने यह आदेश जनता दल (यू) के तत्कालीन चार विधायकों - ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, रवींद्र राय, नीरज कुमार सिंह और राहुल कुमार की अपील पर पारित किया। इन विधायकों को 11 नवंबर, 2014 को बिहार विधानसभा के अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने न केवल अयोग्य घोषित किया था, बल्कि पूर्व विधायक का दर्जा भी ले लिया था जिससे वे पेंशन और अन्य लाभों से वंचित हो गए थे।

प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने चार अयोग्य विधायकों का पूर्व विधायकों का दर्जा बहाल कर दिया जिससे वे पेंशन और अन्य लाभों के हकदार होंगे।

पीठ ने पूर्व विधायकों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत और वकील स्मारहर सिंह से कहा कि 15वीं विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसलिए वह इस मूल मुद्दे पर नहीं गौर करेगी कि क्या अयोग्यता असंवैधानिक थी।

पीठ में न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला भी शामिल हैं। पीठ ने इस दलील को स्वीकार कर लिया कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत विधानसभाध्यक्ष को किसी विधायक को पेंशन और संबंधित लाभों से वंचित करने तथा पूर्व विधायक का दर्जा लेने का कोई अधिकार नहीं है।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘हमारी सुविचारित राय के अनुसार इस तरह का निर्देश जारी करना, विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में नहीं है... इसलिए, हमने आदेश के पैरा 28 में विधानसभा अध्यक्ष के निर्देशों को रद्द कर दिया। इन टिप्पणियों के साथ एसएलपी (विशेष अनुमति याचिका) का निपटारा किया जाता है। चूंकि, हमने अयोग्यता के विषय पर गौर नहीं किया है, इसलिए सभी कानूनी मुद्दों को खुला छोड़ दिया गया है।”

जद (यू) के मुख्य सचेतक श्रवण कुमार ने 21 जून, 2014 को चार विधायकों को अयोग्य ठहराने का अनुरोध करते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने पार्टी नेताओं अनिल शर्मा और सरबर अली को उस वर्ष होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए उम्मीदवार बनाए जाने पर जोर दिया था, जबकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर फैसला किया था कि शरद यादव, पवन वर्मा और गुलाम रसूल को उम्मीदवार बनाया जाएगा। उनके अनुरोध पर विचार करते हुए, विधानसभाध्यक्ष ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया था।

पटना उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने विधायकों को अंतरिम राहत दी थी लेकिन बाद में जद (यू) के मुख्य सचेतक की याचिका पर एक खंडपीठ ने उस आदेश को पलट दिया था।

इसके बाद अयोग्य ठहराए गए चार विधायकों ने उच्चतम न्यायालय में अपील की थी जहां से उन्हें अंतरिम राहत मिली थी।

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