देश की खबरें | अदालत में होम्योपैथी से 25 गोलियों के घाव ठीक होने का दावा करने वाली महिला की याचिका खारिज

नयी दिल्ली, सात मार्च दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मामले में आरोपियों को तलब किए जाने की एक महिला की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें याचिकाकर्ता ने हमले के बाद होम्योपैथी के जरिए अपने 25 गोलियों के घाव ठीक होने का दावा किया है।

न्यायमूर्ति अनूप जे भंभानी ने कहा कि सत्र न्यायालय और मजिस्ट्रेट न्यायालय के उन आदेशों में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है जिनमें 2012 में महिला की शिकायत में नामित कथित आरोपियों को तलब करने से इनकार किया गया था।

याचिकाकर्ता महिला ने आरोप लगाया कि उस पर कुछ लोगों ने हमला किया और उनके पास ‘‘गोलियों से पूरी तरह भरी हुई’’ रिवॉल्वर और मशीन गन थीं तथा इस हमले में वह गोलियां लगने से घायल हो गई।

महिला ने कहा कि हमले के बाद वह किसी अस्पताल, चिकित्सक या सर्जन के पास नहीं गई और उसने अपने घावों को ठीक करने के लिए ‘कैलेंडुला 30’, ‘सिलिसिया 30’, ‘अर्निका 200’ जैसी कुछ होम्योपैथिक दवाएं लीं, जिसके बाद उसके सिर, हृदय और हाथ से ‘‘गोलियां निकल गईं।’’

अदालत ने छह मार्च को याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘‘याचिकाकर्ता की गवाही के संबंध में इस अदालत को कोई टिप्पणी करने की स्पष्ट रूप से आवश्यकता नहीं है।’’

अदालत ने कहा कि महिला के कथनों में ‘‘कोई सुसंगति या प्रमाणिकता नजर नहीं आ रही।’’

उसने कहा कि अधीनस्थ अदालत ने याचिकाकर्ता के मामले को खारिज करते हुए कहा था कि साक्ष्यों के साथ ही उसके कथन भी प्रथम दृष्टया असंभव और अविश्वसनीय हैं।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘उनके आदेशों में कोई त्रुटि नहीं थी।’’

सत्र न्यायालय ने कहा था कि वह महिला की ‘‘मनोवैज्ञानिक स्थिति’’ पर अपनी टिप्पणी को ‘‘सुरक्षित’’ रख रहा है।

उच्च न्यायालय ने सत्र न्यायालय को संदर्भित करते हुए कहा कि आरोप ‘‘पूरी तरह से बेतुके’’ और ‘‘असंभव’’ हैं, क्योंकि अगर उसकी कहानी पर विश्वास किया जाए तो नजदीक से गोलियां मारे जाने के कारण वे उसके हृदय, सिर और अन्य अंगों में गहरी धंसी होंगी और ऐसे में कोई ऑपरेशन कराए बिना ‘‘इस प्रकार के जानलेवा हमले’’ से बच पाना उसके लिए असंभव होता।

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