नयी दिल्ली, 21 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का वह आदेश खारिज कर दिया, जिसमें उसने राजधानी के मसूदपुर गांव में 100 साल से अधिक पुराने श्मशान को किशनगढ़ स्थानांतरित करने का निर्देश देने वाले अपने दिसंबर 2003 के फैसले को संशोधित करने से इनकार कर दिया था।
शीर्ष अदालत ने दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) को एक साल के भीतर श्मशान को बिजली से संचालित होने वाले आधुनिक शवदाह गृह में स्थानांतरित करने के लिए कदम उठाने के लिए कहा, जो ग्रामीणों के साथ-साथ निकटवर्ती इलाकों के निवासियों के बड़े हित में होगा।
न्यायमूर्ति एम. आर. शाह और न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश की पीठ ने उच्च न्यायालय के 2016 के फैसले के खिलाफ एसडीएमसी की अपील पर आज अपना निर्णय सुनाया।
रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), वसंत कुंज द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने अपने दिसंबर 2003 के आदेश में, नगर निगम को किशनगढ़ में आवंटित भूमि पर कब्जा करने और इसे श्मशान के रूप में इस्तेमाल के लिए सभी आवश्यक व्यवस्था करने का निर्देश किया था।
शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार, नगर निगम की स्थायी समिति ने मसूदपुर गांव में श्मशान को बंद नहीं करने का एक प्रबुद्ध निर्णय लिया था।
शीर्ष अदालत ने कहा कि अधिनियम के लागू होने से पहले से ही श्मशान का इस्तेमाल लंबे समय से किया जा रहा है।
पीठ ने कहा, ‘‘वसंत कुंज में आवासीय कॉलोनी 1990 में अस्तित्व में आई हैं। इसलिए, प्रासंगिक समय पर जब वसंत कुंज में आवासीय कॉलोनियां अस्तित्व में आईं, गांव मसूदपुर में पहले से ही एक श्मशान था।’’
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